'हम हिंदुओं को सहन करते हैं' पाकिस्तानी राष्ट्रपति के बयान पर भड़के जावेद अख्तर, बोले- भुट्टो से शादी कर सुर्खियों में आए
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हिंदुओं को लेकर ऐसा क्या कहा कि जावेद अख्तर भड़क गए? जावेद ने जरदारी को मिस्टर टेन परसेंट कहकर उनके पुराने विवाद को भी याद दिलाया। जानिए जरदारी के बयान, जावेद अख्तर के पलटवार और दोनों के बीच छिड़े नए विवाद की पूरी कहानी।
नई दिल्ली। पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी पर भारत में विवाद खड़ा हो गया है। जरदारी ने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को मुस्लिम सहन करते हैं और वे आजाद हैं। उनके इस बयान पर मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। जावेद अख्तर ने जरदारी को संवेदनहीन बताते हुए उनकी पुरानी पहचान पर भी निशाना साधा। खास बात यह रही कि जावेद अख्तर ने अपनी टिप्पणी में 10 प्रतिशत का जिक्र किया, जिसे जरदारी के पुराने उपनाम मिस्टर टेन परसेंट से जोड़कर देखा जा रहा है। जरदारी को यह उपनाम भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते मिला था, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया था।
जरदारी ने हिंदुओं को लेकर क्या कहा ?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत और पाकिस्तान के नजरिए की तुलना करते हुए कहा कि भारतीयों का नजरिया अलग है और उनके दिमाग में अपना एजेंडा है। उन्होंने अखंड भारत की सोच का भी जिक्र किया। इसके बाद जरदारी ने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा, हम मुसलमान हैं और वे नहीं हैं। लेकिन हम ऐसे सोच वाले मुसलमान हैं, जो पाकिस्तान में 3-4 फीसदी हिंदू आबादी को सहन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू उतने ही आजाद और अच्छे हैं, जितने कहीं और थे और वे उनके साथ रहने के बजाय हमारे साथ रहना पसंद करेंगे।
जावेद अख्तर ने जरदारी को उनके पुराने उपनाम से घेरा
जरदारी के बयान पर जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, पाकिस्तान के मिस्टर जरदारी, जो बेनजीर भुट्टो से शादी करने के बाद सुर्खियों में आए थे, कहते हैं कि उनके देश में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को वे बर्दाश्त करते हैं। मैं समझता हूं, मिस्टर जरदारी, आप हमेशा उन सभी चीजों के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जिनका प्रतिशत 10 प्रतिशत से भी कम है। जावेद अख्तर की इस टिप्पणी को जरदारी के पुराने उपनाम मिस्टर टेन परसेंट पर तंज माना जा रहा है।
क्यों कहा जाता था जरदारी को मिस्टर टेन परसेंट ?
आसिफ अली जरदारी को 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में मिस्टर टेन परसेंट के नाम से जाना जाने लगा था। उन पर सरकारी परियोजनाओं और कारोबारी सौदों में 10 फीसदी कमीशन मांगने के आरोप लगाए गए थे। जरदारी ने इन आरोपों से इनकार किया था। 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने बेनजीर भुट्टो की सरकार को बर्खास्त किया था। इसके बाद जरदारी से जुड़ा यह उपनाम और ज्यादा चर्चित हो गया। जावेद अख्तर ने इसी पुराने संदर्भ को अपने तंज का आधार बनाया।
जावेद अख्तर पर भी होने लगी ट्रोलिंग
जरदारी की आलोचना करने के बाद जावेद अख्तर को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब जावेद अख्तर ने पाकिस्तान से जुड़े किसी मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी हो। इससे पहले भी वह पाकिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक हालात को लेकर कई बार तीखी टिप्पणी कर चुके हैं। हाल ही में एक दूसरे मामले में जब एक ट्रोल ने उनकी समुदाय को लेकर टिप्पणी की थी, तब जावेद अख्तर ने खुद को नास्तिक बताते हुए जवाब दिया था कि उनकी कौम सभी भारतीय हैं।
जब जावेद अख्तर ने कहा था- पाकिस्तान और नरक में से नरक चुनूंगा
मई 2025 में मुंबई में शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत की किताब नरकातला स्वर्ग के विमोचन के दौरान जावेद अख्तर ने पाकिस्तान को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान और नरक में से किसी एक को चुनना हो तो वह नरक चुनेंगे। उनका यह बयान भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के दौर में सामने आया था और इस पर दोनों देशों में काफी चर्चा हुई थी। इसी दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की टिप्पणियों पर भी जावेद अख्तर ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भारत की समस्या आम पाकिस्तानी नागरिकों से नहीं, बल्कि सरकार, सेना और कट्टरपंथियों से है।
लाहौर में भी पाकिस्तान को लेकर कही थी बड़ी बात
जावेद अख्तर का पाकिस्तान को लेकर रुख नया नहीं है। 2023 में लाहौर के फैज फेस्टिवल में भी उन्होंने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और विभाजन पर खुलकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने दोनों देशों के लोगों की साझा सांस्कृतिक जड़ों का जिक्र किया था और विभाजन से पैदा हुई दुश्मनी पर सवाल उठाए थे। पाकिस्तान में रहते हुए उनके इस तरह के बयानों पर वहां भी चर्चा हुई थी। हालांकि उनके कुछ विचारों पर भारत और पाकिस्तान दोनों जगह अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
एक बयान से फिर शुरू हुई पुरानी बहस
जरदारी के बयान ने एक बार फिर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और भारत-पाकिस्तान की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति अपने देश में हिंदुओं को स्वतंत्रता मिलने की बात कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ हिंदू आबादी के लिए सहन करने जैसे शब्दों ने सवाल खड़े कर दिए। इसी विरोधाभास को जावेद अख्तर ने अपने जवाब का आधार बनाया और जरदारी के पुराने उपनाम का जिक्र करते हुए उन पर पलटवार किया। अब इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा जरदारी के बयान से ज्यादा जावेद अख्तर के 10 प्रतिशत वाले तंज की हो रही है।
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