चलते ई-रिक्शा को एक क्लिक में रोक रहे थे चाइनीज ऐप! सरकार के एक्शन के बाद सामने आई पूरी साजिश, जानिए आपकी बैटरी भी है रिस्क में या नहीं

क्या आपका ई-रिक्शा भी चलते-चलते अचानक बंद हो सकता है? सरकार ने ऐसे तीन चाइनीज ऐप्स पर कार्रवाई की है, जिनके जरिए ब्लूटूथ से ई-रिक्शा की बैटरी बंद की जा रही थी। आखिर यह तकनीक कैसे काम करती है, किसे सबसे ज्यादा खतरा है और इससे बचने का तरीका क्या है?

Jul 3, 2026 - 13:54
Jul 3, 2026 - 13:56
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चलते ई-रिक्शा को एक क्लिक में रोक रहे थे चाइनीज ऐप! सरकार के एक्शन के बाद सामने आई पूरी साजिश, जानिए आपकी बैटरी भी है रिस्क में या नहीं

दिल्ली समेत देश के कई शहरों में पिछले कुछ समय से ई-रिक्शा चालकों के सामने एक ऐसी समस्या आ रही थी, जिसने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कई ई-रिक्शा बिना किसी तकनीकी खराबी के चलते-चलते अचानक बंद हो जा रहे थे। शुरुआत में इसे बैटरी या मोटर की खराबी माना गया, लेकिन जब इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो मामला पूरी तरह बदल गया। जांच में सामने आया कि कुछ लोग मोबाइल ऐप के जरिए ब्लूटूथ से ई-रिक्शा की बैटरी को रिमोटली डिसेबल कर रहे थे। अब इस मामले में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए ऐसे तीन चाइनीज ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इन ऐप्स का इस्तेमाल बैटरी की निगरानी के लिए बनाया गया था, लेकिन भारत में इन्हें ई-रिक्शा रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।

तीनों ऐप्स पर सरकार ने लगाया बैन 
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने BAT-BMS, लॉसिजी और इपोच ली-आयन जैसे ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इनमें से कुछ ऐप्स गूगल प्ले स्टोर पर अब भी दिखाई दे रहे हैं। सरकार की कार्रवाई का कारण सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खतरा है। चलते वाहन को अचानक रोक देना किसी भी समय सड़क दुर्घटना की वजह बन सकता है।

आखिर कैसे रुक रहा था चलता हुआ ई-रिक्शा?
इस पूरी घटना की जड़ ब्लूटूथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में है। दरअसल आजकल कई लीथियम-आयन बैटरियों में एक स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाता है, जो बैटरी का तापमान, चार्जिंग, वोल्टेज और हेल्थ जैसी जानकारियों की निगरानी करता है। इसी सिस्टम से मोबाइल ऐप ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट होकर बैटरी की स्थिति दिखाता है। समस्या तब पैदा हुई जब कई सस्ती लीथियम बैटरियों में यह ब्लूटूथ सिस्टम बिना पासवर्ड या बेहद कमजोर सुरक्षा के साथ छोड़ दिया गया। ऐसे में कोई भी व्यक्ति करीब 10 से 15 मीटर की दूरी से ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर डिस्चार्ज कमांड भेज सकता था। इसके बाद बैटरी की सप्लाई बंद हो जाती थी और ई-रिक्शा बीच सड़क पर रुक जाता था।

क्या देश के सभी इलेक्ट्रिक वाहन खतरे में हैं?
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाने लगा कि अब कोई भी इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर या बाइक मोबाइल से बंद की जा सकती है। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। यह खतरा केवल उन्हीं वाहनों तक सीमित है जिनमें ऐसी लीथियम बैटरियां लगी हैं जिनका ब्लूटूथ मैनेजमेंट सिस्टम बिना पासवर्ड के खुला छोड़ा गया है। बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों की इलेक्ट्रिक कारों और स्कूटरों में मल्टी-लेयर सिक्योरिटी, एन्क्रिप्शन और ऑथेंटिकेशन सिस्टम होता है। इसलिए सामान्य मोबाइल ऐप उनसे कनेक्ट नहीं हो सकते।

किन ई-रिक्शा चालकों को चिंता करने की जरूरत नहीं?
देश में अभी भी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पारंपरिक लेड-एसिड बैटरियों पर चलते हैं। इन बैटरियों में ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होता, इसलिए उन पर ऐसे ऐप्स का कोई असर नहीं पड़ता। इसी तरह जिन लीथियम बैटरियों में पहले से मजबूत पासवर्ड सेट है, वे भी इस खतरे से काफी हद तक सुरक्षित हैं।

दूसरे काम के लिए बनाया गया था ऐप 
दिलचस्प बात यह है कि BAT-BMS जैसे ऐप्स को मूल रूप से ई-रिक्शा रोकने के लिए विकसित नहीं किया गया था। इनका इस्तेमाल सोलर एनर्जी सिस्टम, नावों, जहाजों और अन्य औद्योगिक उपकरणों में लगी लीथियम बैटरियों की निगरानी और मेंटेनेंस के लिए किया जाता था। इनमें बैटरी को ऑन-ऑफ करने का फीचर इसलिए दिया गया था ताकि बैटरी का मालिक जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से बिजली की सप्लाई नियंत्रित कर सके। लेकिन भारत में कमजोर सुरक्षा वाली बैटरियों के कारण यही फीचर शरारती तत्वों के हाथ में एक हथियार बन गया।

असली जिम्मेदार कौन?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह ऐप नहीं, बल्कि कमजोर सुरक्षा मानकों वाली बैटरियां हैं। बाजार में बिक रही कई लो-कॉस्ट लीथियम बैटरियों के ब्लूटूथ BMS में न तो यूनिक पासवर्ड सेट किया गया और न ही किसी तरह की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया। इसका फायदा उठाकर कोई भी व्यक्ति आसानी से बैटरी तक पहुंच बना सकता था। तकनीकी जानकार इसे उसी तरह की लापरवाही मानते हैं जैसे कोई अपने घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दे और फिर चोरी होने पर सिर्फ चोर को जिम्मेदार ठहराए।

सड़क सुरक्षा के लिए क्यों बड़ा खतरा बन गया यह मामला?
ई-रिक्शा पहले से ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में बड़ी संख्या में चलते हैं। यदि कोई वाहन अचानक बीच सड़क पर बंद हो जाए तो पीछे आ रहे वाहन टकरा सकते हैं या ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। कुछ मामलों में लोगों ने केवल मजाक या सोशल मीडिया वीडियो बनाने के लिए भी ई-रिक्शा रोकने की कोशिश की। यही वजह है कि यह तकनीकी खामी अब सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा बन गई है।

ई-रिक्शा चालकों के लिए क्या है सबसे जरूरी सलाह?
यदि आपके ई-रिक्शा में लीथियम बैटरी लगी है तो सबसे पहले अपने डीलर या अधिकृत मैकेनिक से यह जांच कराएं कि बैटरी का ब्लूटूथ सिस्टम पासवर्ड से सुरक्षित है या नहीं। यदि डिफॉल्ट पासवर्ड 1234, 0000 या कोई आसान संयोजन है तो उसे तुरंत बदल दें। मजबूत और यूनिक पासवर्ड इस खतरे को काफी हद तक खत्म कर सकता है। अगर कभी चलते समय ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाए तो घबराने की बजाय वाहन को सुरक्षित स्थान पर लगाएं। इसके बाद बैटरी का मुख्य स्विच (MCB) ऑफ करके दोबारा ऑन करें। यदि समस्या बनी रहे तो बैटरी सिस्टम की जांच कराएं।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content