समय रैना समेत 5 कॉमेडियन पर केस रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दिव्यांगों के लिए किए काम सराहनीय, जानिए क्या था पूरा मामला
समय रैना समेत 5 कॉमेडियंस के खिलाफ दिव्यांगों पर कथित आपत्तिजनक कमेंट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द कर दी। जानिए इंडियाज गॉट लेटेंट विवाद से लेकर दिव्यांगों के लिए फंड जुटाने के निर्देश, जुर्माने, समय रैना की वापसी और लेटेंट 2 तक की पूरी कहानी।
नई दिल्ली। कॉमेडियन समय रैना और चार अन्य कॉमेडियंस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिव्यांगों और स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी यानी SMA जैसी गंभीर बीमारी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दर्ज FIR को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रद्द कर दिया। जिन पांच कॉमेडियंस के खिलाफ केस खत्म किया गया, उनमें समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस विवाद ने इन कॉमेडियंस को कानूनी मुश्किल में पहुंचाया था, उसी मामले में बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों के लिए किए गए उनके काम की तारीफ भी की। अदालत ने दिव्यांग लोगों और SMA जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए जागरूकता और फंड जुटाने की उनकी कोशिशों को सराहनीय बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया केस?
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि पांचों कॉमेडियंस की ओर से दिव्यांग लोगों के लिए जागरूकता बढ़ाने और फंड जुटाने के प्रयास सराहनीय हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अगर इन लोगों ने अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाई है तो इसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे। हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट अब ऑनलाइन और एंटरटेनमेंट कंटेंट में दिव्यांग लोगों के सम्मान और गरिमा को लेकर नियम और दिशा-निर्देश बनाए जाने की जरूरत पर भी विचार करेगा।
एक शो से शुरू हुआ था विवाद
पूरा विवाद इंडियाज गॉट लेटेंट के एक एपिसोड के बाद शुरू हुआ था। शो में दिव्यांग लोगों और SMA जैसी गंभीर बीमारी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। आरोप था कि इस तरह के कमेंट से दिव्यांग लोगों की गरिमा को ठेस पहुंची और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों का मजाक बनाया गया। इसके बाद समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। मामले में क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में ऑनलाइन कंटेंट में दिव्यांग लोगों के सम्मान और गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए बेहतर नियम बनाने की मांग की गई थी।
केस रद्द होने से पहले कोर्ट ने दी थी अलग जिम्मेदारी
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में एक अलग रास्ता अपनाया था। कोर्ट ने समय रैना समेत पांचों कॉमेडियंस को दिव्यांग लोगों के लिए काम करने और SMA से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए फंड जुटाने के लिए महीने में कम से कम दो कार्यक्रम करने का निर्देश दिया था। इन कार्यक्रमों में दिव्यांग लोगों को शामिल करने और उनकी उपलब्धियों को सामने लाने के लिए भी कहा गया था। इसके बाद कोर्ट को बताया गया कि कॉमेडियंस ने कई कार्यक्रम किए। इन आयोजनों के जरिए दिव्यांग लोगों को मंच दिया गया और SMA से पीड़ित लोगों के लिए जागरूकता फैलाने के साथ फंड जुटाने की कोशिश की गई। हालांकि, जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और बाकी चार कॉमेडियंस पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने माना था कि पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था।
विवाद के बाद समय रैना ने कैसे की वापसी?
विवाद के बाद समय रैना लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से अपने कॉमेडी कंटेंट से दूर रहे। फिर 17 अप्रैल 2026 को उन्होंने स्टिल अलाइव नाम के स्टैंड-अप शो के जरिए वापसी की। इस शो में समय रैना ने विवाद और अपने खिलाफ चल रहे केस पर भी बात की। शो के दौरान वह भावुक भी नजर आए। उनके यूट्यूब चैनल पर इस शो के वीडियो को 71 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। यानी जिस विवाद ने उनके करियर पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था, उसी के बाद उनकी वापसी को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला।
लेटेंट 2 के साथ फिर चर्चा में आए समय रैना
समय रैना की वापसी यहीं नहीं रुकी। जून 2026 में नेटफ्लिक्स ने इंडियाज गॉट लेटेंट 2 की घोषणा की। 20 जून 2026 को इसका पहला एपिसोड नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर एक साथ स्ट्रीम किया गया। पहले एपिसोड में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ बतौर पैनल गेस्ट नजर आईं। सिर्फ यूट्यूब पर इस एपिसोड को 65 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले। इसके बाद शो में करण औजला, कीकू शारदा, चंदन प्रभाकर, राघव जुयाल और बादशाह समेत कई चर्चित चेहरे नजर आए। शो लगातार चर्चा में बना हुआ है।
एक विवाद, फिर कोर्ट की निगरानी और अब केस खत्म
समय रैना और बाकी कॉमेडियंस के मामले की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि शुरुआत में जिस कंटेंट को लेकर विवाद हुआ, उसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उन्हें दिव्यांगों के लिए जागरूकता और फंड जुटाने की जिम्मेदारी दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने पांचों के खिलाफ दर्ज केस रद्द कर दिए हैं। हालांकि, ऑनलाइन मनोरंजन और कॉमेडी कंटेंट में दिव्यांग लोगों की गरिमा और सम्मान को लेकर नियम बनाने का सवाल अभी अदालत के सामने बना हुआ है। इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है कि कॉमेडी और अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा कहां तक हो सकती है और किसी समुदाय, खासकर दिव्यांग लोगों की गरिमा की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट का आगे का रुख इसी सवाल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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