महाकाल की नगरी में हनुमान प्रतिमा को हटाने की कोशिश नाकाम, चार दिन के बाद भी प्रशासन खाली हाथ, 170 साल पुराने इस मंदिर की क्या है सच्चाई...

उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का ढांचा तो हटा दिया गया, लेकिन सती गेट पर स्थापित करीब 8 फीट ऊंची खड़े हनुमानजी की प्रतिमा चार कोशिशों के बाद भी अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रशासन और पुरातत्व विभाग प्रतिमा की नींव और उम्र की जांच करेगा। स्थानीय मान्यता इसे करीब 170 साल पुराना मंदिर बताती है, जबकि कुछ दावे इसे परमार वंश और राजा भोज के समय से जोड़ते हैं।

Sep 8, 2026 - 12:41
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महाकाल की नगरी में हनुमान प्रतिमा को हटाने की कोशिश नाकाम, चार दिन के बाद भी प्रशासन खाली हाथ, 170 साल पुराने इस मंदिर की क्या है सच्चाई...

उज्जैन। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को लेकर उज्जैन में बड़े स्तर पर निर्माण और सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी काम के बीच शहर के सती गेट पर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं तक का ध्यान खींच लिया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का ढांचा तो हटा दिया गया, लेकिन मंदिर में स्थापित करीब 8 फीट ऊंची खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को हटाने की कोशिश चार बार नाकाम हो चुकी है। मशीनों और दूसरे प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने में जल्दबाजी के बजाय उसकी संरचना और नींव की जांच कराने का फैसला किया है। भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम भी मामले से जुड़ गई है। वहीं, श्रद्धालु इसे भगवान का चमत्कार और अपनी जगह न छोड़ने का संकेत मान रहे हैं।

सिंहस्थ की तैयारियों के बीच क्यों आया मंदिर हटाने का मामला
सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए उज्जैन में कई सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी मार्ग पर मदनलाल शर्मा मार्ग, नई पैठ और छत्री चौक के सती गेट के पास खड़े हनुमानजी का मंदिर स्थित था। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह मंदिर करीब 170 साल पुराना है और इसका संबंध 1857 के दौर से बताया जाता है। सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत नगर निगम ने मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्णय लिया। 4 और 5 सितंबर को मंदिर के ढांचे को हटाने का काम शुरू हुआ। मंदिर का अधिकांश ढांचा ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन जब बारी हनुमानजी की प्रतिमा को हटाने की आई तो मामला अटक गया।

चार दिन, चार कोशिशें... लेकिन प्रतिमा नहीं हिली
प्रशासन ने प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए मशीनों की मदद ली। हाइड्रोलिक मशीन से भी इसे खिसकाने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। चार दिनों में चार बार प्रतिमा को अपनी जगह से हटाने की कोशिश की गई। हर बार प्रयास विफल रहा। मंदिर का ढांचा हट चुका है, लेकिन प्रतिमा आज भी उसी स्थान पर खड़ी है। प्रतिमा की सुरक्षा के लिए फिलहाल उसके ऊपर कैनोपी टेंट लगाया गया है। इस घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं सामने आने लगीं। कई भक्तों का कहना है कि हनुमानजी स्वयं अपना स्थान छोड़ना नहीं चाहते। वहीं प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चिंता प्रतिमा को बिना किसी नुकसान के हटाना है।

जमीन के अंदर क्या है, यही बना सबसे बड़ा सवाल
प्रतिमा के नहीं हिलने के बाद प्रशासन को अंदाजा हुआ कि मामला सिर्फ भारी वजन का नहीं हो सकता। प्रतिमा जमीन के ऊपर करीब 8 फीट दिखाई देती है, लेकिन उसके नीचे नींव कितनी गहरी है, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं है। पुजारियों के अनुसार, नगर निगम के विशेषज्ञों ने प्रतिमा के आसपास करीब डेढ़ फीट तक खुदाई करके उसकी नींव का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन इससे भी पूरी संरचना की जानकारी नहीं मिल सकी। आशंका यह भी है कि प्रतिमा एक ही बड़े पत्थर को तराशकर बनाई गई हो सकती है। ऐसे में उसे सीधे खींचने या जोर लगाकर हटाने से प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। यही वजह है कि अब प्रशासन प्रतिमा को हटाने से पहले उसकी संरचना और जमीन के नीचे की स्थिति को समझना चाहता है।

अब ग्राउंड स्कैनिंग से पता चलेगा प्रतिमा का राज
प्रशासन और पुरातत्व विभाग की टीम अब ग्राउंड स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य जमीन के अंदर प्रतिमा की नींव और उसके आसपास की संरचना का पता लगाना है। जांच के बाद ही यह तय किया जाएगा कि प्रतिमा को किस तकनीक से और किस तरह सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। फिलहाल प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा करना है, तो दूसरी तरफ प्राचीन मानी जा रही प्रतिमा को किसी भी तरह के नुकसान से बचाना है। 

पुरातत्व विशेषज्ञ ने पत्थर को लेकर बताई अहम बात
विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, यह मूर्ति मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर पर तराशी गई है। उन्होंने बताया कि परमार वंश और राजा भोज के शासनकाल के दौरान भी ऐसे पत्थरों पर कलाकृतियां उकेरने की परंपरा थी। हालांकि प्रतिमा पर चढ़ी सिंदूर की मोटी परत के कारण उसकी मूल बनावट और भाव-भंगिमा सीधे तौर पर स्पष्ट नहीं दिखाई देती। इसी आधार पर प्रतिमा के पुराने होने को लेकर सवाल और दिलचस्प हो गया है।

क्या प्रतिमा 170 साल पुरानी है या इससे भी ज्यादा?
स्थानीय स्तर पर मंदिर को करीब 170 साल पुराना और 1857 के दौर का बताया जाता है। लेकिन अब पुरातत्व विभाग इस दावे की भी जांच कर रहा है। कुछ दावे इस प्रतिमा का संबंध परमार वंश और राजा भोज के शासनकाल से जोड़ते हैं। अगर पुरातात्विक जांच में यह कनेक्शन सही साबित होता है तो प्रतिमा की उम्र करीब 1000 साल तक मानी जा सकती है। हालांकि अभी इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। प्रतिमा की वास्तविक उम्र और इतिहास का पता विशेषज्ञों की जांच के बाद ही चल सकेगा।

मंदिर की सेवा कई पीढ़ियों से एक ही परिवार के पास
खड़े हनुमान मंदिर से स्थानीय लोगों की आस्था लंबे समय से जुड़ी हुई है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश बैरागी का परिवार कई पीढ़ियों से मंदिर की सेवा करता आ रहा है। मंदिर का ढांचा हटने के बाद भी श्रद्धालुओं का प्रतिमा के प्रति जुड़ाव बना हुआ है। फिलहाल प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है और भक्त वहां पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं। एक तरफ प्रशासन इसे सड़क चौड़ीकरण और प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करने की तकनीकी चुनौती के तौर पर देख रहा है। दूसरी तरफ श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल चर्चा में है कि आखिर चार प्रयासों के बाद भी खड़े हनुमान अपनी जगह से क्यों नहीं हिले। 

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content