CIA एजेंट बनकर राष्ट्रपति से 425 करोड़ ठगे, भारतवंशी बिजनेसमैन ने जीता इंडोनेशियाई प्रेसीडेंट का भरोसा, 36 फाइटर प्लेन, मिलिट्री सिस्टम दिलाने का किया था वादा
खुद को CIA का सीक्रेट एजेंट बताने वाला भारतवंशी कारोबारी आखिर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का भरोसा कैसे जीत गया? 36 फाइटर जेट, ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और 425 करोड़ के कथित रक्षा सौदों के पीछे छिपी पूरी कहानी पढ़िए, जिसने कई देशों की एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
अगर कोई शख्स खुद को CIA का सीक्रेट एजेंट बताए, दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं के साथ तस्वीरें दिखाए, अरबों रुपये के रक्षा सौदों का भरोसा दिलाए और फिर एक देश के राष्ट्रपति का इतना करीबी बन जाए कि वे उसे मिस्टर G कहकर बुलाने लगें, तो यह किसी हॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगेगी। लेकिन यही कहानी अब भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव को लेकर अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है। अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़ा आरोप लगा है। OCCRP और इंडोनेशियाई मैगजीन Tempo की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का नॉन-ऑफिशियल कवर (NOC) एजेंट बताकर उस समय के इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री और वर्तमान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का विश्वास जीत लिया। आरोप है कि इसी भरोसे के दम पर उसने करीब 425 करोड़ रुपए के कथित फर्जी कर्ज को मंजूरी दिलवा दी।
36 फाइटर जेट से लेकर ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर तक, किए बड़े-बड़े दावे
रिपोर्ट के मुताबिक गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया को अत्याधुनिक रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने का दावा किया था। इनमें 36 F-15 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और आधुनिक मिलिट्री कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम शामिल थे। जांच में सामने आया कि इन रक्षा सौदों के लिए जिन चार कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, वे कथित तौर पर शेल कंपनियां थीं। बाद में टैक्स संबंधी अनियमितताओं के चलते इन कंपनियों को बंद कर दिया गया। बताया गया कि केवल 36 F-15 लड़ाकू विमानों की संभावित डील का मूल्य करीब 1.32 लाख करोड़ रुपए था। हालांकि इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये सौदे अंतिम समझौते तक कभी नहीं पहुंचे।
मिस्टर G कहकर बुलाते थे राष्ट्रपति
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने सिर्फ रक्षा सौदों का वादा नहीं किया, बल्कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निजी जीवन से जुड़ी ऐसी जानकारियां भी साझा कीं, जो केवल बेहद करीबी लोगों को ही पता थीं। बताया गया कि प्रबोवो अपने घर में मकड़ी के जालों को प्रकृति का हिस्सा मानते हैं और उन्हें साफ नहीं करवाते। गौरव ने ऐसी निजी जानकारियों का इस्तेमाल कर अपना विश्वास और मजबूत किया। यही वजह थी कि प्रबोवो उन्हें मिस्टर G कहकर संबोधित करते थे। गौरव ने यह दावा भी किया कि उसने 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़वाने में मदद की थी और प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में भी उसकी भूमिका रही। हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।
अमेरिका के सबसे ताकतवर नेताओं से करीबी होने का दावा
अमेरिकी अदालत में दायर मुकदमों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव खुद को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन, सीनेटर चक शूमर और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का करीबी बताया करता था। वह इन नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें दिखाकर लोगों को यह विश्वास दिलाता था कि उसकी सीधी पहुंच अमेरिकी सत्ता और सुरक्षा तंत्र तक है। हालांकि बाद में सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया कि इन नेताओं के साथ उसकी मौजूदगी किसी आधिकारिक भूमिका की वजह से नहीं, बल्कि राजनीतिक चंदे, सार्वजनिक आयोजनों और कार्यक्रमों के दौरान हुई थी।
CIA एजेंट या सिर्फ एक कहानी?
अमेरिका में दायर मुकदमे में दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव खुद को CIA का NOC (Non-Official Cover) एजेंट बताता था। वह लोगों को बताता था कि उसने CIA के मशहूर ट्रेनिंग सेंटर 'द फार्म' में विशेष प्रशिक्षण लिया है। अपने शरीर पर मौजूद निशानों को वह गुप्त अभियानों में लगी चोट बताता था। इतना ही नहीं, वह यह कहानी भी सुनाता था कि वर्ष 2008 में कांगो में एक मिशन के दौरान ISIS ने उसे बंधक बना लिया था और वह किसी तरह वहां से बच निकला। लेकिन अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, जांच में यह दावा भी झूठा निकला। रिपोर्ट के अनुसार उसके शरीर पर मौजूद निशान किसी गुप्त ऑपरेशन के नहीं, बल्कि बचपन में हुई किडनी सर्जरी के थे।
425 करोड़ की रकम कहां गई?
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुए इस कथित फर्जीवाड़े से मिली रकम का इस्तेमाल गौरव श्रीवास्तव ने अमेरिका के लॉस एंजिलिस में लगभग 208 करोड़ रुपए का एक आलीशान बंगला खरीदने में किया। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं और अंतिम कानूनी निष्कर्ष आना बाकी है।
इंडोनेशिया सरकार ने क्या कहा?
इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत ने कहा कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे कभी अंतिम अनुबंध तक नहीं पहुंचे। इसलिए सरकार को किसी प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
