भदोही फिर से बना संत रविदास नगर, 29 साल में पांचवीं बार बदला नाम, क्या 2027 की सियासत को लेकर कल्याण सिंह के रास्ते पर चले सीएम योगी ?
भदोही का नाम एक बार फिर संत रविदास नगर कर दिया गया है। 29 साल में पांचवीं बार हुए इस बदलाव के पीछे सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि 2027 की सियासी रणनीति भी चर्चा में है। जानिए कैसे मायावती, कल्याण सिंह, अखिलेश यादव और अब योगी आदित्यनाथ के दौर में बदलता रहा जिले का नाम और क्या है इसके राजनीतिक मायने।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जिले और शहरों के नाम बदलने की चर्चा नई नहीं है, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ नाम की नहीं बल्कि उसके पीछे छिपे राजनीतिक संदेश की भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही जिले का नाम एक बार फिर 'संत रविदास नगर' करने की घोषणा की है। इसके साथ ही करीब 29 वर्षों में इस जिले का नाम पांचवीं बार बदला गया है। दिलचस्प बात यह है कि जिस फैसले की शुरुआत 1997 में हुई थी, उसी राजनीतिक रास्ते पर अब एक बार फिर बीजेपी आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। अगले वर्ष प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस फैसले को दलित समाज तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
कल्याण सिंह ने जारी किया था नोटिफिकेशन
भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर करने का निर्णय पहली बार वर्ष 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार के दौरान लिया गया था। हालांकि इस फैसले का औपचारिक सरकारी नोटिफिकेशन 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने जारी किया। उस समय प्रदेश की राजनीति भी बेहद दिलचस्प दौर से गुजर रही थी। बहुजन समाज पार्टी ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया था और आरोप लगाया था कि बीजेपी अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST) कानून के दुरुपयोग और दलित विरोधी रवैये के कारण भरोसे के लायक नहीं रही। ऐसे माहौल में संत रविदास के नाम पर जिले का नामकरण राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना गया।
अखिलेश सरकार ने फिर से किया था भदोही नाम
समय बदला तो सरकार भी बदली। वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 6 दिसंबर को जिले का नाम फिर से भदोही कर दिया। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला समाजवादी पार्टी के लिए अपेक्षित लाभ नहीं ला सका। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जिले की तीनों विधानसभा सीटों भदोही, ज्ञानपुर और औराई में हार का सामना करना पड़ा। बाद में 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भदोही विधानसभा सीट पर वापसी जरूर की। पार्टी के उम्मीदवार जाहिद बेग ने बीजेपी के रवींद्रनाथ त्रिपाठी को लगभग पांच हजार वोटों के अंतर से हराया।
लोकसभा चुनाव में बदली तस्वीर
विधानसभा चुनाव में मिली आंशिक सफलता के बावजूद लोकसभा चुनाव ने जिले की राजनीतिक तस्वीर बदल दी। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. विनोद बिंद ने भदोही सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ललितेशपति त्रिपाठी को 44 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया। ललितेशपति त्रिपाठी पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे स्वर्गीय कमलापति त्रिपाठी के पोते हैं। इस जीत ने यह संकेत दिया कि जिले में बीजेपी का संगठनात्मक आधार पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है।
स्थानीय नाराजगी भी रही, इसलिए दोनों नाम साथ लिखे गए
जब पहली बार जिले का नाम संत रविदास नगर रखा गया था, तब स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया था। इसकी सबसे बड़ी वजह भदोही की अपनी ऐतिहासिक पहचान थी। देश और दुनिया में कालीन उद्योग के लिए मशहूर भदोही की पहचान लंबे समय से इसी नाम से रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने पुराने नाम को बनाए रखने की मांग उठाई। इसी पृष्ठभूमि में जब 1999 में राम प्रकाश गुप्ता मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने एक संतुलित रास्ता अपनाते हुए सरकारी रिकॉर्ड में संत रविदास नगर, भदोही दोनों नामों का इस्तेमाल शुरू कराया।
अब फिर से भदोही बना संत रविदास नगर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर करने की घोषणा की है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि दलित समाज, विशेषकर संत रविदास के अनुयायियों तक सीधा संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी के भदोही जिला अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने कहा कि पार्टी जिले में दलित समाज के बीच व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी। इसकी शुरुआत गुरुवार को पार्टी कार्यालय से संत रविदास की शोभायात्रा निकालकर की गई।
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