सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन पर तत्काल रोक से किया इनकार, कहा- विशेष हालात में पुलिस कर सकती है इस्तेमाल, केंद्र से मांगा जवाब

संसद मार्च में छात्रों पर पैलेट गन चलाने के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन केंद्र सरकार से गाइडलाइन और RAF के हथियारों के रिकॉर्ड पर जवाब मांगा है। आखिर कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा और भारत में पैलेट गन को लेकर क्या नियम हैं? 

Jul 30, 2026 - 11:42
 0
सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन पर तत्काल रोक से किया इनकार, कहा- विशेष हालात में पुलिस कर सकती है इस्तेमाल, केंद्र से मांगा जवाब

संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन चलाने के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने फिलहाल पैलेट गन के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि विशेष परिस्थितियों में पुलिस को ऐसे कम-घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार से पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी गाइडलाइन पर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों और इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

कोर्ट ने रोक लगाने से क्यों किया इनकार?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि जब तक पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले पुलिस नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को सीधे चुनौती नहीं दी जाती, तब तक केवल पैलेट गन पर रोक लगाने का आदेश देना उचित नहीं होगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में ऐसे साधनों की आवश्यकता पड़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि संसद मार्च के दौरान घायल हुए सभी लोगों को बेहतर और पूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने घायलों के इलाज को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

किसने दायर की थी याचिका?
पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद के साथ प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी (दोनों कथित पीड़ित) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया था।

भारत में पैलेट गन को लेकर क्या हैं नियम?
भारत में पैलेट गन पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने इसके इस्तेमाल के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर अपनाई है।

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार-

  • पैलेट गन को कम-घातक हथियार माना जाता है।
  • इसका इस्तेमाल हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
  • पुलिस पहले कम नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे उपाय अपनाती है।
  • जब अन्य सभी उपाय विफल हो जाएं, तभी आखिरी विकल्प के तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कार्रवाई के दौरान बल का प्रयोग केवल उतना ही होना चाहिए, जितना हालात नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हो।
  • हथियार का सुरक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए जवानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

कितनी खतरनाक होती है पैलेट गन?
हालांकि इसे कम-घातक हथियार माना जाता है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। एक पैलेट कारतूस से एक साथ करीब 400 से 500 छोटे छर्रे निकलते हैं। यदि इसे कम दूरी से चलाया जाए तो गंभीर चोट लग सकती है। विशेष रूप से आंख, चेहरा और गर्दन पर लगने वाले छर्रे स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

भारत में पहली बार कब हुआ इस्तेमाल?
भारत में पैलेट गन का इस्तेमाल पहली बार वर्ष 2010 में जम्मू-कश्मीर में भीड़ नियंत्रण के लिए किया गया था। इसके बाद 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद हुए व्यापक प्रदर्शनों के दौरान इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। उस समय 700 से अधिक लोगों की आंखों में गंभीर चोट लगने की घटनाएं सामने आई थीं।

विवाद की वजह क्या रही?
मानवाधिकार संगठनों ने पैलेट गन को ब्लाइंडिंग वेपन बताते हुए इसका लगातार विरोध किया। बढ़ते विवाद के बाद केंद्र सरकार ने विकल्प तलाशने के लिए एक समिति बनाई। समिति की सिफारिश पर बाद में PAVA शेल्स (मिर्च के तीखे अर्क वाले गोले) जैसे विकल्पों को भी मंजूरी दी गई। इसके बावजूद पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया और इसे आज भी अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की नीति लागू है।

संसद मार्च में क्या हुआ था?
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। सुबह से शाम तक कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने बैरिकेड पार करते हुए संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ और विजय चौक होते हुए वे संसद के करीब पहुंच गए। आरोप है कि कुछ लोगों ने संसद परिसर की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। देर शाम पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं। इस पूरे घटनाक्रम में 100 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने शाम तक जंतर-मंतर क्षेत्र खाली करा दिया था, लेकिन रात करीब 11 बजे प्रदर्शनकारी दोबारा वहां पहुंचे और फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया।

अब आगे क्या?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन मामले की सुनवाई जारी रहेगी। अदालत ने केंद्र सरकार से गाइडलाइन पर जवाब मांगा है और RAF द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों एवं गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। आने वाली सुनवाई में केंद्र के जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content