राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CBI जांच की मांग पर तुरंत सुनवाई से किया इनकार, अयोध्या में पैरवी करने वाले वकील पर लगेगा 5 लाख का जुर्माना
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। CBI जांच की मांग वाली याचिका पर कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। उधर पुलिस आरोपियों के बैंक खातों की जांच में जुट गई है, जबकि अयोध्या के वकीलों ने आरोपियों का केस न लड़ने का फैसला लिया है।
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की गूंज अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। मामले में CBI जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई की मांग की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने पूछा कि इस मामले में ऐसी कौन-सी आपात स्थिति है, जिसके कारण तुरंत सुनवाई की जरूरत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छुट्टियां समाप्त होने के बाद नियमानुसार इस याचिका पर विचार किया जाएगा। उधर, जांच एजेंसियों ने भी मामले की तह तक पहुंचने के लिए कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अब आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों की जांच में जुट गई है और बैंक खातों से लेकर लेन-देन तक हर पहलू खंगाला जा रहा है।
जेल में बंद आरोपियों के बैंक खातों की जांच शुरू
सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे पुलिस की टीम अयोध्या धाम स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा पहुंची। यहां जेल में बंद आठ आरोपियों में से सात के बैंक खाते संचालित हैं। पुलिस ने सभी खातों का स्टेटमेंट अपने कब्जे में लिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद आरोपियों के खातों में कितनी रकम जमा हुई, किन स्रोतों से पैसा आया और क्या किसी संदिग्ध लेन-देन के सबूत मिलते हैं। पुलिस का मानना है कि बैंक रिकॉर्ड जांच में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
चंपत राय समेत तीन पदाधिकारियों के बयान दर्ज
मामले की जांच कर रही टीम ने रविवार को मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से भी पूछताछ की। तीनों के बयान दर्ज किए गए। पूछताछ पूरी होने के बाद चंपत राय दिल्ली रवाना हो गए। हालांकि जांच एजेंसियों की नजर अभी भी पूरे घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू पर बनी हुई है।
आज कोर्ट में पेश होंगे आरोपी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को अदालत में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि पुलिस उनसे और पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है। जांच एजेंसियों का फोकस अब यह पता लगाने पर है कि चोरी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
चंदा चोरों की पैरवी करने वाले वकील पर 5 लाख का जुर्माना
मामले ने सोमवार को नया मोड़ तब ले लिया, जब फैजाबाद एडवोकेट्स एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि कोई भी अधिवक्ता इस मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यदि कोई वकील आरोपियों का पक्ष रखता है तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बैठक में चंपत राय, गोपाल राव और डॉ. अनिल मिश्रा से अयोध्या छोड़ने की भी मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
SIT रिपोर्ट के बाद तेज हुई कार्रवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने 23 जून को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। इसके दो दिन बाद ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 26 जून को अदालत ने उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दिया। हालांकि ट्रस्ट ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे पर अंतिम निर्णय 11 जुलाई को होने वाली बैठक में लिया जाएगा।
छापेमारी में मिले दस्तावेज और नकदी
28 जून को पुलिस की आठ टीमों ने आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से निवेश और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज, आभूषण तथा नकदी बरामद की गई। वहीं आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर से एक डायरी भी मिली है। पुलिस का मानना है कि इस डायरी में दर्ज जानकारी से चढ़ावा चोरी के पूरे नेटवर्क और पैसों के लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। अब जांच एजेंसियों की नजर बैंक खातों, बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर है, जिनके आधार पर पूरे मामले की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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