सपा नेता के घर पहुंचे संजय निषाद, हाथ में बुके और सामने 2027 का चुनाव, क्या बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं मंत्री?

योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद की सपा नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात ने यूपी की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन 2027 चुनाव, निषाद आरक्षण, बीजेपी पर दबाव और संजय निषाद के पुराने सपा कनेक्शन को देखते हुए इस मुलाकात के राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं।

Sep 15, 2026 - 15:33
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सपा नेता के घर पहुंचे संजय निषाद, हाथ में बुके और सामने 2027 का चुनाव, क्या बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं मंत्री?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले छोटी सी मुलाकात भी बड़े राजनीतिक संकेत में बदल जाती है। अब एक तस्वीर ने ऐसी ही चर्चा को हवा दे दी है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मिलने उनके घर पहुंचे। हाथ में बुके था, मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया और वजह बताई गई माता प्रसाद पांडेय का हालचाल लेना। लेकिन तस्वीर सामने आते ही सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या 2027 के चुनाव से पहले संजय निषाद अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए नए विकल्पों का संकेत दे रहे हैं? फिलहाल संजय निषाद ने किसी तरह के राजनीतिक गठबंधन या पाला बदलने की अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है कि माता प्रसाद पांडेय की तबीयत ठीक नहीं थी और इसी वजह से वह उनसे मिलने पहुंचे थे। बातचीत में निषाद आरक्षण का मुद्दा जरूर आया, लेकिन किसी राजनीतिक गठबंधन को लेकर चर्चा नहीं हुई। ऐसे में सिर्फ इस मुलाकात के आधार पर संजय निषाद के बीजेपी से अलग होने की बात कहना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस मुलाकात का समय इसे सामान्य शिष्टाचार से कहीं ज्यादा चर्चा में ला रहा है।

तस्वीर से ज्यादा महत्वपूर्ण है मुलाकात का समय
संजय निषाद जिस समय माता प्रसाद पांडेय से मिलने पहुंचे हैं, वह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का दौर है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच आने वाले चुनाव को लेकर सीटों, हिस्सेदारी और राजनीतिक समीकरणों पर मंथन होना है। ऐसे समय में सत्ताधारी गठबंधन का एक प्रमुख सहयोगी दल विपक्ष के वरिष्ठ नेता से मुलाकात करता है, तो राजनीति में उसके मायने तलाशे जाना स्वाभाविक है। संजय निषाद लगातार निषाद समाज के आरक्षण और राजनीतिक हिस्सेदारी का मुद्दा उठाते रहे हैं। कई मौकों पर उन्होंने अपनी ही सरकार को चेताया है कि अगर समाज की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात को कुछ लोग बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं।

अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ चुके हैं संजय निषाद
संजय निषाद के हालिया राजनीतिक रुख को समझें तो यह तस्वीर और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। गोंडा में निषाद समाज से जुड़े विनोद साहनी की हत्या के मामले में संजय निषाद अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। मामले में बाद में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई। लेकिन राजनीतिक तौर पर इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा संदेश दिया। संदेश यह कि सरकार में मंत्री होने के बावजूद संजय निषाद अपने समाज से जुड़े मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इससे पहले भी वह निषाद आरक्षण के मुद्दे पर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वह बीजेपी के साथ हैं, लेकिन अपने समाज के अधिकारों के मुद्दे पर समझौता नहीं करेंगे। यहां तक कि मंत्री पद जाने की स्थिति में भी समाज के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने की बात कह चुके हैं। यानी संजय निषाद एक तरफ एनडीए के साथ खड़े हैं और दूसरी तरफ अपनी मांगों को लेकर बीजेपी नेतृत्व पर लगातार दबाव भी बनाते रहे हैं।

सपा से संजय निषाद का पुराना राजनीतिक रिश्ता
अब इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सामने आता है। संजय निषाद और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक रिश्ता आज से नहीं है। 2018 के गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में निषाद पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। उस चुनाव में संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद राजनीतिक समीकरण बदले और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी बीजेपी के साथ आ गई। इसके बाद से संजय निषाद एनडीए का हिस्सा हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी निषाद पार्टी ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। इसलिए संजय निषाद की राजनीति में बीजेपी और सपा दोनों के साथ गठबंधन का इतिहास मौजूद है। यही पुराना रिश्ता अब माता प्रसाद पांडेय से उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से ज्यादा महत्वपूर्ण बना रहा है।

2027 में निषाद वोट क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में निषाद समुदाय को एक महत्वपूर्ण ओबीसी वोट समूह माना जाता है। निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, मांझी, कश्यप, धीवर और कहार जैसी जातियों की मौजूदगी प्रदेश के कई हिस्सों में है। खासकर पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में यह सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों की दिलचस्पी बढ़ना स्वाभाविक है। बीजेपी के लिए संजय निषाद का साथ सिर्फ एक सहयोगी दल का साथ नहीं है। इसके पीछे निषाद समाज के बीच राजनीतिक पहुंच और वोटों का गणित जुड़ा हुआ है। वहीं समाजवादी पार्टी लगातार पीडीए के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में निषाद समुदाय को अपने साथ लाना सपा की रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

क्या संजय निषाद बीजेपी को कोई संदेश दे रहे हैं?
यही इस पूरी तस्वीर का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं है कि संजय निषाद बीजेपी छोड़ने जा रहे हैं। खुद संजय निषाद भी बीजेपी के साथ होने की बात कहते रहे हैं और माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात को उन्होंने शिष्टाचार भेंट बताया है। लेकिन राजनीति में सहयोगी दल कई बार अपने तेवरों के जरिए भी संदेश देते हैं। आरक्षण का मुद्दा उठाना, अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठना, समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी की बात करना और अब विपक्ष के वरिष्ठ नेता से मुलाकात करना, इन घटनाओं को एक साथ रखकर देखें तो संजय निषाद की राजनीति में दबाव बनाने वाला पक्ष जरूर दिखाई देता है। हो सकता है कि यह मुलाकात वास्तव में सिर्फ हालचाल लेने तक सीमित रही हो। लेकिन यह भी संभव है कि संजय निषाद 2027 से पहले बीजेपी नेतृत्व को यह संदेश देना चाहते हों कि निषाद पार्टी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पाला बदलने से पहले राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश?
संजय निषाद के मामले में फिलहाल पाला बदलने की बात करना जल्दबाजी होगी। लेकिन अगर बीजेपी और निषाद पार्टी के बीच आने वाले समय में सीटों, आरक्षण और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर खींचतान बढ़ती है, तो विपक्ष के साथ उनके पुराने रिश्ते और मौजूदा संपर्क राजनीतिक चर्चा को और हवा दे सकते हैं। संजय निषाद की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा अपने समाज के अधिकारों और राजनीतिक हिस्सेदारी के इर्द-गिर्द रहा है। इसलिए उनके लिए 2027 का चुनाव सिर्फ बीजेपी के साथ रहने या अलग होने का सवाल नहीं होगा, बल्कि यह भी अहम होगा कि गठबंधन में उनकी पार्टी को कितनी राजनीतिक जगह मिलती है और निषाद समाज की मांगों पर सरकार कितना आगे बढ़ती है। फिलहाल तस्वीर में एक तरफ संजय निषाद हैं, हाथ में बुके है और सामने सपा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय हैं। मुलाकात को शिष्टाचार बताया गया है, लेकिन 2027 के चुनावी मौसम में ऐसी तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं रहतीं। अब देखना यह है कि यह मुलाकात सिर्फ हालचाल तक रहती है या आने वाले महीनों में यूपी की राजनीति में इसका कोई बड़ा असर दिखाई देता है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content