बारिश का पानी आंखों के लिए कितना सुरक्षित? मानसून में बढ़ रहे आई इंफेक्शन के मामलों के बीच डॉक्टरों की बड़ी सलाह, इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें
क्या बारिश का पानी आंखों में संक्रमण करता है या असली खतरा कहीं और छिपा है? मानसून में वायरल और बैक्टीरियल आई इंफेक्शन क्यों तेजी से बढ़ते हैं, किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है और बारिश का पानी आंखों में चले जाए तो तुरंत क्या करना चाहिए?
मानसून की पहली बारिश गर्मी से राहत जरूर देती है, लेकिन यही मौसम संक्रमणों का जोखिम भी बढ़ा देता है। इन दिनों अस्पतालों और नेत्र विशेषज्ञों के पास आंखों में लालपन, जलन, खुजली, पानी आने और कंजंक्टिवाइटिस जैसी शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर क्या बारिश का पानी सीधे आंखों में संक्रमण पैदा करता है? विशेषज्ञों की मानें तो इसका जवाब पूरी तरह हां या नहीं में नहीं है। सामान्य परिस्थितियों में आसमान से गिरने वाला ताजा बारिश का पानी खुद संक्रमण नहीं फैलाता, लेकिन जब यही पानी हवा में मौजूद धूल, प्रदूषण, बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आता है, तब आंखों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून में आंखों की सुरक्षा को लेकर थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।
बारिश का पानी नहीं, दूषित वातावरण बनता है संक्रमण की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश की बूंदें जब वातावरण में मौजूद प्रदूषण, वाहन के धुएं, धूल, गंदे पानी या संक्रमित सतहों के संपर्क में आती हैं, तो उनमें सूक्ष्मजीव शामिल हो सकते हैं। ऐसे में यदि यह पानी आंखों तक पहुंच जाए, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यह जोखिम उन लोगों में और अधिक होता है जो पहले से आंखों की एलर्जी, ड्राई आई, कॉर्निया से जुड़ी समस्या से पीड़ित हैं या नियमित रूप से कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं। यदि बारिश में भीगने के बाद आंखों में जलन, लालपन या लगातार पानी आने जैसी समस्या महसूस हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मानसून में कौन-कौन से आंखों के संक्रमण सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं?
- वायरल कंजंक्टिवाइटिस
मानसून में सबसे ज्यादा फैलने वाला संक्रमण वायरल कंजंक्टिवाइटिस माना जाता है। इसमें आंखें लाल हो जाती हैं, लगातार पानी आता है, जलन और खुजली होती है। यह संक्रमण बेहद संक्रामक होता है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है। - बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस
इस संक्रमण में आंखों से पीला या हरे रंग का चिपचिपा डिस्चार्ज निकल सकता है। कई बार सुबह उठने पर पलकों का चिपक जाना इसका प्रमुख संकेत होता है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। - स्टाई
बरसात के मौसम में पलकों की ऑयल ग्लैंड में बैक्टीरिया पहुंचने से दर्द वाली छोटी गांठ बन सकती है, जिसे सामान्य भाषा में गुहेरी कहा जाता है। - कॉर्नियल इंफेक्शन
यदि गंदा पानी आंख में चला जाए या कॉन्टैक्ट लेंस की सफाई ठीक से न की जाए, तो कॉर्निया में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर नजर पर भी असर डाल सकती है।
अगर बारिश का पानी आंखों में चला जाए तो क्या करें?
विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सही कदम तुरंत उठाना जरूरी है।
- आंखों को बिल्कुल भी न रगड़ें।
- साफ पानी या स्टेराइल सलाइन से आंखों को अच्छी तरह धो लें।
- यदि कॉन्टैक्ट लेंस पहने हैं तो उन्हें तुरंत निकाल दें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई आई ड्रॉप इस्तेमाल न करें।
- यदि 24 घंटे बाद भी लालपन, दर्द, धुंधला दिखना या पस आने जैसी समस्या बनी रहे, तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।
मानसून में आंखों को सुरक्षित रखने के आसान उपाय
बारिश के मौसम में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
- बारिश में भीगने के बाद चेहरा और आंखों को साफ पानी से धोएं।
- गंदे हाथों से आंखों को छूने से बचें।
- तौलिया, रूमाल और आई मेकअप किसी के साथ साझा न करें।
- कॉन्टैक्ट लेंस की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- आंखों में लगातार जलन या लालपन होने पर खुद से दवा न लें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें ताकि आंखों की नमी बनी रहे।
- जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय चश्मे का उपयोग करें।
नोट: यह जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी गई सलाह और उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है। किसी भी तरह की आंखों की समस्या होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
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