यूपी के 28 जिले सूखे की चपेट में, आधा मानसून बीता फिर भी 27% कम बारिश, अब अगस्त-सितंबर तय करेंगे राहत मिलेगी या बढ़ेगा संकट

मानसून का आधा सीजन बीत चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश के 28 जिले अब भी सूखे की मार झेल रहे हैं। जुलाई ने थोड़ी राहत जरूर दी, मगर क्या अगस्त-सितंबर बारिश की कमी पूरी कर पाएंगे या किसानों की चिंता और बढ़ेगी? जानिए IMD के ताजा अनुमान, पूर्वी-पश्चिमी यूपी का पूरा विश्लेषण और आगे क्या हो सकते हैं हालात।

Aug 1, 2026 - 11:32
Aug 1, 2026 - 11:32
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यूपी के 28 जिले सूखे की चपेट में, आधा मानसून बीता फिर भी 27% कम बारिश, अब अगस्त-सितंबर तय करेंगे राहत मिलेगी या बढ़ेगा संकट

उत्तर प्रदेश में मानसून अपने आधे सफर तक पहुंच चुका है, लेकिन बारिश का हिसाब अब भी चिंता बढ़ाने वाला है। प्रदेश के 28 जिलों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। इनमें 13 जिले गंभीर सूखे की श्रेणी में हैं। सबसे ज्यादा असर पूर्वांचल पर पड़ा है, जहां अकेले 19 जिले बारिश की भारी कमी झेल रहे हैं। जुलाई में बारिश ने कुछ राहत जरूर दी, लेकिन जून की भारी कमी पूरी नहीं हो सकी। अब पूरे प्रदेश की नजर अगस्त और सितंबर पर टिकी है। सवाल यही है कि क्या अगले दो महीने बारिश के घाटे की भरपाई कर पाएंगे या फिर खरीफ फसलों और किसानों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी?

आधा मानसून बीता, लेकिन बारिश अब भी सामान्य से काफी कम
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 31 जुलाई के बीच उत्तर प्रदेश में सामान्य से 27 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सामान्य परिस्थितियों में 31 जुलाई तक प्रदेश में 357.6 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल 261.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अप्रैल में पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य से 8 से 10 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान जताया था, लेकिन शुरुआती दो महीनों में ही कमी इससे कहीं अधिक पहुंच गई।

पूर्वी यूपी की हालत ज्यादा खराब
बारिश के आंकड़े बताते हैं कि पूरे प्रदेश में सबसे अधिक संकट पूर्वी उत्तर प्रदेश में है। पूर्वी यूपी में 31 जुलाई तक सामान्य रूप से 385.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि इस बार सिर्फ 254.2 मिमी वर्षा हुई। यानी यहां बारिश में 34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके मुकाबले पश्चिमी यूपी में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। यहां सामान्य 318.9 मिमी के मुकाबले 271.7 मिमी बारिश हुई, जो लगभग 15 प्रतिशत कम है।

28 जिले सूखे की चपेट में, 13 जिलों में गंभीर स्थिति
मौसम विभाग के मानकों के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में सामान्य से 25 से 50 प्रतिशत कम बारिश होती है तो उसे सूखे की स्थिति माना जाता है। वहीं 51 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी होने पर उसे गंभीर सूखे की श्रेणी में रखा जाता है। इसी आधार पर प्रदेश के 28 जिलों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, जबकि 13 जिले गंभीर सूखे की स्थिति में पहुंच चुके हैं। जून के अंत तक स्थिति कहीं अधिक चिंताजनक थी। उस समय प्रदेश में लगभग 60 प्रतिशत कम बारिश हुई थी और 34 जिले गंभीर सूखे की चपेट में थे। हालांकि जुलाई के दौरान अच्छी बारिश हुई, जिससे गंभीर सूखे वाले जिलों की संख्या घटकर 13 रह गई और कुल बारिश का घाटा भी 60 प्रतिशत से घटकर 27 प्रतिशत पर आ गया।

अलनीनो के बावजूद जुलाई में अच्छी बारिश क्यों हुई?
मौसम विभाग के अनुसार इसके पीछे दो प्रमुख मौसमीय कारण रहे। पहला कारण फिलीपींस के पास प्रशांत महासागर का असामान्य रूप से गर्म होना रहा। इससे बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने म्यांमार होते हुए बंगाल की खाड़ी में लगातार मजबूत लो प्रेशर एरिया बनाए, जिससे मानसून को मजबूती मिली। दूसरा कारण सामान्य से अधिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ रहा। इसके कारण अरब सागर से बड़ी मात्रा में नमी उत्तर भारत तक पहुंची, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई।

पश्चिमी यूपी को मिला ज्यादा फायदा
सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सबसे ज्यादा लाभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिला। अरब सागर से आई नमी गुजरात और राजस्थान होते हुए सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ सहित पश्चिमी जिलों तक पहुंची। इसी वजह से यहां हाल के दिनों में लगातार अच्छी बारिश दर्ज की गई। इसके विपरीत बंगाल की खाड़ी में बनने वाले अधिकांश लो प्रेशर सिस्टम ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम की ओर अधिक सक्रिय रहे। पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंचते-पहुंचते इनका प्रभाव कमजोर पड़ गया, जिससे पूर्वांचल में बारिश का घाटा बढ़ता गया।

अगस्त-सितंबर में क्या कहते हैं मौसम विभाग के अनुमान?
31 जुलाई को जारी भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 2 से 4 अगस्त के बीच उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना है। शुरुआत में पूर्वी यूपी में बारिश अपेक्षाकृत कम रह सकती है, लेकिन बाद में मानसून कुछ सक्रिय होने के संकेत हैं। वहीं पश्चिमी यूपी के उत्तराखंड से सटे जिलों जैसे सहारनपुर और बिजनौर में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ सहित प्रदेश के अधिकांश मैदानी हिस्सों में पूरे शेष मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश का अनुमान है।

सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश और ज्यादा गर्मी का अनुमान
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार अगस्त और सितंबर के दौरान उत्तर प्रदेश में सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम बारिश होने की आशंका है। साथ ही अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि बारिश की कमी के साथ उमस और गर्मी भी बनी रह सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। नेपाल सीमा से सटे कुछ जिलों को छोड़ दें तो गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आजमगढ़ सहित बड़े हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है।

क्या अगले दो महीने बारिश की कमी पूरी कर पाएंगे?
मौजूदा मौसमीय संकेतों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी भरपाई की संभावना कम दिखाई देती है। अगस्त की शुरुआत में सक्रिय होने वाला मानसून कुछ राहत जरूर दे सकता है, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश का घाटा और कम हो सकता है। लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद 34 प्रतिशत बारिश की कमी इतनी अधिक है कि मौजूदा परिस्थितियों में उसकी पूरी भरपाई आसान नहीं दिख रही। यही वजह है कि खरीफ की फसलों, विशेषकर धान की खेती को लेकर किसानों की चिंता अभी भी बनी हुई है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content