गुफा में रहकर पढ़ता था चीन का ये लड़का, आज दुनिया के ताकतवर नेताओं में शुमार, ऐसे राष्ट्रपति बने शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। कभी 15-16 साल की उम्र में उन्हें चीन के एक गांव लियांगजियाहे भेज दिया गया था, जहां उन्होंने मिट्टी की गुफा में रहकर खेतों में मजदूरी की और दीये की रोशनी में किताबें पढ़ीं। गांव में रहते हुए उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को करीब से समझा और विकास से जुड़े कामों में हिस्सा लिया। आज वही गांव पर्यटन स्थल बन चुका है।
नई दिल्ली। आज दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाने वाले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जिंदगी का एक दौर ऐसा भी था, जब उनका ठिकाना आलीशान सरकारी भवन नहीं, बल्कि मिट्टी की बनी एक साधारण गुफा हुआ करती थी। जिस गांव में उन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल बेहद मुश्किल परिस्थितियों में बिताए, आज वही जगह उनके राजनीतिक सफर की शुरुआती कहानी जानने वालों के लिए खास बन चुकी है। करीब आधी सदी पहले चीन सांस्कृतिक क्रांति के दौर से गुजर रहा था। राजनीतिक उथल-पुथल के बीच शहरों के युवाओं को गांवों में भेजा जा रहा था। इसी दौरान करीब 15-16 साल के शी जिनपिंग को शान्शी प्रांत के लियांगजियाहे गांव भेजा गया। यह वह समय था जब उनका परिवार भी राजनीतिक उठापटक का शिकार हुआ था। शहर से गांव पहुंचे शी जिनपिंग के सामने अचानक बिल्कुल अलग जिंदगी थी। खेतों में मजदूरी, सीमित संसाधन और रहने के लिए मिट्टी की गुफा। लेकिन यही मुश्किल दौर आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक सोच की नींव बना।
गुफा में दीये की रोशनी और सामने किताबों का ढेर
लियांगजियाहे में शी जिनपिंग की जिंदगी आसान नहीं थी। दिनभर खेतों में काम करना और इसके बाद उसी गुफा में लौटना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। लेकिन इस कठिन जीवन के बीच एक चीज लगातार उनके साथ रही और वह थीं किताबें। बताया जाता है कि जब शी जिनपिंग गांव पहुंचे तो उनके पास कपड़ों से ज्यादा किताबें थीं। दिनभर की मेहनत के बाद वह गुफा में मद्धिम रोशनी में पढ़ते थे। गांव की कठिन परिस्थितियों के बीच किताबों ने उन्हें दुनिया को समझने का एक अलग नजरिया दिया। आज भी गांव में उन गुफाओं में से एक को सुरक्षित रखा गया है, जहां वह रहा करते थे। यह जगह अब उनके शुरुआती जीवन की यादों से जुड़ी हुई है।
खेतों में मजदूरी से लेकर गांव की समस्याओं तक
लियांगजियाहे में रहते हुए शी जिनपिंग सिर्फ अपने हालात से लड़ने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने गांव की समस्याओं को करीब से देखा और उन्हें दूर करने के प्रयासों में भी हिस्सा लिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर बांध बनाने, पानी की व्यवस्था करने और मीथेन यानी गोबर गैस प्लांट तैयार करने जैसे कामों में भूमिका निभाई। गांव की जिंदगी ने उन्हें चीन के ग्रामीण समाज की वास्तविक परिस्थितियों से रूबरू कराया। गरीबी, संसाधनों की कमी और रोजमर्रा की मुश्किलों को उन्होंने खुद महसूस किया। यही अनुभव बाद में उनके राजनीतिक व्यक्तित्व की पहचान का हिस्सा बने।
जिस गांव में कभी संघर्ष किया, वही आज बन चुका पर्यटन स्थल
समय के साथ शी जिनपिंग चीन की राजनीति में आगे बढ़ते गए। लेकिन लियांगजियाहे से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ। आज जिस गांव में कभी उन्होंने मजदूर की तरह जीवन बिताया था, उसकी तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। गांव अब चीन में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। बड़ी संख्या में लोग यहां शी जिनपिंग के शुरुआती जीवन से जुड़ी जगहों को देखने पहुंचते हैं। उनकी पुरानी गुफा, गांव की गलियां और उनसे जुड़ी यादें अब वहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
पुरानी साथी ने जूते देने चाहे, जिनपिंग ने पैसे देकर लिए
लियांगजियाहे की रहने वाली लियू जिनलियान आज भी शी जिनपिंग के गांव वाले दिनों को याद करती हैं। वह गांव में एक छोटी दुकान चलाती हैं और वहां आने वाले लोगों को सामान बेचती हैं। शी जिनपिंग जब चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद पुराने दिनों को याद करते हुए गांव पहुंचे, तब लियू ने उन्हें जूतों की एक जोड़ी देने की कोशिश की थी। लेकिन शी जिनपिंग ने बिना पैसे दिए जूते लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने जूतों की कीमत चुकाई और उसके बाद ही उन्हें लिया। यह छोटा सा किस्सा आज भी गांव में उनके पुराने दिनों से जुड़ी यादों के तौर पर सुनाया जाता है।
मुश्किलों के बीच बनी फैसले लेने की आदत
लियांगजियाहे में बिताया गया समय शी जिनपिंग के जीवन का सिर्फ एक कठिन अध्याय नहीं था। यह वह दौर था जिसने उन्हें ग्रामीण चीन की वास्तविकता को करीब से देखने का मौका दिया। गांव के लोगों के बीच उनकी छवि ऐसे युवा की बनी जो कम बोलता था, सोच-समझकर फैसला लेता था और मुश्किल परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटता था। जिस उम्र में अधिकांश युवाओं के लिए शहर से गांव जाना किसी सजा से कम नहीं था, उस समय शी जिनपिंग ने वहां खुद को ढालने की कोशिश की। खेतों में काम किया, ग्रामीणों के साथ रहे और गांव की समस्याओं को समझा।
गुफा से चीन की सत्ता के शीर्ष तक
लियांगजियाहे से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर चीन की राजनीति के सबसे ऊंचे मुकाम तक पहुंचा। शी जिनपिंग ने पार्टी संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। आज वह चीन के राष्ट्रपति हैं और दुनिया की बड़ी राजनीतिक ताकतों में उनका नाम शामिल है। लेकिन उनके राजनीतिक सफर की शुरुआती कहानी में लियांगजियाहे की उन गुफाओं का जिक्र हमेशा होता है, जहां एक किशोर ने खेतों में काम करते हुए और दीये की रोशनी में किताबें पढ़ते हुए अपने जीवन का एक लंबा दौर बिताया था। करीब आधी सदी में लियांगजियाहे भी बदल गया और शी जिनपिंग की जिंदगी भी। कभी जहां एक युवा को मुश्किल हालात में रहने के लिए भेजा गया था, आज वही गांव हजारों लोगों को अपनी ओर खींचता है। शी जिनपिंग की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि चीन की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाले इस नेता के राजनीतिक सफर की शुरुआत किसी बड़े शहर या सत्ता के गलियारे से नहीं, बल्कि एक छोटे से गांव और मिट्टी की गुफा से हुई थी।
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