संत रविदास नगर के बाद अब कांशीराम नगर बनाने की मांग, मायावती ने योगी सरकार से कहा- 9 अक्टूबर से पहले बहाल हों महापुरुषों के नाम वाले जिले
संत रविदास नगर का नाम बहाल होने के बाद मायावती ने योगी सरकार से कांशीराम नगर समेत महापुरुषों के नाम वाले सभी जिलों को 9 अक्टूबर से पहले बहाल करने की मांग की है। जानिए इस मांग के पीछे की पूरी राजनीति, बसपा का बयान और 2027 चुनाव से जुड़ा बड़ा संदेश।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जिलों के नाम चर्चा के केंद्र में हैं। संत रविदास नगर का नाम बहाल होने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने योगी सरकार के सामने नई मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि बसपा शासनकाल में महापुरुषों के नाम पर बनाए गए जिन जिलों के नाम बाद में बदल दिए गए थे, उन्हें भी उनके मूल नामों के साथ बहाल किया जाए। मायावती ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि यह फैसला बसपा संस्थापक कांशीराम के 9 अक्टूबर को होने वाले परिनिर्वाण दिवस से पहले या उसी दिन लिया जाता है, तो उनकी पार्टी इसके लिए सरकार की आभारी रहेगी।
संत रविदास नगर पर जताया आभार, अब आगे की मांग
शुक्रवार को जारी अपने बयान में मायावती ने संत रविदास नगर का नाम बहाल किए जाने पर उत्तर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बसपा सरकार के दौरान महापुरुषों के नाम पर बनाए गए अन्य जिलों के नाम भी बहाल किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि उन महापुरुषों के सम्मान और सामाजिक न्याय की भावना से जुड़ा विषय है।
प्रशासनिक मजबूती के लिए बनाए गए थे नए जिले
मायावती ने अपने बयान में कहा कि बसपा सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और आम जनता तक सरकारी सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई नए जिले, तहसील, विकास खंड, पुलिस जोन और पुलिस रेंज बनाए थे। इसी दौरान कई जिलों का नाम दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के संतों, गुरुओं और महापुरुषों के नाम पर रखा गया था। इनमें संत रविदास नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीम नगर जैसे जिले शामिल थे।
सपा पर लगाया नाम बदलने का आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार ने संकीर्ण जातिवादी मानसिकता और राजनीतिक द्वेष के चलते इन जिलों के नाम बदल दिए। उन्होंने कहा कि जनता समाजवादी पार्टी के इस फैसले को कभी नहीं भूलेगी और यह फैसला सामाजिक सम्मान की भावना के खिलाफ था। बसपा प्रमुख ने अपने बयान में विशेष रूप से कासगंज जिले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ब्रज क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए बसपा सरकार ने कासगंज को जिला बनाकर उसका नाम कांशीराम नगर रखा था, लेकिन बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार ने उसका नाम बदल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक विरोधी सोच का परिचायक था।
9 अक्टूबर की समयसीमा क्यों अहम?
मायावती ने योगी सरकार से अपील की कि संत रविदास नगर की तरह कांशीराम नगर सहित अन्य महापुरुषों के नाम पर बनाए गए जिलों के मूल नाम भी बहाल किए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि यह निर्णय 9 अक्टूबर, यानी बसपा संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस से पहले या उसी दिन लिया जाता है, तो बसपा इस कदम का स्वागत करेगी और सरकार की आभारी रहेगी।
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