अमरनाथ गुफा से गायब हुई 90 फीसदी शिवलिंग, 7 फीट से एक फीट हुआ बाबा बर्फानी का आकार, 3 दिन में 56 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी का शिवलिंग आखिर कुछ ही दिनों में 7 फीट से घटकर सिर्फ एक फीट कैसे रह गया? क्या इसका असर यात्रा पर पड़ेगा या दर्शन पहले की तरह जारी रहेंगे? जानिए इस बदलाव की पूरी वजह...
अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले पवित्र हिम शिवलिंग, जिसे श्रद्धालु 'बाबा बर्फानी' के नाम से जानते हैं, उसका आकार अब घटकर करीब एक फीट रह गया है। यात्रा शुरू होने के महज तीन दिन के भीतर सामने आई तस्वीरों ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा है। हालांकि, शिवलिंग के तेजी से पिघलने के बावजूद आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही। पहले तीन दिनों में 56 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 18.6 प्रतिशत अधिक है। यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से हुई थी और यह 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। इस बार करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए पहले ही पंजीकरण कराया है।
डेढ़ महीने में इतना बदला बाबा बर्फानी
इस साल 23 मई को सामने आई तस्वीरों में प्राकृतिक हिम शिवलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी। इसके बाद 29 जून को पहली पूजा के समय भी इसका आकार 5 फीट से अधिक था। लेकिन अब, यात्रा शुरू होने के तीन दिन बाद सामने आई नई तस्वीरों में हिम शिवलिंग लगभग 90 प्रतिशत तक पिघल चुका दिखाई दे रहा है और इसकी ऊंचाई करीब एक फीट रह गई है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक हिम शिवलिंग का आकार हर वर्ष मौसम, तापमान और गुफा के भीतर पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। इसलिए इसका छोटा या बड़ा होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया मानी जाती है।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु
दिलचस्प बात यह है कि हिम शिवलिंग का आकार घटने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। यात्रा के पहले तीन दिनों में 56 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 47,972 थी। यानी इस बार शुरुआती तीन दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या में लगभग 18.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। श्रद्धालु लगातार दोनों मार्गों 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम मार्ग और 14 किलोमीटर के छोटे लेकिन कठिन बालटाल मार्ग से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
9 जुलाई तक सभी स्लॉट फुल
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नई एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन के मुताबिक 9 जुलाई तक यात्रा के सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो श्रद्धालु बिना रजिस्ट्रेशन के बालटाल या पहलगाम पहुंच रहे हैं, उन्हें फिलहाल आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे यात्रियों को 9 जुलाई के बाद उपलब्ध स्लॉट के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाएगा। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए केवल पंजीकृत यात्रियों को ही कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जा रही है।
आखिर प्राकृतिक शिवलिंग बनता कैसे है?
अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी इंसान द्वारा तराशा नहीं जाता। यह पूरी तरह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। सर्दियों और वसंत के मौसम में गुफा की छत से लगातार टपकने वाली पानी की बूंदें अत्यधिक ठंड में जमती जाती हैं और धीरे-धीरे बर्फ का शिवलिंग बनता है। मौसम में बदलाव, तापमान बढ़ने और पानी की उपलब्धता कम होने पर इसका आकार स्वाभाविक रूप से घटने लगता है। इसी कारण हर वर्ष बाबा बर्फानी की ऊंचाई अलग-अलग देखने को मिलती है।
क्या शिवलिंग दोबारा बड़ा हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी संभावना बेहद कम मानी जाती है। यदि आने वाले दिनों में भारी बर्फबारी हो या तापमान लंबे समय तक शून्य से नीचे चला जाए, तभी हिम शिवलिंग के आकार में कुछ बढ़ोतरी संभव है। फिलहाल मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए इसकी संभावना कम बताई जा रही है।
क्या यात्रा पर पड़ेगा कोई असर?
अब तक प्रशासन की ओर से यात्रा रोकने या उसमें किसी तरह का बदलाव करने की कोई घोषणा नहीं की गई है। यात्रा पहले की तरह जारी है और सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह सक्रिय है। यात्रा मार्ग पर सेना, अर्धसैनिक बल, जम्मू-कश्मीर पुलिस और माउंटेन रेस्क्यू टीमें लगातार तैनात हैं। जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन, चिकित्सा सहायता और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
आस्था का केंद्र हिम शिवलिंग नहीं, विश्वास है
बाबा बर्फानी का आकार छोटा होना श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक विषय जरूर है, लेकिन अमरनाथ यात्रा केवल हिम शिवलिंग के आकार तक सीमित नहीं है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद इस यात्रा में शामिल होते हैं। इस बार भी वही तस्वीर देखने को मिल रही है—प्राकृतिक बदलाव अपनी जगह हैं, लेकिन आस्था का प्रवाह पहले की तरह लगातार जारी है।
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