अमिताभ बच्चन अयोध्या में बनाएंगे पिता हरिवंशराय बच्चन का मेमोरियल, 15 करोड़ में खरीदी जमीन, नक्शा पास कराने की प्रक्रिया शुरू
अमिताभ बच्चन अयोध्या में अपने पिता और प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन की याद में मेमोरियल बनाने की तैयारी कर रहे हैं। दशरथ पथ के किनारे करीब 15 करोड़ रुपए में जमीन खरीदी गई है और एडीए में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
अयोध्या से अमिताभ बच्चन का रिश्ता अब सिर्फ जमीन खरीदने तक सीमित नहीं रहने वाला है। बॉलीवुड के महानायक अब रामनगरी में अपने पिता और प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिवंशराय बच्चन की यादों को भी बसाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए डॉ. हरिवंशराय बच्चन मेमोरियल ट्रस्ट ने अयोध्या विकास प्राधिकरण में प्रस्तावित मेमोरियल का नक्शा मंजूरी के लिए जमा कर दिया है। मेमोरियल के लिए दशरथ पथ के किनारे जमीन खरीदी गई है। यह जमीन अभिनंदन ग्रुप ऑफ लोढ़ा के द सरयू प्रोजेक्ट में कुछ महीने पहले करीब 15 करोड़ रुपए में ली गई थी। अब इस जमीन पर प्रस्तावित निर्माण को आकार देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नक्शा पास कराने से पहले अयोध्या विकास प्राधिकरण ने नियमानुसार लोगों से आपत्तियां मांगी हैं।
15 दिन में दर्ज कराई जा सकती है आपत्ति
एडीए सचिव राजेश कुमार मिश्र के मुताबिक, मेमोरियल का नक्शा मंजूरी के लिए जमा किया गया है। नियमानुसार नक्शे को स्वीकृति देने से पहले आपत्तियां मांगी गई हैं। निर्माण या प्रस्तावित नक्शे को लेकर किसी को आपत्ति है तो वह 15 दिन के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नक्शे की मंजूरी और निर्माण से जुड़ी अगली कार्रवाई की जाएगी। यानी फिलहाल मेमोरियल निर्माण की दिशा में पहला बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा चुका है।
दशरथ पथ के किनारे बनेगा मेमोरियल
जिस जगह पर मेमोरियल प्रस्तावित है, वह अयोध्या के तेजी से विकसित हो रहे इलाके में है। जमीन दशरथ पथ के किनारे स्थित है। इसी क्षेत्र में अभिनंदन लोढ़ा ग्रुप की ओर से बड़ा आवासीय प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है, जिसमें पांच सितारा होटल भी बनाया जा रहा है। दशरथ पथ रामनगरी को दशरथ समाधि से जोड़ता है। सरयू के अयोध्या-बिल्वहरिघाट तटबंध के समानांतर विकसित किया जा रहा यह फोरलेन मार्ग अयोध्या के नए प्रमुख मार्गों में शामिल हो रहा है और इसका काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है। ऐसे में अमिताभ बच्चन के पिता के नाम पर बनने वाला मेमोरियल जिस इलाके में प्रस्तावित है, वहां आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन के साथ रियल एस्टेट और व्यावसायिक गतिविधियां भी बढ़ने की संभावना है।
सोलर प्लांट और रिंग रोड के करीब है जमीन
मेमोरियल के लिए खरीदी गई जमीन एनटीपीसी के सोलर प्लांट के पास बताई गई है। इसके आसपास अयोध्या के लिए महत्वपूर्ण कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी विकसित हो रहे हैं। इसी क्षेत्र से करीब 67 किलोमीटर लंबे रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है। इस रिंग रोड को सरयू नदी पर करीब 4200 मीटर लंबे पुल के जरिए जोड़ने की योजना है। सरयू का जलस्तर बढ़ने के कारण फिलहाल पुल का काम प्रभावित हुआ है। रिंग रोड के जरिए अयोध्या को बस्ती और गोंडा से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे दशरथ पथ और आसपास के इलाकों में आने वाले वर्षों में आवाजाही बढ़ सकती है।
अयोध्या में अमिताभ बच्चन की मौजूदगी पहले से
अमिताभ बच्चन का अयोध्या से जुड़ाव पहले से चर्चा में रहा है। अब पिता हरिवंशराय बच्चन के नाम पर मेमोरियल बनाने की योजना इस रिश्ते को एक अलग पहचान देने जा रही है। यह मेमोरियल सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं होगा, बल्कि हिंदी साहित्य के बड़े नाम हरिवंशराय बच्चन की स्मृतियों और उनकी साहित्यिक विरासत को रामनगरी से जोड़ने की कोशिश भी होगी। हरिवंशराय बच्चन हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में रहे हैं। उनकी रचनाओं ने हिंदी कविता को एक अलग पहचान दी। ऐसे में उनके नाम पर अयोध्या में प्रस्तावित मेमोरियल साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
अयोध्या में बदल रही है दशरथ पथ के आसपास की तस्वीर
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन का विस्तार तेजी से हुआ है। इसके साथ ही शहर के आसपास बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट भी विकसित हो रहे हैं। दशरथ पथ के आसपास का इलाका भी इसी बदलाव का हिस्सा है। एक तरफ सड़क, रिंग रोड और पुल जैसी परियोजनाएं कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ होटल और आवासीय प्रोजेक्ट यहां नई व्यावसायिक संभावनाएं पैदा कर रहे हैं। इसी बदलती तस्वीर के बीच अमिताभ बच्चन के परिवार की ओर से खरीदी गई जमीन पर हरिवंशराय बच्चन मेमोरियल की योजना सामने आई है। फिलहाल सबसे पहले नक्शे की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होगी। लोगों से मांगी गई आपत्तियों की अवधि खत्म होने और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेमोरियल के निर्माण की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा। अगर योजना प्रस्ताव के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में अयोध्या की पहचान सिर्फ धार्मिक नगरी के तौर पर ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति से जुड़े एक नए केंद्र के रूप में भी और मजबूत हो सकती है।
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