अंग्रेजी के कठिन कानूनी शब्दों से मिलेगी राहत, अब सुनकर भी समझ सकेंगे सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हिंदी दिवस पर जन सूचना सेवा ने की घोषणा

सुप्रीम कोर्ट हिंदी दिवस पर जल्द जन सूचना सेवा शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों का सार आसान हिंदी में ऑडियो और वीडियो बुलेटिन के जरिए बताया जाएगा। जानिए इस नई सेवा से आम लोगों, वकीलों और दिव्यांगजनों को क्या फायदा होगा और क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले अब तक हिंदी में उपलब्ध नहीं थे।

Sep 14, 2026 - 13:54
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अंग्रेजी के कठिन कानूनी शब्दों से मिलेगी राहत, अब सुनकर भी समझ सकेंगे सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हिंदी दिवस पर जन सूचना सेवा ने की घोषणा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जटिल कानूनी फैसलों को समझना अब आम लोगों के लिए पहले के मुकाबले आसान हो सकता है। हिंदी दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द जन सूचना सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इस सेवा के तहत कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों का सार आसान हिंदी में ऑडियो और वीडियो बुलेटिन के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों के लिए अदालतों के फैसलों में इस्तेमाल होने वाली कानूनी भाषा समझना मुश्किल होता है, उन्हें अब पूरे फैसले को पढ़कर उसका अर्थ निकालने की जरूरत नहीं होगी। वे छोटे ऑडियो और वीडियो बुलेटिन के जरिए फैसले की मुख्य बातें समझ सकेंगे। इस पहल की शुरुआत हिंदी से होगी। इसके बाद इसे दूसरी भारतीय भाषाओं में भी विस्तार देने की योजना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था में दिव्यांगजनों के लिए न्यायिक जानकारी को ज्यादा सुलभ बनाने पर भी जोर दिया है।

फैसले को आसान भाषा में समझाया जाएगा
सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के हिंदी संस्करण पहले से उपलब्ध हैं। कोर्ट की वेबसाइट पर भी हिंदी में सामग्री मौजूद है। ऐसे में जन सूचना सेवा का मकसद सिर्फ अंग्रेजी फैसलों का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराना नहीं है। इस नई व्यवस्था में महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों की मुख्य बात को आसान और बोलचाल की हिंदी में समझाने की कोशिश होगी। इसके लिए छोटे ऑडियो और वीडियो बुलेटिन तैयार किए जाएंगे। इससे आम व्यक्ति को यह समझने में मदद मिलेगी कि कोर्ट ने क्या फैसला दिया, फैसले की अहम बात क्या है और उसका आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की भाषा अभी भी अंग्रेजी
इस पहल के बाद यह सवाल भी उठता है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले अब तक हिंदी में उपलब्ध नहीं होते थे। इसका जवाब है कि ऐसा नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 348 के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कार्यवाही की भाषा अंग्रेजी है। अदालतों के आधिकारिक फैसलों और आदेशों के लिए भी अंग्रेजी की व्यवस्था लागू है। हालांकि, आम लोगों तक न्यायिक जानकारी पहुंचाने के लिए फैसलों के भारतीय भाषाओं में अनुवाद और दूसरी सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई जाती रही हैं। जन सूचना सेवा इसी व्यवस्था को एक कदम आगे ले जाने की कोशिश है, जिसमें अनुवाद के साथ-साथ ऑडियो और वीडियो माध्यम का इस्तेमाल किया जाएगा।

आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
अदालतों के फैसले आमतौर पर कानूनी शब्दावली और जटिल भाषा में लिखे जाते हैं। कई बार फैसला पढ़ने के बाद भी सामान्य व्यक्ति के लिए यह समझना आसान नहीं होता कि अदालत ने वास्तव में कहा क्या है। यही वह जगह है जहां जन सूचना सेवा अहम हो सकती है। आसान हिंदी में तैयार किए गए छोटे बुलेटिन लोगों को फैसले की मुख्य बात जल्दी समझने में मदद कर सकते हैं। खासकर उन लोगों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है जो कानूनी अंग्रेजी से परिचित नहीं हैं या जिनके लिए लंबे न्यायिक आदेश पढ़ना मुश्किल होता है।

दिव्यांगजनों के लिए भी आसान होगी न्यायिक जानकारी
सुप्रीम कोर्ट की इस पहल में दिव्यांगजनों तक न्यायिक जानकारी की आसान पहुंच को भी महत्व दिया गया है। ऑडियो और वीडियो माध्यम के जरिए फैसलों की जानकारी ज्यादा सुलभ बनाने की कोशिश की जाएगी। इसका फायदा केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा। वकीलों, कानून के विद्यार्थियों और उन लोगों को भी इससे मदद मिल सकती है, जिन्हें न्यायिक अंग्रेजी समझने में परेशानी होती है।

हिंदी के बाद दूसरी भारतीय भाषाओं में विस्तार
जन सूचना सेवा की शुरुआत हिंदी से किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराने की योजना है। अगर यह व्यवस्था कई भारतीय भाषाओं में लागू होती है, तो अलग-अलग राज्यों के लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों को समझना ज्यादा आसान हो सकता है। इससे न्यायिक जानकारी की पहुंच भाषा की सीमा से बाहर ले जाने में मदद मिल सकती है।

भारतीय भाषाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले से कर रहा है काम
सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपने फैसलों के हिंदी समेत दूसरी भारतीय भाषाओं में संस्करण उपलब्ध कराने की दिशा में काम करता रहा है। इसलिए जन सूचना सेवा को भारतीय भाषाओं में न्यायिक जानकारी उपलब्ध कराने की उसी प्रक्रिया का विस्तार माना जा सकता है। फर्क यह होगा कि अब फोकस सिर्फ फैसले को दूसरी भाषा में उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा। आसान भाषा, ऑडियो और वीडियो जैसे माध्यमों के जरिए न्यायिक फैसलों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी। यानी आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का कोई महत्वपूर्ण फैसला सामने आने पर लोगों के पास उसे समझने का एक और आसान तरीका हो सकता है। लंबा कानूनी आदेश पढ़ने के बजाय लोग उसके सरल सार को सुन और देखकर भी समझ सकेंगे।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content