'कांग्रेस रच रही थी हिन्दू आतंकवाद की नैरेटिव' कसाब के जिंदा पकड़े जाने पर फेल हुआ प्लान, गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी ने किया दावा, बीजेपी ने कांग्रेस से मांगा जवाब 

क्या 26/11 हमले को हिंदू आतंकवाद से जोड़ने की तैयारी थी? पूर्व गृह मंत्रालय अधिकारी आरवीएस मणि के इस दावे के बाद सियासत गरमा गई है। मणि ने दावा किया कि अगर आतंकी अजमल कसाब जिंदा नहीं पकड़ा जाता तो हमले को हिंदू आतंकवाद के नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश हो सकती थी। उन्होंने कांग्रेस और यूपीए सरकार के दौर की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी ने उनके बयान को आधार बनाकर कांग्रेस से जवाब मांगा है।

Jul 14, 2026 - 12:33
Jul 14, 2026 - 16:39
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'कांग्रेस रच रही थी हिन्दू आतंकवाद की नैरेटिव' कसाब के जिंदा पकड़े जाने पर फेल हुआ प्लान, गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी ने किया दावा, बीजेपी ने कांग्रेस से मांगा जवाब 

मुंबई हमले की 16 साल पुरानी घटना एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि के एक इंटरव्यू के बाद 26/11 हमले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मणि ने दावा किया है कि अगर मुंबई पुलिस के जांबाज अधिकारी तुकाराम ओंबले ने आतंकी अजमल कसाब को जिंदा नहीं पकड़ा होता, तो 26/11 हमले की पूरी कहानी अलग दिशा में जा सकती थी। उनके इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है और तत्कालीन यूपीए सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर जवाब का इंतजार है।

"कसाब जिंदा नहीं पकड़ा जाता तो हिंदू संगठनों पर मढ़ा जाता हमला"
आरवीएस मणि ने न्यूज एजेंसी ANI के पॉडकास्ट में दावा किया कि 26/11 मुंबई हमले के दौरान एक ऐसा नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की जा रही थी, जिसमें इस हमले को हिंदू आतंकवाद से जोड़कर पेश किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि आतंकी अजमल कसाब के पास कलावा बंधा हुआ था। ऐसे में अगर उसे जिंदा नहीं पकड़ा जाता और उसकी पहचान सामने नहीं आती तो हमले की जिम्मेदारी गलत तरीके से हिंदू संगठनों पर डालने की कोशिश हो सकती थी। मणि ने दावा किया कि मुंबई पुलिस अधिकारी तुकाराम ओंबले की बहादुरी ने इस पूरी कहानी को बदल दिया। ओंबले ने अपनी जान देकर कसाब को जिंदा पकड़ा था, जिससे दुनिया के सामने यह साफ हो गया कि मुंबई हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने अंजाम दिया था।

बीजेपी ने कहा- "ये आरोप नहीं, ठोस सबूत हैं"
आरवीएस मणि के बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा है। बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह सिर्फ आरोप नहीं बल्कि एक पूर्व गृह मंत्रालय अधिकारी का बयान है, जो उस समय सरकार के अंदर काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 26/11 हमले के आतंकियों के पास नकली पहचान पत्र होने की बात सामने आई थी। अगर कसाब जिंदा नहीं पकड़ा जाता तो उन पहचान पत्रों के आधार पर पूरी घटना की तस्वीर अलग बनाई जा सकती थी। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आरवीएस मणि ने दावा किया है कि 26/11 को लेकर कांग्रेस और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के बीच फिक्स्ड मैच जैसा था। अब कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।

आतंकियों की नाव पहले दिखी थी, फिर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
आरवीएस मणि ने अपने इंटरव्यू में मुंबई हमले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आतंकियों की नाव को कोस्ट गार्ड ने पहले ही देख लिया था, लेकिन उसके बाद निगरानी रोक दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की तैनाती में देरी हुई, जिसके कारण ताज होटल में कमांडो पहुंचने में समय लगा। 26 नवंबर 2008 को हुए इस हमले में आतंकियों ने मुंबई के कई प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया था, जिसमें ताज होटल, ओबेरॉय होटल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस शामिल थे।

हिंदू आतंकवाद शब्द को लेकर भी उठाए सवाल
आरवीएस मणि ने दावा किया कि यूपीए सरकार के दौरान हिंदू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया गया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय की फाइलों में साल 2010 तक हिंदू आतंकवाद नाम का कोई आधिकारिक शब्द मौजूद नहीं था। मणि के मुताबिक, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उनसे हिंदू आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करने को कहा था, लेकिन उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों का कोई आधार नहीं था। आरवीएस मणि ने इस विषय पर किताब द मिथ ऑफ हिंदू टेरर: इनसाइडर अकाउंट ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स (2006-2010) भी लिखी है।

राहुल गांधी के बयान का भी किया जिक्र
आरवीएस मणि ने अपने इंटरव्यू में विकिलीक्स के एक केबल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2010 में सामने आए एक अमेरिकी राजनयिक केबल में राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत से बातचीत का उल्लेख था, जिसमें हिंदू चरमपंथ को लेकर चर्चा की गई थी। हालांकि इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले भी कई बार आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

क्या है 26/11 हमला, जिसमें 166 लोगों की हुई थी मौत
26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने मुंबई में हमला किया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी। हमले के बाद जांच में सामने आया कि इसके पीछे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी का हाथ था। हमले में शामिल आतंकी अजमल कसाब को मुंबई पुलिस ने जिंदा पकड़ा था। उसे साल 2012 में पुणे की यरवडा जेल में फांसी दी गई।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content