झांसी में सांप बना बच्चों के लिए काल, डसने से बेटे की मौत, बेटी को लेकर भी परिजनों ने छोड़ दी थी उम्मीदें, जानिए क्या है पूरा मामला

झांसी के बड़ागांव में सांप के डसने से 6 साल के मयंक की मौत हो गई, जबकि 4 साल की प्रगति को परिवार ने मरा मानकर दफनाने के लिए कब्र तक खोद दी थी। तीन दिन बाद बच्ची ने हाथ हिलाया और फिर आंखें खोलीं। 12 दिन इलाज के बाद वह घर लौटी।

Aug 16, 2026 - 12:57
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झांसी में सांप बना बच्चों के लिए काल, डसने से बेटे की मौत, बेटी को लेकर भी परिजनों ने छोड़ दी थी उम्मीदें, जानिए क्या है पूरा मामला

झांसी। घर में सांप के डसने से एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों की जिंदगी पलभर में बदल गई। 2 अगस्त की रात 6 साल के मयंक और उसकी 4 साल की बहन प्रगति को सांप ने डस लिया। हालत बिगड़ने पर दोनों को अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान मयंक की मौत हो गई, जबकि प्रगति की हालत इतनी गंभीर थी कि परिवार ने उसके बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। परिवार ने दोनों बच्चों के शव दफनाने के लिए दो कब्रें तक खोद दी थीं। लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि प्रगति की सांस अभी चल रही है। इसके बाद भी बच्ची कई घंटे तक बेहोश रही। तीन दिन बाद उसने अचानक हाथ हिलाया और फिर आंखें खोलीं। परिवार में दोबारा उम्मीद जगी। करीब 12 दिन अस्पताल में इलाज के बाद 14 अगस्त को प्रगति घर लौटी तो मां नेहा कुशवाहा ने उसे सीने से लगा लिया। मां ने कहा कि उसने अपना इकलौता बेटा खो दिया, लेकिन बेटी को दूसरा जीवन मिल गया। घटना झांसी शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर बड़ागांव कस्बे के हरदौलपुरा मोहल्ले की है।

अप्रैल में जाना शुरू किया था स्कूल 
हरदौलपुरा मोहल्ले में बलराम कुशवाहा अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके दो बेटे मुकेश और प्रदीप हैं। दोनों की शादी हो चुकी है और परिवार में पोते-पोतियां भी हैं। बलराम और उनके बड़े बेटे खेती-किसानी करते हैं, जबकि छोटा बेटा प्रदीप एपेक्स फैक्ट्री में नौकरी करता है। प्रदीप अपनी पत्नी नेहा और दोनों बच्चों मयंक और प्रगति के साथ घर के आगे वाले हिस्से में रहते थे। नेहा के मुताबिक, अप्रैल में ही मयंक का LKG में एडमिशन कराया गया था। प्रगति भी कभी-कभी उसके साथ स्कूल चली जाती थी। दोनों बच्चों को लेकर पूरा परिवार बेहद खुश था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही महीनों बाद घर में ऐसा हादसा होगा, जो पूरे परिवार की जिंदगी बदल देगा।

पिता ड्यूटी पर गए, मां बच्चों के साथ सोई थी
2 अगस्त की तड़के करीब 3 बजे प्रदीप काम पर चले गए। इसके बाद नेहा दोनों बच्चों के साथ कमरे में बेड पर सो गईं। इसी दौरान पता नहीं कब एक सांप बिस्तर पर पहुंच गया। सबसे पहले सांप ने 4 साल की प्रगति को डसा। बच्ची जोर-जोर से रोने लगी। मां को लगा कि उसने नींद में खुद अपने अंगूठे में काट लिया है, क्योंकि पहले भी वह सोते समय ऐसा कर चुकी थी। प्रगति अपनी दादी के पास जाने की जिद करने लगी। नेहा उसे उठाकर दादी के पास छोड़ आईं। इसके बाद वह वापस कमरे में पहुंचीं और मयंक के साथ लेट गईं। कुछ ही देर बाद सांप ने मयंक को भी डस लिया। बच्चे के शरीर पर तीन जगह काटने के निशान थे। परिवार आनन-फानन में दोनों बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचा। मयंक की हालत शुरुआत में ऐसी थी कि परिवार को उसके बचने की उम्मीद थी। वह मेडिकल कॉलेज तक बोलते हुए गया और अपना वजन करने के लिए खड़ा भी हुआ। लेकिन इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

एक बच्चा चला गया, दूसरे के लिए भी परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी 
मयंक की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दूसरी तरफ प्रगति भी बेहोश थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था और शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। परिवार को लग रहा था कि शायद दोनों बच्चों को खो दिया है। दादी लाड़कुंवर के मुताबिक, प्रगति को मंदिर ले जाने के बाद उसने आंखें बंद कर ली थीं और मुंह से झाग निकलने लगा था। परिवार ने शव दफनाने के लिए दो कब्रें तक खोद दी थीं। लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि प्रगति की सांस अभी चल रही है। वेंटीलेटर हटाकर भी उसकी सांस को जांचा गया। परिवार ने इसी उम्मीद के साथ इलाज जारी रखा। 2 अगस्त की शाम मयंक को दफना दिया गया। प्रगति अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही।

तीन दिन बाद हिली बच्ची की उंगली, फिर खुलीं आंखें
परिवार के लिए वह पल जिंदगी भर याद रहने वाला था। हादसे के तीन दिन बाद प्रगति ने अचानक हाथ हिलाया। इसके बाद उसने धीरे-धीरे आंखें खोलीं। जिस बच्ची को परिवार लगभग खो चुका था, उसके शरीर में हरकत देखकर घरवालों की उम्मीद लौट आई। इसके बाद डॉक्टरों ने उसका इलाज जारी रखा। प्रगति करीब 12 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही। 14 अगस्त को जब वह अस्पताल से घर पहुंची तो मां नेहा ने उसे सीने से लगा लिया। बच्ची अब बोल रही है और खाना-पीना भी शुरू कर चुकी है।

विधायक की मदद से निजी अस्पताल में कराया गया इलाज
परिवार के ताऊ हरदयाल कुशवाहा के मुताबिक, जब प्रगति की हालत गंभीर थी और उसे मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर ले जाने की तैयारी हो रही थी, तब विधायक राजीव पारीछा से परिवार की बात हुई। परिवार का कहना है कि विधायक ने बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कराने में मदद की और डॉक्टर से भी बात की। इलाज के दौरान लगातार बच्ची की स्थिति की जानकारी लेते रहे। परिवार के मुताबिक, विधायक ने इलाज का पूरा खर्च उठाया। वह घर भी पहुंचे और बाद में अस्पताल जाकर डॉक्टरों से बच्ची के बारे में जानकारी ली। परिवार का मानना है कि समय पर बेहतर इलाज मिलने से बच्ची की जान बच सकी।

सांप दोबारा दिखा तो सपेरे को बुलाया
हादसे के बाद परिवार को एक और डर सताने लगा था। दोनों बच्चों को डसने के बाद सांप कमरे से निकलकर नाले के पास एक बिल में छिप गया था। परिवार ने बिल और उसके आसपास सीमेंट कर दिया था। कुछ दिन बाद वही सांप दोबारा दिखाई दिया। इसके बाद परिवार ने औपारा गांव से सपेरे को बुलाया। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद सांप को पकड़ लिया गया। सपेरे ने इसे करैत सांप बताया। परिवार के मुताबिक, इसके बाद घरवालों ने राहत की सांस ली।

डॉक्टर बोले- सांप का बदला लेना सिर्फ भ्रम, इलाज में देरी न करें
प्रगति का इलाज करने वाले डॉ. मनदीप ने बताया कि सांप के काटने के बाद जहर बच्ची के पूरे शरीर में फैल चुका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सांप को मारने के बाद दूसरा सांप बदला लेने के लिए आता है, ऐसी धारणा सही नहीं है। संभव है कि घर में पहले से दो सांप मौजूद रहे हों और परिवार की नजर उनमें से केवल एक पर पड़ी हो। डॉक्टर ने बताया कि करीब 70 प्रतिशत सांप जहरीले नहीं होते, जबकि करीब 30 प्रतिशत सांप जहरीले होते हैं। हालांकि सांप के काटने की स्थिति में यह तय करने में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है कि सांप जहरीला था या नहीं।

झाड़-फूंक में समय गंवाना पड़ सकता है भारी
डॉ. मनदीप ने लोगों से अपील की कि सांप के काटने पर मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल ले जाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम यानी ASV उपलब्ध हो। उनके मुताबिक जहरीले सांप के काटने का प्रभावी इलाज एंटी स्नेक वेनम है। उन्होंने झाड़-फूंक और तांत्रिकों के चक्कर में पड़ने से बचने की सलाह दी। इलाज में हुई देरी कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है। मयंक अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन प्रगति का अस्पताल से लौटकर घर आना परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं। जिस घर में एक साथ दो कब्रें खोदी गई थीं, वहीं अब एक मासूम की आवाज फिर सुनाई दे रही है। मां ने अपने बेटे को खोने का दर्द झेला है, लेकिन बेटी के वापस लौटने की खुशी भी उसी घर में है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content