एक गाना जिसे सुनकर सैकड़ों लोगों ने किया सुसाइड! 63 साल तक रहा बैन, जिसके लिए लिखा उसने भी की आत्महत्या, आज भी दुनिया इसे कहती है सबसे मनहूस गाना

क्या कोई गाना किसी इंसान की जिंदगी बदल सकता है... या उसकी जान लेने की वजह भी बन सकता है? 1933 में हंगरी में लिखा गया 'ग्लूमी संडे' दुनिया का सबसे विवादित और रहस्यमयी गाना माना जाता है। दावा किया जाता है कि इसे सुनने के बाद 200 से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या कर ली। कई सुसाइड नोट्स में इसकी लाइनें मिलीं, BBC ने इसे 63 साल तक बैन रखा और खुद इसके संगीतकार की भी दर्दनाक मौत हुई। आखिर इस गाने की सच्चाई क्या है?

Jun 28, 2026 - 13:05
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एक गाना जिसे सुनकर सैकड़ों लोगों ने किया सुसाइड! 63 साल तक रहा बैन, जिसके लिए लिखा उसने भी की आत्महत्या, आज भी दुनिया इसे कहती है सबसे मनहूस गाना

दुनिया में ऐसे हजारों गाने बने हैं जिन्होंने लोगों को हंसाया, रुलाया, प्यार करना सिखाया और मुश्किल वक्त में उम्मीद दी। लेकिन संगीत के इतिहास में एक ऐसा गाना भी दर्ज है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने लोगों को जीने की नहीं, मरने की प्रेरणा दी। दावा किया गया कि इस गाने को सुनने के बाद दुनिया भर में 200 से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या कर ली। कई लोगों के शवों के पास इसकी रिकॉर्डिंग मिली, तो कई सुसाइड नोट्स में इसी गाने की पंक्तियां लिखी थीं। मामला इतना बढ़ गया कि ब्रिटेन के BBC ने भी इस गाने के प्रसारण पर 63 वर्षों तक रोक लगा दी। 

ग्लूमी संडे जिसे नाम दिया गया हंगेरियन सुसाइड सॉन्ग
इस गाने का नाम था ग्लूमी संडे। इसे दुनिया के कई देशों में हंगेरियन सुसाइड सॉन्ग और दुनिया का सबसे मनहूस गाना कहा गया। हालांकि इतिहासकारों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस गाने और आत्महत्याओं के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध कभी साबित नहीं हुआ। फिर भी इसकी कहानी आज भी रहस्य, विवाद और दर्द का ऐसा मिश्रण है, जो हर किसी को हैरान कर देता है।

दिल टूटने पर लिखा था गाना 
साल था 1933। पूरी दुनिया आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और युद्ध के खतरे से जूझ रही थी। यूरोप का छोटा-सा देश हंगरी भी इस संकट से अछूता नहीं था। इसी दौरान बुडापेस्ट में रहने वाले संघर्षरत पियानोवादक और संगीतकार रेज्सो सेरेस अपनी निजी जिंदगी में भी टूट चुके थे। वे एक रेस्टोरेंट में पियानो बजाकर अपना गुजारा करते थे। वहीं उनकी मुलाकात एक युवती से हुई, जिससे उन्हें प्यार हो गया। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे, लेकिन युवती चाहती थी कि रेज्सो संगीत छोड़कर कोई स्थायी नौकरी कर लें। रेज्सो के लिए संगीत सिर्फ पेशा नहीं, उनकी पहचान था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लगातार विवाद होने लगे और आखिरकार रिश्ता टूट गया। कहा जाता है कि एक बरसाती रविवार को रेज्सो अपने छोटे से कमरे में अकेले बैठे थे। बाहर मौसम उदास था और भीतर उनका मन। उसी दिन उन्होंने महज 30 मिनट में अपने जीवन का सबसे दर्दनाक गीत लिख दिया। गीत में प्रेमिका की मौत, बिछड़ने का दर्द और मृत्यु के बाद दूसरी दुनिया में उससे मिलने की कल्पना थी। यही गीत आगे चलकर ग्लूमी संडे के नाम से मशहूर हुआ।

जब पब्लिशर ने गाना रिलीज करने से किया मना
रेज्सो ने गीत अपने मित्र और गीतकार लास्लो जेवोर को सुनाया। संयोग से लास्लो भी हाल ही में अपनी मंगेतर से अलग हुए थे। उन्होंने गीत में और भी गहराई और दर्द जोड़ दिया। दोनों इस गीत को लेकर प्रकाशकों के पास पहुंचे, लेकिन ज्यादातर ने इसे छापने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह गीत इतना उदास और निराशाजनक है कि कोई भी इसे सुनना नहीं चाहेगा। लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार यह गीत प्रकाशित हुआ और धीरे-धीरे हंगरी के बाहर भी लोकप्रिय होने लगा।

ग्लूमी संडे जब बना सुसाइड की वजह 
1936 के बाद यूरोप और अमेरिका के अखबारों में लगातार ऐसी घटनाएं छपने लगीं, जिनमें दावा किया गया कि आत्महत्या करने वाले लोगों का आखिरी संबंध ग्लूमी संडे से था। किसी के कमरे में इस गाने की रिकॉर्डिंग मिली, तो किसी के सुसाइड नोट में इसकी पंक्तियां लिखी हुई थीं। इन्हीं घटनाओं के बाद यह गाना दुनिया भर में हंगेरियन सुसाइड सॉन्ग के नाम से मशहूर हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हंगरी के बुडापेस्ट में एक दुकानदार जोसेफ केलर ने कथित तौर पर आत्महत्या करने से पहले अपने सुसाइड नोट में इसी गाने की लाइनें लिखीं। विएना की एक युवती के बारे में दावा किया गया कि उसने यह गाना सुनने के बाद नदी में कूदकर जान दे दी। लंदन की एक महिला ने कई बार यह गीत सुनने के बाद नींद की गोलियों की ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली। वहीं अमेरिका में 13 साल के एक किशोर के कमरे से ग्लूमी संडे की रिकॉर्डिंग मिलने का दावा किया गया। एक 80 वर्षीय बुजुर्ग ने सातवीं मंजिल से छलांग लगाई और जांच में बताया गया कि उनके ग्रामोफोन पर यही गीत चल रहा था। इतना ही नहीं, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि जर्मनी में लोगों के एक समूह ने डान्यूब नदी में कूदकर जान दे दी थी और उनके पास भी इस गीत की रिकॉर्डिंग मिली थी। वहीं इटली के एक युवक के बारे में कहा गया कि सड़क पर यह गाना सुनने के बाद उसने अपना सारा सामान एक भिखारी को दे दिया और फिर पानी में कूदकर आत्महत्या कर ली।

इन घटनाओं ने इस गाने को लेकर ऐसा डर पैदा किया कि दुनिया भर के अखबारों ने इसे दुनिया का सबसे मनहूस गाना कहना शुरू कर दिया। हालांकि, आज के इतिहासकार और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि इन मामलों और इस गाने के बीच प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध कभी वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो सका। उनका कहना है कि उस दौर में दुनिया आर्थिक मंदी, युद्ध और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही थी, जो इन घटनाओं की बड़ी वजह हो सकती है।

जिस लड़की के लिए लिखा गया उसने भी की सुसाइड
इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा वह दावा है, जिसके मुताबिक जिस प्रेमिका के लिए रेज्सो ने यह गीत लिखा था, उसने भी बाद में आत्महत्या कर ली। बताया जाता है कि उसके पास इस गीत की रिकॉर्डिंग और एक नोट मिला था। हालांकि इतिहासकार मानते हैं कि इस घटना के कई संस्करण मौजूद हैं और सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

BBC ने क्यों लगाया 63 साल का प्रतिबंध?
1941 में मशहूर अमेरिकी गायिका बिली हॉलिडे ने इस गीत का अंग्रेजी संस्करण रिकॉर्ड किया। इसके बाद इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई। लेकिन लगातार बढ़ते विवादों और युद्धकालीन परिस्थितियों को देखते हुए BBC ने इस गीत के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया। यह प्रतिबंध कई दशकों तक जारी रहा। वर्ष 2002 में इसे हटाया गया, लेकिन तब तक यह गीत दुनिया के सबसे विवादित संगीत का हिस्सा बन चुका था।

35 साल बाद संगीतकार ने भी कर ली आत्महत्या
11 जनवरी 1968 को रेज्सो सेरेस ने आत्महत्या कर ली। पहले उन्होंने अपने अपार्टमेंट से कूदने की कोशिश की। बच जाने के बाद अस्पताल में उन्होंने अपनी जान दे दी। उनकी मौत के बाद यह रहस्य और गहरा गया। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि जिस गीत ने दूसरों की जिंदगी छीन ली, उसने आखिरकार अपने रचयिता को भी नहीं छोड़ा। 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ ?
 मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी गीत अकेले किसी व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। आत्महत्या के पीछे मानसिक बीमारी, अवसाद, सामाजिक परिस्थितियां, आर्थिक संकट और व्यक्तिगत संघर्ष जैसे कई कारण होते हैं। 1930 का दशक विश्व इतिहास का सबसे कठिन दौर था। ग्रेट डिप्रेशन, बेरोजगारी, भूख, राजनीतिक अस्थिरता और दूसरे विश्व युद्ध की आशंका ने करोड़ों लोगों को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। ऐसे माहौल में ग्लूमी संडे जैसे गहरे उदास गीत ने लोगों की भावनाओं को आवाज दी। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गीत कारण नहीं, बल्कि उस दौर के सामूहिक अवसाद का प्रतीक बन गया।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content