मादा की तलाश में 4000 किमी घूमे 3 जंगली कुत्ते, 8 महीने तक चलता रहा सफर, वैज्ञानिक भी हैरान...

जाम्बिया में तीन नर अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने मादा साथी की तलाश में करीब 4000 किलोमीटर का सफर तय किया। करीब 8 महीने चली इस यात्रा को वैज्ञानिकों ने GPS कॉलर से ट्रैक किया। जानिए कैसे इन दुर्लभ जंगली कुत्तों ने इंसानी बस्तियों से बचते हुए इतनी लंबी दूरी तय की और इसे माइग्रेशन से अलग क्यों माना जा रहा है।

Sep 15, 2026 - 15:27
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मादा की तलाश में 4000 किमी घूमे 3 जंगली कुत्ते, 8 महीने तक चलता रहा सफर, वैज्ञानिक भी हैरान...

मादा साथी की तलाश इंसानों ही नहीं, जंगली जानवरों को भी हजारों किलोमीटर दूर तक जाने के लिए मजबूर कर सकती है। अफ्रीका के जाम्बिया से सामने आई एक ऐसी ही घटना ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। यहां तीन नर अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी की तलाश में करीब 4000 किलोमीटर का सफर तय किया। यह यात्रा लगभग 8 महीने तक चली और वैज्ञानिकों के मुताबिक अफ्रीका के किसी जमीनी स्तनधारी जीव की साथी की तलाश में यह अब तक की सबसे लंबी दर्ज यात्राओं में से एक है। खास बात यह है कि इन जंगली कुत्तों ने यह सफर किसी सीधी सड़क या आसान रास्ते से नहीं किया। ऊबड़-खाबड़ इलाकों, जंगलों और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच वे लगातार आगे बढ़ते रहे। वैज्ञानिकों ने उनकी इस पूरी यात्रा को GPS कॉलर और रेडियो ट्रैकिंग की मदद से मॉनिटर किया।

सीधी दूरी करीब 260 मील, लेकिन सफर पहुंच गया 4000 किमी
वैज्ञानिकों के मुताबिक इन तीनों जंगली कुत्तों ने एक सीधी रेखा में करीब 260 मील यानी लगभग 418 किलोमीटर की दूरी तय की थी। लेकिन जंगल और प्राकृतिक इलाकों में रास्ते सीधे नहीं होते। उन्हें अलग-अलग इलाकों से होकर गुजरना पड़ा और रास्ता बदलते हुए उनकी वास्तविक यात्रा करीब 2485 मील यानी लगभग 4000 किलोमीटर तक पहुंच गई। इस तरह सीधी दूरी की तुलना में उन्होंने करीब 10 गुना ज्यादा रास्ता तय किया। यह सफर करीब आठ महीने तक चलता रहा।

शहरों और इंसानी इलाकों से बनाकर रखी दूरी 
इस यात्रा की एक और खास बात वैज्ञानिकों का ध्यान खींच रही है। तीनों नर जंगली कुत्तों ने अपने रास्ते में आने वाले बड़े शहरों, बस्तियों और इंसानी गतिविधियों वाले इलाकों से दूरी बनाए रखी। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह घटना बताती है कि इंसानों की बढ़ती मौजूदगी और प्राकृतिक इलाकों में दखल के बावजूद कुछ वन्यजीव लंबी दूरी तक घूमने और अपने लिए नए इलाके तलाशने में सक्षम हैं। हालांकि, इस दौरान हर जंगली कुत्ता इतनी किस्मत वाला नहीं रहा। अध्ययन के तहत GPS कॉलर से ट्रैक किए गए कुछ अन्य जंगली कुत्ते शिकारियों की ओर से लगाए गए गैर-कानूनी फंदों में फंसकर मारे गए।

साथी की तलाश में क्यों निकलते हैं इतने दूर?
अफ्रीकी जंगली कुत्तों का जीवन झुंड के साथ जुड़ा होता है। वे सामाजिक जानवर हैं और आमतौर पर समूह में रहते हैं। झुंड के सदस्य मिलकर शिकार करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। लेकिन प्रजनन के लिए वे अपने ही झुंड के सदस्यों पर निर्भर नहीं रहते। जब जंगली कुत्ते करीब दो से तीन साल की उम्र में पहुंचते हैं, तो वे दूसरे झुंड में साथी की तलाश के लिए अपने समूह से अलग होकर लंबी दूरी की यात्रा कर सकते हैं। इसी व्यवहार की वजह से जाम्बिया के इन तीन नर जंगली कुत्तों ने भी अपने लिए नए साथी और नए झुंड की तलाश में इतना लंबा सफर तय किया।

मादा जंगली कुत्तों ने भी तय की लंबी दूरी
वैज्ञानिकों ने बताया कि इसी अध्ययन के दौरान तीन मादा जंगली कुत्तों ने भी लगभग इतनी ही लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा की थी। हालांकि, एक मादा जंगली कुत्ते के गैर-कानूनी फंदे में फंस जाने के बाद उनकी यात्रा रुक गई। यह घटना जंगली कुत्तों के सामने मौजूद एक बड़े खतरे को भी दिखाती है। साथी और नए इलाके की तलाश में उन्हें जितनी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, उतना ही उनका सामना इंसानी गतिविधियों और शिकारियों के लगाए फंदों से होने का खतरा बढ़ जाता है। 

अफ्रीका के सबसे दुर्लभ शिकारी जानवरों में शामिल
अफ्रीकी जंगली कुत्ते अफ्रीका के सबसे दुर्लभ शिकारी जानवरों में गिने जाते हैं। अनुमान के मुताबिक जंगलों में अब इनकी संख्या करीब 6000 के आसपास ही बची है। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनका सामाजिक व्यवहार है। ये अकेले रहने के बजाय झुंड में रहते हैं और मिलकर शिकार करते हैं। भोजन की तलाश के साथ-साथ ये नए इलाकों और दूसरे झुंडों के साथ प्रजनन के अवसर तलाशने के लिए भी लंबी दूरी तय करते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों के लिए GPS कॉलर के जरिए इनकी गतिविधियों पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि ये जानवर किस तरह अपने इलाके का चुनाव करते हैं, किन रास्तों से गुजरते हैं और इंसानी बस्तियों से किस तरह बचते हैं।

माइग्रेशन नहीं, इसे डिस्पर्सल कहते हैं
वैज्ञानिकों के मुताबिक साथी की तलाश में इस तरह एक दिशा में किया गया लंबा सफर माइग्रेशन यानी प्रवास से अलग होता है। इसे डिस्पर्सल कहा जाता है। माइग्रेशन में जानवर आमतौर पर भोजन, पानी या अनुकूल मौसम की तलाश में एक इलाके से दूसरे इलाके में नियमित रूप से आते-जाते हैं। वहीं डिस्पर्सल में जानवर अपने जन्म या मौजूदा झुंड से अलग होकर नए इलाके और साथी की तलाश में निकलते हैं। अफ्रीकी जंगली कुत्तों की यह यात्रा इसी डिस्पर्सल व्यवहार का एक असाधारण उदाहरण है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content