सिद्धार्थनगर में 59 साल पुराने मस्जिद-मदरसे पर चला बुलडोजर, 2 घंटे में ढहा 60 फीसदी हिस्सा, सपा विधायक समेत कार्यकर्ताओं से पुलिस की हुई धक्का-मुक्की
सिद्धार्थनगर के पिपरा रामलाल गांव में 59 साल पुराने मस्जिद-मदरसे पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया। 14 हजार वर्गफीट में बने परिसर के करीब 9 हजार वर्गफीट हिस्से को ढहाया गया। कार्रवाई के दौरान सपा विधायक सैय्यदा खातून और कार्यकर्ताओं की पुलिस से बहस और धक्का-मुक्की हुई।
सिद्धार्थनगर। यूपी के सिद्धार्थनगर में मंगलवार सुबह 59 साल पुराने मस्जिद-मदरसे पर प्रशासन का बुलडोजर चला। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिपरा रामलाल गांव में सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई कार्रवाई दो घंटे तक चली। प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण के करीब 9 हजार वर्गफीट हिस्से को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर सपा विधायक सैय्यदा खातून, सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव समेत 50 से ज्यादा कार्यकर्ता पहुंच गए। सपा नेताओं और पुलिस के बीच कार्रवाई रोकने को लेकर तीखी बहस हुई। मामला बढ़ने पर पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। करीब आधे घंटे तक मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को कार्रवाई वाली जगह से दूर कर दिया। प्रशासन के मुताबिक, करीब 14 हजार वर्गफीट में मस्जिद, मदरसा और दुकानें बनी थीं। इनमें से सरकारी जमीन पर बने करीब 9 हजार वर्गफीट हिस्से को हटाया गया है। कार्रवाई में सात कमरे, एक दुकान, मस्जिद का आधा हिस्सा और मदरसे का आधे से ज्यादा हिस्सा ढहाया गया।
59 साल पहले मेन रोड पर शिफ्ट हुआ था मदरसा
गांव के लोगों के मुताबिक, आरबिया जियाउल उलूम मदरसे की शुरुआत वर्ष 1938 में गांव के अंदर हुई थी। वर्ष 1967 में इसे पिपरा रामलाल गांव की मेन रोड यानी बांसी-डुमरियागंज मार्ग पर शिफ्ट किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, मदरसे का निर्माण शुरुआत में निजी जमीन पर हुआ था। बाद में इसके आसपास की सरकारी जमीन पर धीरे-धीरे निर्माण बढ़ता चला गया। इसी जमीन को लेकर विवाद खड़ा हुआ। मदरसे में करीब 400 बच्चे पढ़ते थे। प्रशासन का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में मदरसे के लिए दर्ज जमीन करीब 5 हजार वर्गफीट है, जबकि बाकी करीब 9 हजार वर्गफीट जमीन सरकारी रिकॉर्ड में खेल के मैदान के रूप में दर्ज है।
2022 में शुरू हुआ था कब्जे का विवाद
सरकारी जमीन से कब्जा हटाने का मामला अचानक नहीं उठा था। वर्ष 2022 में गांव के पांच ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से डुमरियागंज तहसीलदार कोर्ट में जमीन से कब्जा हटाने की याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2023 में बेदखली का आदेश जारी किया गया। मदरसे के केयरटेकर अब्दुल सलाम ने इसी आदेश को डीएम कोर्ट में चुनौती दी। करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद 14 अगस्त 2026 को डीएम ने तहसीलदार कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और मदरसा पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन की ओर से अवैध कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया। प्रशासन के मुताबिक, तय समय सीमा में कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद मंगलवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
6 बुलडोजर और करीब 100 पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचा प्रशासन
कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी कर रखी थी। सुबह करीब 7 बजे डुमरियागंज SDM विवेकानंद मिश्र, डुमरियागंज CO बृजेश वर्मा और बांसी CO सिवेंदु सिंह की मौजूदगी में छह बुलडोजर मौके पर पहुंचे। पांच थानों से करीब 100 पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था। प्रशासन ने पहले सरकारी जमीन पर बने हिस्से को चिन्हित किया और इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। करीब दो घंटे तक चले अभियान में 14 हजार वर्गफीट में बने निर्माण के उस हिस्से को हटाया गया, जिसे प्रशासन सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बता रहा था।
सपा विधायक और कार्यकर्ता पहुंचे तो बढ़ा तनाव
बुलडोजर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद डुमरियागंज की सपा विधायक सैय्यदा खातून, सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव समेत 50 से ज्यादा कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। सपा नेताओं ने कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे रोकने की मांग की और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कार्रवाई वाली जगह पर जाने से रोक दिया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। पुलिस का कहना था कि यह प्रशासनिक कार्रवाई है और सरकारी जमीन से कब्जा हटाया जा रहा है। सपा नेता कमाल अहमद खान ने मदरसे के पास जाने की कोशिश की। डुमरियागंज के प्रभारी निरीक्षक श्री प्रकाश यादव ने उन्हें रोकते हुए जबरदस्ती न करने को कहा। इसी दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हुई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें समझाकर शांत कराया। विधायक सैय्यदा खातून ने भी मौके पर मौजूद सपा नेताओं से शांति बनाए रखने और बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की बात कही।
प्रशासन बोला- निजी जमीन पर बने हिस्से को नहीं छुआ
SDM विवेकानंद मिश्र ने बताया कि करीब दो घंटे की कार्रवाई में सरकारी जमीन पर बने मदरसे के करीब 60 फीसदी हिस्से को तोड़ा गया है। उनके मुताबिक, 14 हजार वर्गफीट में कुल सात दुकानें, 12 कमरे, मस्जिद और मदरसा बना हुआ था। कार्रवाई में सरकारी जमीन पर बने 9 हजार वर्गफीट हिस्से में एक दुकान, सात कमरे, मस्जिद का आधा हिस्सा और मदरसे का हिस्सा गिराया गया। वहीं निजी जमीन पर बने पांच कमरे, मदरसे का आधा हिस्सा और मस्जिद का आधा हिस्सा छोड़ दिया गया है।
400 बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा था मदरसा
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यह भी है कि जिस मदरसे का हिस्सा गिराया गया, वहां करीब 400 बच्चे पढ़ते थे। लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद के बाद अब प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने हिस्से को हटाने की कार्रवाई की है। एक तरफ प्रशासन कोर्ट के आदेश के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात कह रहा है, तो दूसरी तरफ मौके पर पहुंचे सपा नेताओं ने कार्रवाई का विरोध किया। हालांकि, ध्वस्तीकरण के बाद प्रशासन ने सरकारी जमीन वाले हिस्से को खाली करा दिया। 59 साल से मेन रोड पर मौजूद इस मस्जिद-मदरसे की इमारत अब पहले जैसी नहीं रही। करीब दो घंटे की कार्रवाई में उसका बड़ा हिस्सा ढहा दिया गया और पूरे अभियान के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी में इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही।
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