अखिलेश यादव ने पहना पहले लाल गमछे की जगह नीला, अब 6 दिन बाद छात्रसभा की ड्रेस कोड भी बदली, आखिर इस नए रंग से सपा किसे साध रही?

अखिलेश यादव के गले में लाल गमछे की जगह नीला गमछा और इसके छह दिन बाद समाजवादी छात्रसभा का ड्रेस कोड भी बदल गया। अब छात्रसभा के कार्यकर्ता नीली टी-शर्ट और जींस में नजर आएंगे। सपा के इस बदलाव को दलित वोट बैंक, PDA की राजनीति और युवा यानी Gen-Z कनेक्ट से जोड़कर देखा जा रहा है।

Sep 7, 2026 - 11:01
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अखिलेश यादव ने पहना पहले लाल गमछे की जगह नीला, अब 6 दिन बाद छात्रसभा की ड्रेस कोड भी बदली, आखिर इस नए रंग से सपा किसे साध रही?

लखनऊ। समाजवादी पार्टी की पहचान लंबे समय से लाल टोपी और लाल गमछे से जुड़ी रही है। संसद हो या चुनावी मैदान, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अक्सर इसी रंग में नजर आते हैं। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी लाल गमछा एक तरह की राजनीतिक पहचान बन चुका है। लेकिन अब समाजवादी पार्टी की तस्वीर में एक नया रंग दिखाई देने लगा है और वह है नीला। 31 अगस्त को लखनऊ में सपा के जिला और महानगर अध्यक्षों की बैठक में अखिलेश यादव के गले में लाल की जगह नीला गमछा नजर आया। उनके साथ शिवपाल यादव भी नीले गमछे में दिखाई दिए। इसके छह दिन बाद 6 सितंबर को समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं के लिए भी ड्रेस कोड बदल दिया गया। अब छात्रसभा के सदस्य नीली टी-शर्ट और जींस में नजर आएंगे। पार्टी ने छात्र नेताओं को नई टी-शर्ट भेजनी शुरू कर दी है। इस पर समाजवादी छात्रसभा का लोगो और साइकिल का निशान बना है। इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग 8 सितंबर को होनी है। ऐसे में चुनावी तैयारियों के बीच सपा के इस बदलाव को महज ड्रेस कोड का बदलाव माना जाए या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश है?

31 अगस्त को पहली बार साफ दिखा नीला रंग
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में 31 अगस्त को प्रदेश के 75 जिलों के जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों की बैठक हुई थी। बैठक का मुख्य मुद्दा आगामी चुनाव की तैयारियां था। बैठक में मौजूद ज्यादातर पदाधिकारी लाल गमछे में दिखाई दिए। मंच पर अखिलेश यादव पहुंचे तो उनके गले में लाल की जगह नीला गमछा था। शिवपाल यादव भी नीले गमछे में नजर आए। अखिलेश से जब नीले गमछे को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ये तो बुनकर भाइयों ने हमें बनाकर दिया है, जिससे हम कुछ अलग दिखे। इसके बाद वह हंसने लगे। अखिलेश के इस जवाब के बावजूद पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में नीले रंग को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

छह दिन बाद छात्रसभा का ड्रेस कोड भी बदला 
31 अगस्त के बाद 6 सितंबर को समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं के लिए नया ड्रेस कोड सामने आया। अब तक छात्रसभा के सदस्य मैरून रंग की शर्ट और सफेद पैंट पहनते थे। नए ड्रेस कोड में मैरून शर्ट और सफेद पैंट की जगह नीली टी-शर्ट और जींस होगी। सपा संगठन की ओर से छात्र नेताओं को टी-शर्ट भेजी भी जा रही है। टी-शर्ट पर समाजवादी छात्रसभा का लोगो और साइकिल बनी हुई है। पार्टी की ओर से इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग 8 सितंबर को की जाएगी। समाजवादी छात्रसभा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पार्टी का सबसे सक्रिय छात्र संगठन है। ऐसे में ड्रेस कोड में बदलाव को पार्टी की युवा रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

नीला रंग क्यों महत्वपूर्ण है?
भारतीय राजनीति में नीला रंग लंबे समय से डॉ. भीमराव आंबेडकर, बहुजन राजनीति और दलित अधिकारों की विचारधारा से जोड़ा जाता रहा है। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाता लंबे समय से बहुजन राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रहे हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी की ओर से नीले रंग को ज्यादा प्रमुखता दिए जाने को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब बहुजन समाज पार्टी का राजनीतिक प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है, सपा दलित मतदाताओं के बीच अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

PDA के बाद नीले रंग से नया संदेश? 
अखिलेश यादव पिछले कुछ चुनावों से PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति पर जोर देते रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा ने इसी सामाजिक समीकरण को अपने अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया था। चुनाव परिणामों में सपा को इसका फायदा मिला और पार्टी उत्तर प्रदेश में 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। वहीं भाजपा 33 सीटों पर रह गई। अब विधानसभा चुनाव से पहले सपा एक बार फिर दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में लाल टोपी और लाल गमछे के बीच नीले रंग की मौजूदगी को PDA की राजनीति को दृश्य पहचान देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

बसपा के कमजोर होने से सपा के सामने खुली नई जगह
उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक दलित वोट बैंक का बड़ा हिस्सा बसपा के साथ रहा है। वहीं गैर-जाटव दलित और गैर-यादव पिछड़ा वर्ग भाजपा के मजबूत सामाजिक आधार में शामिल रहे। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस समीकरण में बदलाव देखने को मिला। संविधान और आरक्षण से जुड़े मुद्दों के साथ सपा के PDA अभियान ने दलित और पिछड़े मतदाताओं के एक हिस्से को अपनी ओर खींचा। अब सपा की कोशिश इस समर्थन को विधानसभा चुनाव तक बनाए रखने की है। यही वजह है कि अखिलेश यादव का नीले गमछे में नजर आना और कुछ ही दिनों बाद छात्रसभा का ड्रेस कोड नीला होना पार्टी की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

दूसरी तरफ युवाओं पर भी नजर 
नीले रंग का दूसरा कनेक्शन युवाओं से भी जोड़ा जा रहा है। समाजवादी छात्रसभा का संगठन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सक्रिय है। छात्रसभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इमरान के मुताबिक, संगठन देशभर में छात्रों के बीच अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए बदलाव कर रहा है। उन्होंने कहा कि नीला रंग समानता और बराबरी की निशानी माना जाता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया और डॉ. भीमराव अंबेडकर की सोच की निशानी के तौर पर भी इस रंग को देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संगठन छात्रों का है, इसलिए यूथ की भागीदारी बढ़ाने के लिए जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। हम सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं, दिल्ली और मध्य प्रदेश में भी अच्छा काम कर रहे हैं। यह नया ड्रेस कोड देशभर में फैले पूरे छात्रसभा संगठन के लिए होगा।

नीली टी-शर्ट और जींस से कैंपस में बदलना चाहती है पहचान
मैरून शर्ट और सफेद पैंट की जगह नीली टी-शर्ट और जींस का चुनाव भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में जींस-टीशर्ट युवाओं के रोजमर्रा के पहनावे का हिस्सा है। ऐसे में छात्रसभा का नया ड्रेस कोड संगठन के कार्यकर्ताओं को पारंपरिक राजनीतिक कार्यकर्ता की छवि से अलग दिखाने की कोशिश भी हो सकता है। पार्टी की नजर खासतौर पर पहली बार या हाल के वर्षों में राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए युवा मतदाताओं पर है। यही वर्ग 2027 के विधानसभा चुनाव में चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

लाल पहचान बरकरार, लेकिन नीले रंग की एंट्री ने बढ़ाई चर्चा
फिलहाल सपा ने यह आधिकारिक तौर पर नहीं कहा है कि नीला रंग पार्टी की नई राजनीतिक पहचान बनने जा रहा है। अखिलेश यादव ने भी अपने नीले गमछे को बुनकरों की ओर से दिए गए उपहार से जोड़कर ही जवाब दिया। लेकिन जिस तरह कुछ ही दिनों के अंतराल में पार्टी अध्यक्ष और छात्र संगठन दोनों के स्तर पर नीला रंग सामने आया है, उससे राजनीतिक चर्चा जरूर तेज हो गई है। लाल टोपी और लाल गमछा समाजवादी पार्टी की पुरानी पहचान है। अब उसके साथ नीला रंग जुड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि सपा 2027 से पहले अपनी पहचान में यह बदलाव सिर्फ युवाओं के लिए कर रही है या इसके जरिए दलित राजनीति में भी अपनी दावेदारी को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content