सफेद ब्रेड-चावल को अकेले खाना कितना सही, तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाने वाला नेकेड कार्ब्स वर्कआउट वालों के लिए कैसे हो सकता है फायदेमंद...
सफेद ब्रेड, सफेद चावल, मीठे ड्रिंक्स और मैदा जैसे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट को नेकेड कार्ब्स कहा जाता है। इन्हें अकेले खाने पर ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है, लेकिन एक्सरसाइज और लंबी शारीरिक गतिविधि करने वालों के लिए आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट तुरंत ऊर्जा देने में मदद कर सकते हैं।
डाइट को लेकर इन दिनों एक नया शब्द काफी चर्चा में है- नेकेड कार्ब्स। नाम भले ही थोड़ा अलग हो, लेकिन इसके पीछे की बात रोजमर्रा के खाने से जुड़ी है। सफेद ब्रेड, सफेद चावल, मीठे ड्रिंक्स, जैम, मिठाइयां, मैदा से बने खाद्य पदार्थ और फलों का जूस जैसे कई खाद्य पदार्थ इस कैटेगरी में शामिल किए जाते हैं। इन खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट तो पर्याप्त मात्रा में होता है, लेकिन फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट की मात्रा कम या न के बराबर हो सकती है। यही वजह है कि इन्हें अकेले खाने पर शरीर इन्हें अपेक्षाकृत जल्दी पचा सकता है और ब्लड ग्लूकोज तेजी से बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए खराब हैं। खासकर एक्सरसाइज और स्पोर्ट्स करने वाले लोगों के लिए आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट तुरंत ऊर्जा का स्रोत बन सकते हैं। ऐसे में नेकेड कार्ब्स का असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि इन्हें कौन, कितनी मात्रा में और किस समय खा रहा है।
सबसे पहले समझिए, नेकेड कार्ब्स आखिर हैं क्या?
नेकेड कार्ब्स कोई मेडिकल बीमारी या आधिकारिक डाइट कैटेगरी नहीं है। यह एक सामान्य शब्द है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर ऐसे खाद्य पदार्थों के लिए किया जाता है जिनमें मुख्य रूप से रिफाइंड या सिंपल कार्बोहाइड्रेट होते हैं और उनके साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट की मात्रा कम होती है। सफेद ब्रेड, सफेद चावल, पास्ता, मीठे पेय, जैम, मिठाइयां, क्रैकर्स और फलों का जूस इसके उदाहरण हो सकते हैं। रिफाइंड अनाज तैयार करते समय अनाज की बाहरी परत का कुछ हिस्सा हटा दिया जाता है, जिससे फाइबर और कुछ पोषक तत्व कम हो जाते हैं। ऐसे कार्बोहाइड्रेट शरीर में जल्दी टूट सकते हैं और ग्लूकोज तेजी से रक्त में पहुंच सकता है। इसके बाद इंसुलिन की प्रतिक्रिया भी बढ़ सकती है।
अकेले खाने पर क्यों बढ़ सकता है ब्लड शुगर?
कार्बोहाइड्रेट के साथ अगर प्रोटीन, फाइबर और फैट मौजूद हों तो भोजन को पचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। इससे ग्लूकोज का रक्त में पहुंचना धीमा हो सकता है। इसके उलट, अगर सफेद ब्रेड, सफेद चावल या कोई मीठा खाद्य पदार्थ अकेले और खासकर खाली पेट खाया जाए तो ब्लड ग्लूकोज तेजी से बढ़ सकता है। यही वजह है कि डाइट में सिर्फ कार्बोहाइड्रेट पर निर्भर रहने के बजाय भोजन को संतुलित रखना ज्यादा बेहतर माना जाता है। उदाहरण के लिए सफेद ब्रेड के साथ अंडा या कोई प्रोटीन स्रोत, या चावल के साथ दाल और सब्जियां लेने से भोजन में प्रोटीन और फाइबर भी शामिल हो जाते हैं।
एक्सरसाइज करने वालों के लिए कहानी थोड़ी अलग
यहां नेकेड कार्ब्स का एक दूसरा पहलू सामने आता है। जो लोग लंबी दौड़, साइक्लिंग, हाई इंटेंसिटी वर्कआउट या दूसरी लंबी अवधि वाली शारीरिक गतिविधियां करते हैं, उनके शरीर को जल्दी उपलब्ध होने वाली ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे समय आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट उपयोगी हो सकते हैं। केला, स्पोर्ट्स ड्रिंक या अन्य आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट लंबे समय तक चलने वाली गतिविधि के दौरान ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। वर्कआउट के बाद भी कार्बोहाइड्रेट शरीर के ग्लाइकोजन स्टोर को दोबारा भरने में मदद कर सकते हैं। अगर इनके साथ पर्याप्त प्रोटीन लिया जाए तो मांसपेशियों की रिकवरी के लिए भी बेहतर पोषण मिल सकता है। यानी जो चीज एक सामान्य व्यक्ति के लिए रोजाना खाने का अच्छा विकल्प नहीं मानी जाएगी, वही चीज किसी एथलीट या ज्यादा शारीरिक गतिविधि करने वाले व्यक्ति के लिए सही समय और सही मात्रा में उपयोगी हो सकती है।
क्या नेकेड कार्ब्स पूरी तरह खराब हैं?
ऐसा कहना सही नहीं होगा। कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत हैं और दिमाग तथा मांसपेशियों को भी ऊर्जा की जरूरत होती है। समस्या तब ज्यादा हो सकती है जब रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ रोजाना बड़ी मात्रा में लिए जाएं और डाइट में प्रोटीन, फाइबर, फल, सब्जियां और साबुत अनाज की कमी हो। इसलिए कभी-कभार सफेद ब्रेड, पास्ता या सफेद चावल खाने को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि पूरी डाइट कैसी है और इन चीजों का सेवन कितनी मात्रा में किया जा रहा है।
डाइट में क्या बदलाव कर सकते हैं?
अगर रोजाना की डाइट में कार्बोहाइड्रेट शामिल करना है तो साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियों जैसे फाइबर वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है। सफेद चावल या ब्रेड खाने पर उसके साथ प्रोटीन और फाइबर वाला भोजन शामिल किया जा सकता है। इससे भोजन ज्यादा संतुलित बनता है और केवल रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट पर निर्भरता कम होती है। उदाहरण के तौर पर चावल के साथ दाल और सब्जी, या ब्रेड के साथ प्रोटीन और सब्जियों का विकल्प लिया जा सकता है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?
जिन लोगों को डायबिटीज, मोटापा या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या है, उन्हें अपनी डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और मीठे खाद्य पदार्थों की मात्रा को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों के लिए किसी ट्रेंड को देखकर अपनी डाइट बदलना सही नहीं है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है। कुल मिलाकर, नेकेड कार्ब्स को न तो पूरी तरह दुश्मन मानने की जरूरत है और न ही इसे हर किसी के लिए हेल्दी डाइट का हिस्सा समझना चाहिए। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खा रहे हैं, कितनी मात्रा में खा रहे हैं और उस समय आपके शरीर को किस तरह की ऊर्जा की जरूरत है। आम डाइट में फाइबर, प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भोजन ज्यादा महत्वपूर्ण है, जबकि एक्सरसाइज करने वालों के लिए आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट सही समय पर उपयोगी हो सकते हैं।
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