भारत के ऊपर से अचानक गायब हुए मानसूनी बादल, सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा, 4 जून से 15 जून तक 64 फीसदी कम हुई बरसात
भारत के ऊपर से मानसूनी बादल मानो अचानक गायब हो गए हैं। 15 जून की सैटेलाइट तस्वीरों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य से 64% कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में लोग अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
जून का महीना आधा गुजर चुका है, लेकिन भारत के करोड़ों लोगों की नजरें अब भी आसमान पर टिकी हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआती रफ्तार ने जहां अच्छी बारिश की उम्मीद जगाई थी, वहीं अब उसकी चाल अचानक थम सी गई है। 15 जून को सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने मौसम वैज्ञानिकों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से से मानसूनी बादल लगभग गायब दिखाई दे रहे हैं और कई राज्यों में बारिश का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य तौर पर 53.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 19.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। यानी देश इस समय 64 प्रतिशत बारिश की कमी का सामना कर रहा है। यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब खरीफ फसलों की बुआई का मौसम शुरू हो चुका है और किसान अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
16 राज्यों में थम गई मानसून की रफ्तार
मौसम विभाग के अनुसार मानसून दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास धीमा पड़ गया है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद यह बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर भी लगभग ठहर गया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत करीब 16 राज्यों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
आखिर अचानक क्यों कमजोर पड़ गया मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार समस्या समुद्र में नमी की कमी नहीं है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों में पर्याप्त नमी मौजूद है, लेकिन ऊपरी वायुमंडल में हवाओं का असामान्य पैटर्न मानसून की राह में रुकावट बन गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी जेट स्ट्रीम सामान्य स्थिति से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है। इसकी वजह से मानसून को आगे बढ़ाने वाली पूर्वी हवाओं की ताकत कमजोर पड़ गई है। नतीजतन बादल बनने और आगे बढ़ने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि समुद्र में पर्याप्त नमी होने के बावजूद देश के बड़े हिस्से में बादल सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं।
खेतों से लेकर शहरों तक बढ़ी बेचैनी
मानसून की यह सुस्ती केवल मौसम का मामला नहीं है। इसका सीधा असर खेती, जलाशयों और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में लोग भीषण गर्मी और उमस से परेशान हैं। दूसरी ओर किसान बुआई की तैयारी के बावजूद बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यदि यह स्थिति ज्यादा दिनों तक बनी रहती है तो कृषि क्षेत्र पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
अगले दो दिन इन राज्यों में बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग ने 16 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना जताई है। बिहार के कुछ इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। जबकि 17 जून को सिक्किम, उत्तर बंगाल, असम और मेघालय में भारी बारिश हो सकती है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं और बारिश का अनुमान है। वहीं झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है।
क्या जल्द लौटेगा मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति स्थायी नहीं है। इसे मानसून के खत्म होने के बजाय एक अस्थायी ठहराव माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि सप्ताह के आखिर तक ऊपरी वायुमंडल में हवाओं का मौजूदा पैटर्न कमजोर पड़ेगा और मानसून एक बार फिर सक्रिय हो जाएगा। यदि ऐसा होता है तो जून के अंतिम सप्ताह में मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में व्यापक बारिश देखने को मिल सकती है।
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