बाराबंकी में नकली चायपत्ती फैक्ट्री का भंडाफोड़, इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को रंगकर ब्रांडेड पैक में बेच रहे थे, STF-FSDA की कार्रवाई में 800 किलो माल जब्त
बाराबंकी में STF और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त कार्रवाई में नकली चायपत्ती बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी गई। इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को कृत्रिम रंग से तैयार कर ब्रांडेड पैकेट में बेचा जा रहा था। छापेमारी में 800 किलो चायपत्ती, कृत्रिम रंग और पैकिंग मशीनें बरामद हुईं।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में उत्तर प्रदेश एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की संयुक्त टीम ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली चायपत्ती बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। आरोप है कि होटलों और ढाबों से इकट्ठा की गई इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को कृत्रिम रंग से दोबारा तैयार कर ब्रांडेड पैकेट में भरकर बाजार में बेचा जा रहा था। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।
दो साल से संचालित हो रही थी अवैध फैक्ट्री
एसटीएफ और एफएसडीए की टीम ने शनिवार शाम करीब 4:30 बजे बड्डूपुर थाना क्षेत्र में स्थित एक दो मंजिला मकान पर छापेमारी की। करीब तीन घंटे तक चली कार्रवाई में टीम ने 800 किलोग्राम रंगी हुई चायपत्ती, पांच किलोग्राम कृत्रिम रंग, बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री तथा इलेक्ट्रॉनिक पैकिंग और सीलिंग मशीनें बरामद कीं। जब्त चायपत्ती की अनुमानित कीमत करीब 1.60 लाख रुपये बताई गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से अपने मकान में अवैध रूप से नकली चायपत्ती तैयार कर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक इस फैक्ट्री की शिकायत करीब डेढ़ वर्ष पहले मिली थी, लेकिन सटीक लोकेशन नहीं मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी थी। खुफिया सूचना के आधार पर शनिवार को संयुक्त टीम ने छापा मारकर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को किया जाता था दोबारा तैयार
जांच में पता चला कि होटलों और ढाबों से इस्तेमाल के बाद फेंकी गई चायपत्ती को इकट्ठा किया जाता था। इसके बाद उसे साफ कर कृत्रिम रंग मिलाकर दोबारा नई जैसी शक्ल दी जाती थी। तैयार चायपत्ती को पैक कर बाजार में सप्लाई किया जाता था। अधिकारियों ने चायपत्ती और उसमें इस्तेमाल किए गए कृत्रिम रंग के नमूने जांच के लिए सुरक्षित कर लिए हैं। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी शकील ने स्वीकार किया कि तैयार की गई चायपत्ती को 'फास्ट टी' और 'गार्डेन फ्रेश' नाम से पैक कर बाजार में बेचा जा रहा था। एफएसडीए की शिकायत पर बड्डूपुर थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
फूड इंस्पेक्टर डॉ. अंकित यादव ने बताया कि चायपत्ती में मिलाया जा रहा कृत्रिम रंग स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे रसायनों का लंबे समय तक सेवन करने से गंभीर बीमारियों के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। विभाग ने लोगों से केवल विश्वसनीय ब्रांड और अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदने की अपील की है।
रेस्टोरेंट से भी लिया गया मसाले का नमूना
इसी अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी पल्लवी तिवारी और अर्शी फारूकी ने अयोध्या-लखनऊ रोड स्थित एक रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पिसी लाल मिर्च का नमूना जांच के लिए लिया गया। साथ ही रेस्टोरेंट में मिली कमियों को लेकर संचालक को नोटिस जारी किया गया। विभाग ने निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं करने पर लाइसेंस निरस्त करने और प्रतिष्ठान को बंद कराने की चेतावनी दी है। अधिकारियों के अनुसार अब यह पता लगाया जा रहा है कि नकली चायपत्ती किन-किन जिलों और बाजारों में सप्लाई की जा रही थी। जांच एजेंसियां इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। एफएसडीए का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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