कानपुर कार्डियोलॉजी पर गंभीर आरोप, एक्सपायरी दवाओं से इलाज के बाद मरीज की मौत, कोर्ट ने जांच के दिए आदेश
एक महिला ने कानपुर हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों पर अपने पति का इलाज 156 एक्सपायर्ड दवाओं से करने का आरोप लगाया है, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई। कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित हृदय रोग संस्थान, जिसे कार्डियोलॉजी के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर विवादों में आ गया है। संस्थान के डायरेक्टर और डॉक्टरों पर एक मरीज को एक्सपायरी डेट की दवाइयां देने का गंभीर आरोप लगा है। महिला का दावा है कि इलाज के दौरान उसके पति को 156 एक्सपायर्ड दवाइयां दी गईं, जिससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई और अंत में उनकी मौत हो गई। पीड़िता ने कई स्तरों पर शिकायत की, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर अब जांच के आदेश दिए गए हैं।
सीने में दर्द के बाद कार्डियोलॉजी में भर्ती
कानपुर के गुमटी क्षेत्र की रहने वाली अंजू शुक्ला ने सीएमएम कोर्ट में दी गई अर्जी में बताया कि 13 अगस्त 2025 को उनके पति राजेंद्र कुमार शुक्ला को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। हालत गंभीर होने पर उन्हें कानपुर के हृदय रोग संस्थान में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने कई तरह की जांच की और इसके बाद बायपास सर्जरी कराने की सलाह दी।
ऑपरेशन के दौरान 156 एक्सपायरी दवाइयों का आरोप
अंजू शुक्ला का आरोप है कि संस्थान के डायरेक्टर और डॉक्टरों ने उनके पति का ऑपरेशन किया और इलाज के दौरान उन्हें कुल 156 ऐसी दवाइयां दी गईं, जिनकी एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी थी। महिला का कहना है कि यह लापरवाही जानलेवा साबित हुई और इसी कारण उनके पति को ब्रेन स्ट्रोक हो गया।
डिस्चार्ज के बाद बिगड़ी हालत और मौत
पीड़िता का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक के बावजूद कार्डियोलॉजी प्रशासन ने उनके पति को डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद वह उन्हें पहले शर्मा नर्सिंग होम लेकर गईं, लेकिन वहां डॉक्टरों ने इलाज से इनकार कर दिया। मजबूरी में वह अपने पति को रीजेंसी अस्पताल लेकर पहुंचीं, जहां 12 सितंबर 2025 को इलाज के दौरान राजेंद्र कुमार शुक्ला की मौत हो गई।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अंजू शुक्ला ने बताया कि पति की मौत के बाद उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद डीएम और मंडलायुक्त स्तर पर जांच बैठाई गई, लेकिन आज तक उसकी रिपोर्ट सामने नहीं आई। पुलिस आयुक्त को प्रार्थनापत्र देने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
कोर्ट ने जांच के दिए आदेश
अंत में पीड़िता ने कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर राकेश कुमार वर्मा, डॉक्टर संदीप गौतम, डॉक्टर श्रीराज, डॉक्टर आशीष मनोहर, नर्स मुस्कान और डायरेक्टर के पीए अरविंद के खिलाफ सीजीएम सूरज मिश्रा की कोर्ट में अर्जी दाखिल की। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानपुर मंडल की निगरानी में जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही डॉक्टरों का पैनल गठित कर 7 मार्च 2025 तक जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0