दिल्ली में पीले गमछे ने दिखाई अपनी ताकत, मंच से मंत्री ओपी राजभर ने भरी हुंकार, यूपी की सियासत में मचा बवाल
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ओम प्रकाश राजभर की सामाजिक समरसता महारैली सिर्फ एक राजनीतिक सभा नहीं थी। पीले गमछों की भीड़, भाजपा नेतृत्व को दिया गया संदेश, 2027 के सीट बंटवारे की चर्चा, पश्चिमी यूपी में विस्तार की रणनीति और सपा पर लगातार हमले... आखिर इस रैली के पीछे असली राजनीतिक मकसद क्या है?
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में सीटों की जंग ने दस्तक दे दी है। इसकी सबसे ताजा तस्वीर शुक्रवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में देखने को मिली, जहां सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सामाजिक समरसता महारैली में हजारों कार्यकर्ता पीले गमछे और पीली टोपी पहनकर पहुंचे। रैली खत्म होते-होते एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में था-क्या ओम प्रकाश राजभर भाजपा नेतृत्व को अपनी ताकत दिखा रहे थे, या समाजवादी पार्टी के खिलाफ नया राजनीतिक मैदान तैयार कर रहे थे? दिल्ली में हुए इस शक्ति प्रदर्शन की गूंज अब लखनऊ के सत्ता गलियारों तक पहुंच चुकी है।
रैली में सिर्फ भीड़ नहीं, भाजपा के लिए भी एक संदेश था
सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने भी इस चर्चा को और हवा दे दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रैली करने का मकसद भाजपा नेतृत्व को पार्टी की ताकत दिखाना था। उन्होंने कहा कि सुभासपा अब सिर्फ पूर्वांचल तक सीमित नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी संगठन तेजी से फैल रहा है और पार्टी 2027 का चुनाव 'छड़ी' चुनाव चिह्न के साथ पूरी ताकत से लड़ने की तैयारी कर चुकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भाजपा के सहयोगी दल चाहते हैं कि सीटों का फॉर्मूला जल्द तय हो, ताकि वे अपनी तैयारियां शुरू कर सकें।
सपा-कांग्रेस पर सबसे बड़ा हमला
अपने भाषण में ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि आजादी के समय सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 38 प्रतिशत थी, जो अब एक प्रतिशत से भी कम रह गई है। इसके लिए उन्होंने सपा और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। राजभर ने कहा कि कुछ दल समाज में नफरत की राजनीति करते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में मुस्लिम समाज भी शिक्षा की ओर बढ़ा है। उन्होंने यूपीएससी में 53 मुस्लिम अभ्यर्थियों के चयन का उदाहरण भी दिया।
पिछड़ों के मुद्दे पर भी चला बड़ा दांव
रैली में राजभर ने बंजारा, सपेरा, प्रजापति, लोहार, नाई समेत कई पिछड़ी जातियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। पार्टी कार्यकर्ताओं से उन्होंने अपील की कि सरकार की योजनाओं को ऐसे समाज तक पहुंचाया जाए, जो अब भी मुख्यधारा से दूर हैं। यह संदेश साफ था कि सुभासपा 2027 में गैर-यादव पिछड़े वोट बैंक को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
अखिलेश यादव पर भी राजभर ने साधा निशाना
दिल्ली की रैली में भी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर हमले जारी रहे। राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने कहा कि यह आयोजन सपा के दंभ को तोड़ने के लिए किया गया है। इससे पहले धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर भी ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि धर्मेंद्र प्रधान कुर्मी थे, इसलिए इस्तीफा मांग लिया गया। अगर यादव होते तो इस्तीफा नहीं मांगा जाता। इसके जरिए उन्होंने समाजवादी पार्टी पर जातीय राजनीति करने का आरोप लगाया था। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं था। गाजीपुर, सुल्तानपुर, आजमगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों में ओम प्रकाश राजभर लगातार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर हमलावर रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग मंचों से कानून-व्यवस्था, जातीय राजनीति और मुजफ्फरनगर दंगों जैसे मुद्दों पर सपा नेतृत्व को घेरा है।
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