प्रदेश बजट में लखीमपुर खीरी की अनदेखी, छोटी काशी गोला और दुधवा को नहीं मिला विशेष प्रावधान
राज्य के बजट में छोटी काशी गोला और दुधवा टाइगर रिजर्व पर्यटन विकास के लिए विशेष प्रावधानों को छोड़ दिए जाने से लखीमपुर खीरी में निराशा है।
प्रदेश सरकार के हालिया बजट को लेकर लखीमपुर खीरी जिले में निराशा का माहौल है। जहां काशी, मथुरा, अयोध्या और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, वहीं लखीमपुर खीरी के महत्वपूर्ण स्थलों को बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं मिली। जिले की पहचान माने जाने वाले छोटी काशी गोला और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए किसी विशेष पैकेज या विकास योजना का जिक्र न होने से पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
छोटी काशी और दुधवा से जुड़ी उम्मीदें टूटीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी काशी गोला वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं दुधवा टाइगर रिजर्व देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने वाला महत्वपूर्ण वन्यजीव पर्यटन स्थल है। इसके बावजूद बजट में इन स्थानों के लिए आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन विकास या रोजगार सृजन को लेकर कोई प्रत्यक्ष प्रावधान नहीं किया गया। लोगों का मानना है कि यह जिले के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है।
पर्यटन कारोबारियों में निराशा
होटल संचालकों, टूर गाइडों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने अपनी निराशा जाहिर की है। उनका कहना है कि यदि दुधवा और छोटी काशी को विशेष पैकेज मिलता, तो जिले में नए रोजगार के अवसर पैदा होते। इससे स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलता और सैकड़ों परिवारों को सीधा लाभ होता। कारोबारियों का मानना है कि पर्यटन विकास से जिले की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती थी।
राजनीतिक बयानबाजी और स्थानीय मांगें
बजट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। सत्तापक्ष ने इसे संतुलित और विकासोन्मुख बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे निराशाजनक कहा है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामपाल यादव ने आरोप लगाया कि बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं और किसानों के हितों की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि हर साल बजट का आकार बढ़ता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाएं नहीं बढ़तीं। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि लखीमपुर खीरी प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध जिला है। दुधवा टाइगर रिजर्व, छोटी काशी गोला और आसपास के ऐतिहासिक स्थल प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर बड़ी पहचान बना सकते हैं, यदि सरकार योजनाबद्ध निवेश और बुनियादी ढांचे पर ध्यान दे। फिलहाल प्रत्यक्ष घोषणा न होने से जिले में मायूसी है और लोग भविष्य में विशेष योजना की उम्मीद लगाए हुए हैं।
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