छोटी सी दिक्कत होने पर बड़ी बीमारी का रहता है डर, डॉक्टर की बात पर भी नहीं होता भरोसा, कहीं यह इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर तो नहीं, जानिए क्या कहती है मेडिकल साइंस

क्या मेडिकल टेस्ट बार-बार नॉर्मल आने के बाद भी आपको लगता है कि शरीर में कोई गंभीर बीमारी छिपी है? क्या सीने में हल्की चुभन, सिरदर्द, गैस या सामान्य खांसी भी आपको बड़ी बीमारी का संकेत लगती है? अगर ऐसा बार-बार होता है, तो यह सिर्फ चिंता नहीं बल्कि इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। आखिर यह बीमारी क्या है, किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है, इसके शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें और इससे बाहर निकलने के लिए विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं। 

Aug 6, 2026 - 14:06
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छोटी सी दिक्कत होने पर बड़ी बीमारी का रहता है डर, डॉक्टर की बात पर भी नहीं होता भरोसा, कहीं यह इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर तो नहीं, जानिए क्या कहती है मेडिकल साइंस

कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि मेडिकल टेस्ट पूरी तरह सामान्य आते हैं, डॉक्टर भी किसी गंभीर बीमारी से इनकार कर देते हैं, लेकिन फिर भी मन में यह डर बना रहता है कि शरीर में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। सीने में हल्की चुभन हो तो हार्ट अटैक का डर, सिरदर्द हो तो ब्रेन ट्यूमर या माइग्रेन की चिंता, मामूली गैस या खांसी को भी गंभीर बीमारी समझ लेना। अगर यह डर बार-बार सताता है, तो यह सामान्य चिंता नहीं बल्कि इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकता है। पहले इसे मेडिकल भाषा में हाइपोकॉन्ड्रिया कहा जाता था। यह एक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को बिना किसी गंभीर बीमारी के भी लगातार बीमार होने का डर बना रहता है।

क्या है इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर?
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति सामान्य शारीरिक लक्षणों को भी गंभीर बीमारी का संकेत मान लेता है। कई बार मेडिकल जांच और रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद उसका डर खत्म नहीं होता। इसका असर धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच, व्यवहार, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगता है।

हेल्थ एंग्जायटी से जुड़े फैक्ट और मिथ

  • मिथ: हाइपोकॉन्ड्रिया कोई बीमारी नहीं है
    फैक्ट: यह पूरी तरह गलत धारणा है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार क्रोनिक हाइपोकॉन्ड्रिया को इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर माना जाता है। यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है, जिसका समय पर इलाज जरूरी है।
  • मिथ: लोग ध्यान आकर्षित करने के लिए बीमारी का बहाना बनाते हैं
    फैक्ट: हेल्थ एंग्जायटी से पीड़ित व्यक्ति जानबूझकर ऐसा नहीं करता। उसे वास्तव में लगता है कि वह किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। इसलिए इसे नाटक या बहाना समझना सही नहीं है।
  • मिथ: यह समस्या किसी को भी बिना वजह हो सकती है
    फैक्ट: इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बचपन के बुरे अनुभव, गंभीर बीमारी का डर, इंटरनेट पर बार-बार बीमारी के लक्षण पढ़ना या हर छोटी परेशानी को ऑनलाइन सर्च करना इस समस्या का कारण बन सकता है।

किन लक्षणों से पहचानें हेल्थ एंग्जायटी
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रमुख लक्षण हैं-

  • हर समय किसी गंभीर बीमारी का डर बना रहना।
  • छोटी-सी शारीरिक परेशानी को बड़ी बीमारी समझ लेना।
  • बार-बार ब्लड प्रेशर, पल्स या बॉडी टेम्परेचर चेक करना।
  • इंटरनेट पर लगातार बीमारियों के बारे में पढ़ते रहना।
  • डॉक्टर की सलाह और सामान्य रिपोर्ट के बाद भी संतुष्ट न होना।
  • परिवार और दोस्तों से बार-बार अपनी सेहत के बारे में पूछना।
  • दिल की धड़कन, गैस, पसीना या सामान्य दर्द को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहना।
  • बीमारी के डर से लोगों से मिलने-जुलने या बाहर जाने से बचना।

क्यों होती है यह समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

  • बचपन में बार-बार गंभीर रूप से बीमार होना।
  • परिवार में किसी गंभीर बीमारी का अनुभव।
  • अत्यधिक तनाव या चिंता।
  • परिवार में एंग्जायटी डिसऑर्डर का इतिहास।
  • डिप्रेशन या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं।
  • बचपन में उपेक्षा, शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना का अनुभव।

क्या इंटरनेट भी बढ़ा सकता है बीमारी का डर?
आज के समय में हल्का सिरदर्द या पेट दर्द होते ही कई लोग इंटरनेट पर उसके लक्षण सर्च करने लगते हैं। कई बार सामान्य समस्या को भी गंभीर बीमारी से जोड़कर दिखाया जाता है, जिससे व्यक्ति का डर और बढ़ जाता है। लगातार ऐसा करना हेल्थ एंग्जायटी को बढ़ावा दे सकता है।

कैसे करें हेल्थ एंग्जायटी से बचाव ?

  1. ध्यान भटकाने की कोशिश करें
    अगर बार-बार बीमारी का डर सताता है, तो अपनी पसंदीदा गतिविधियों में समय बिताएं। किताब पढ़ना, संगीत सुनना, पेंटिंग, गार्डनिंग या किसी हॉबी पर ध्यान देना मददगार हो सकता है।
  2. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लें
    विशेषज्ञों के अनुसार कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और बिहेवियरल स्ट्रेस मैनेजमेंट थेरेपी इस समस्या में प्रभावी मानी जाती हैं। थेरेपी के जरिए व्यक्ति अपनी सोच और डर को बेहतर तरीके से समझना सीखता है।
  3. दवाओं की भी पड़ सकती है जरूरत
    इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर के लिए कोई विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि कुछ मामलों में डॉक्टर तनाव और डिप्रेशन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (SSRIs) जैसी दवाएं लिख सकते हैं। इनका सेवन केवल विशेषज्ञ की सलाह पर ही करना चाहिए।

योग और मेडिटेशन भी हैं फायदेमंद
नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ (NCCIH) के अनुसार नियमित योग, मेडिटेशन, माइंडफुलनेस और एक्सरसाइज मानसिक तनाव कम करने में मदद करते हैं। इससे हेल्थ एंग्जायटी के लक्षणों में भी सुधार देखा जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह
सेहत के प्रति जागरूक रहना जरूरी है, लेकिन हर छोटी शारीरिक परेशानी को गंभीर बीमारी मान लेना मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। अगर मेडिकल जांच सामान्य आने के बाद भी बीमारी का डर लगातार बना रहता है और इसका असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगा है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content