S-400 ने 350 किमी दूर पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को बनाया निशाना, ऑपरेशन सिंदूर में सामने आई लंबी दूरी की क्षमता, जानिए नई रिपोर्ट में क्या हुए खुलासे...
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने करीब 350 किलोमीटर दूर हवाई लक्ष्य को निशाना बनाया था। रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में इसे ऑपरेशन की सबसे लंबी दूरी की एंगेजमेंट बताया गया है। जानिए S-400 ने कैसे काम किया, IACCS की क्या भूमिका रही और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के एयर डिफेंस नेटवर्क ने पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों का कैसे मुकाबला किया।
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के अंदर करीब 350 किलोमीटर दूर एक हवाई लक्ष्य को निशाना बनाया था। रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह ऑपरेशन की सबसे लंबी दूरी की एंगेजमेंट थी। जिस लक्ष्य को निशाना बनाया गया, उसे एयरबोर्न अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म बताया गया है। इसका काम हवा में मौजूद खतरों और लक्ष्यों की निगरानी कर सैन्य अभियानों को जानकारी देना होता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइलों के जरिए भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस व्यवस्था ने इन खतरों का मुकाबला किया।
350 किलोमीटर दूर तक पहुंची S-400 की मारक क्षमता
रक्षा मंत्रालय की 2026 की आधिकारिक प्रस्तुति में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 की सबसे लंबी दूरी की एंगेजमेंट 350 किलोमीटर बताई गई है। इसमें एक दुश्मन के एयरबोर्न अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म को निष्क्रिय किए जाने का उल्लेख है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि एयरबोर्न अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म किसी सामान्य विमान की तरह सिर्फ उड़ान भरने वाला विमान नहीं होता। ऐसे प्लेटफॉर्म हवा से बड़े इलाके की निगरानी करते हैं और दूसरे सैन्य विमानों तथा एयर डिफेंस सिस्टम को जरूरी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
S-400 ने संभाली एयर डिफेंस की अहम भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय एयर डिफेंस मेंकई तरह के सिस्टम को एक साथ इस्तेमाल किया गया। इनमें S-400 जैसे लंबी दूरी के सिस्टम के अलावा स्वदेशी आकाश और पुराने लेकिन युद्ध में इस्तेमाल हो चुके एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल थे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और अन्य हवाई खतरों के जरिए भारत के कई इलाकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। इन खतरों से निपटने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम और काउंटर-यूएएस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय एयर डिफेंस की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा था कि पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के साथ आकाश और S-400 जैसे आधुनिक सिस्टम ने भारत की सुरक्षा को मजबूत किया।
IACCS ने जोड़ी रडार और एयर डिफेंस की जानकारी
ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ मिसाइल सिस्टम ही महत्वपूर्ण नहीं था। भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम ने भी हवाई सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। IACCS का काम अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को एक नेटवर्क में जोड़ना और हवाई खतरों की पहचान में मदद करना है। इससे सैन्य विमानों, ड्रोन और अन्य हवाई लक्ष्यों की निगरानी और प्रतिक्रिया के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क ने कई स्तरों पर काम किया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसमें काउंटर-यूएएस सिस्टम, शॉर्ट और मीडियम रेंज एयर डिफेंस तथा आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे।
पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से भारत के कई सैन्य ठिकानों और दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 7 और 8 मई 2025 की रात पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब और राजस्थान तक कई इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की। भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क ने इन खतरों को ट्रैक कर उन्हें निष्क्रिय किया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान की तरफ मौजूद एयर डिफेंस रडार और सिस्टम को भी निशाना बनाया। मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में लाहौर के एक एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय किए जाने का उल्लेख है।
ऑपरेशन सिंदूर में सामने आई एयर डिफेंस की नई तस्वीर
ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय एयर डिफेंस की उस क्षमता को सामने रखा, जिसमें अलग-अलग सिस्टम एक साथ काम करते हैं। एक तरफ S-400 जैसे लंबी दूरी के सिस्टम हैं, तो दूसरी तरफ आकाश और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम कम और मध्यम दूरी के खतरों से निपटने के लिए तैनात हैं। रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक प्रस्तुति में S-400 की 350 किलोमीटर की एंगेजमेंट को ऑपरेशन सिंदूर की सबसे लंबी दूरी की कार्रवाई बताया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय एयर डिफेंस सिर्फ सीमा के करीब आने वाले खतरों का इंतजार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि काफी दूर मौजूद हवाई लक्ष्यों को भी ट्रैक और एंगेज करने की क्षमता रखता है।
क्या है S-400 सिस्टम?
S-400 रूस में विकसित लंबी दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे अलग-अलग तरह के हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी खासियत इसका लंबी दूरी का रडार और अलग-अलग प्रकार के इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम हैं। यही वजह है कि इसे भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के एयर डिफेंस नेटवर्क में S-400 की भूमिका और ज्यादा चर्चा में आई है। सरकार की आधिकारिक प्रस्तुतियों में भी इसे ऑपरेशन के दौरान भारत की एयर डिफेंस क्षमता के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर रेखांकित किया गया है। ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की करीब 350 किलोमीटर की एंगेजमेंट अब भारतीय एयर डिफेंस की लंबी दूरी की क्षमता के सबसे अहम उदाहरणों में गिनी जा रही है। खास बात यह है कि यह क्षमता अकेले किसी एक सिस्टम की नहीं, बल्कि रडार, कमांड नेटवर्क और अलग-अलग एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म के एक साथ काम करने की तस्वीर सामने रखती है।
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