घर ला रहे हैं गणपति बप्पा तो स्थापना से पहले जान लें ये वास्तु नियम, दिशा से लेकर मूर्ति की मुद्रा तक रखें ध्यान, नहीं तो पड़ सकता है बुरा असर
गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति बप्पा की स्थापना करने जा रहे हैं तो मूर्ति रखने की दिशा और स्थान का विशेष ध्यान रखें। वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को गणपति स्थापना के लिए शुभ माना जाता है। जानिए बप्पा की मूर्ति कैसी होनी चाहिए, पूजा करते समय मुख किस दिशा में रखें, मूर्ति को किन जगहों पर नहीं रखना चाहिए और स्थापना के दौरान किन वास्तु नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
गणेश चतुर्थी के मौके पर घर में गणपति बप्पा को विराजमान करने की तैयारी शुरू हो गई है। कई परिवार इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की स्थापना करते हैं और गणेश उत्सव के दौरान उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र में गणपति की मूर्ति स्थापित करने की दिशा और स्थान को लेकर कुछ खास मान्यताएं बताई गई हैं। वास्तु के अनुसार, घर में गणपति की स्थापना सिर्फ पूजा की एक रस्म नहीं है, बल्कि मूर्ति रखते समय दिशा और स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि सही दिशा में गणेश जी की स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। ऐसे में अगर आप भी इस गणेश चतुर्थी पर बप्पा को घर ला रहे हैं तो स्थापना से पहले इन बातों का ध्यान रख सकते हैं।
ईशान कोण में गणपति की स्थापना मानी जाती है शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती है। मूर्ति की स्थापना करते समय इस बात का भी ध्यान रखने की सलाह दी जाती है कि पूजा करते समय व्यक्ति का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रहे। गणपति की मूर्ति को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए, जहां नियमित रूप से उनकी पूजा की जा सके और आसपास का वातावरण साफ-सुथरा रहे।
बाथरूम की दीवार से सटाकर न रखें मूर्ति
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, गणपति की मूर्ति रखते समय उसके आसपास की जगह का भी ध्यान रखना चाहिए। जिस दीवार के सहारे मूर्ति स्थापित की जा रही है, वह बाथरूम की साझा दीवार नहीं होनी चाहिए। इसी तरह घर की सीढ़ियों के ठीक नीचे गणपति की स्थापना करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। पूजा के लिए ऐसी जगह चुनना बेहतर माना जाता है जहां बप्पा को सम्मानजनक और साफ स्थान मिल सके।
जमीन पर सीधे न रखें बप्पा की मूर्ति
गणपति की मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय उनके लिए पहले एक ऊंचा और साफ स्थान तैयार करने की सलाह दी जाती है। इसके लिए लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाया जा सकता है। इसके बाद चौकी पर गणपति जी की मूर्ति स्थापित की जाती है। वास्तु मान्यता के अनुसार, मूर्ति को दीवार से बिल्कुल सटाकर रखने के बजाय करीब एक इंच का अंतर रखना चाहिए।
कैसी होनी चाहिए गणपति जी की मूर्ति?
गणेश जी की मूर्ति की मुद्रा को लेकर भी वास्तु और धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर में स्थापना के लिए गणपति जी की ललितासन यानी सुखासन में विराजमान मूर्ति को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस मुद्रा में गणपति स्थिरता और संतुलन का प्रतीक माने जाते हैं। मूर्ति में मूषक और मोदक का होना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोदक को खुशी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है, जबकि मूषक को इच्छाओं और मन की चंचलता पर नियंत्रण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
बप्पा की पीठ की तरफ भी रखें ध्यान
गणपति की स्थापना के दौरान उनकी मूर्ति किस तरफ है, इसके साथ ही उनकी पीठ किस दिशा में है, इस बात का भी ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु के अनुसार, गणपति जी का मुख घर के केंद्र की ओर खुला होना चाहिए। उनकी पीठ कमरे के मुख्य हिस्से या प्रवेश द्वार की तरफ नहीं होनी चाहिए। मान्यता है कि गणेश जी के मुख की ओर शुभता और सकारात्मकता से जुड़ी मान्यताएं हैं, इसलिए स्थापना के समय मूर्ति की दिशा को विशेष महत्व दिया जाता है।
स्थापना की जगह साफ और व्यवस्थित रखें
गणेश चतुर्थी पर बप्पा को घर लाने के बाद उनकी स्थापना के स्थान की साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। पूजा की जगह पर अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए और नियमित रूप से उस स्थान की सफाई करनी चाहिए। गणपति की स्थापना के लिए ऐसी जगह चुनना बेहतर माना जाता है जहां परिवार के लोग आसानी से पूजा कर सकें। साथ ही मूर्ति को ऐसे स्थान पर रखने से बचना चाहिए जहां आने-जाने में बार-बार परेशानी हो या पूजा के दौरान व्यवधान पैदा हो।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
