'बिना प्याज-लहसुन की मछली शाकाहारी' मंत्री संजय निषाद का बड़ा बयान, बोले - निषाद लड़ाकू कौम, गद्दार नहीं
संजय निषाद ने गोरखपुर के कार्यक्रम में मछली को लेकर कहा कि बिना प्याज-लहसुन की बनी मछली शाकाहारी है। उन्होंने निषाद समाज को लड़ाकू कौम बताते हुए कहा कि निषाद गद्दार नहीं, वफादारी के पुत्र हैं। जानिए उनके बयान की 4 बड़ी बातें।
गोरखपुर। यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद अपने बयानों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। मंगलवार को गोरखपुर में एक मीडिया चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने निषाद समाज, मछली और उत्तर प्रदेश के राजकीय चिह्न से लेकर राष्ट्रवाद और युवाओं के रोजगार तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में संजय निषाद ने मछली को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि बिना लहसुन-प्याज के बनी मछली शाकाहारी है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के राजकीय चिह्न में मौजूद मछली, तीर-धनुष और जल को निषाद समाज के गौरव से जोड़ा। संजय निषाद ने निषाद समाज को लड़ाकू कौम बताते हुए कहा कि समाज को गरीबी भले मिली हो, लेकिन निषादों ने देश के साथ कभी गद्दारी नहीं की। उन्होंने खुद को वफादारी और राष्ट्रवाद की परंपरा से जोड़ते हुए कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी।
मछली से लेकर निषाद समाज के गौरव तक, संजय निषाद ने क्या कहा?
मंत्री के बयान में एक तरफ निषाद समाज के इतिहास और पहचान की बात थी, तो दूसरी तरफ मौजूदा राजनीति पर भी निशाना साधा गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निषाद समाज के साथ खड़े होने का दावा किया। साथ ही विपक्ष पर नोट और नौकरी चोरी करने का आरोप लगाया। कार्यक्रम में संजय निषाद की कही चार प्रमुख बातें इस तरह रहीं।
1. निषादों को गरीबी मिली, लेकिन गद्दारी का तमगा नहीं
संजय निषाद ने निषाद समाज की पहचान को देश के प्रति वफादारी और राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा कि निषादों ने कभी देश से गद्दारी नहीं की। उन्होंने कहा कि अब हम मांगने वाले थोड़ी हैं, हम लोग देने वाले हैं, पार उतारने वाले हैं। उन्होंने अंग्रेजों और मुगलों को गद्दार बताते हुए कहा कि निषाद समाज ने हमेशा देश के साथ वफादारी से खड़े रहने का काम किया। उनके मुताबिक, निषादों को बदले में गरीबी भले मिली हो, लेकिन वे वफादारी के पुत्र हैं, गद्दार के पुत्र नहीं। संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज आज भी भूमिहीन और झोपड़ी में रहने वाला हो सकता है, लेकिन उसकी पहचान एक मार्शल कौम की है।
2. यूपी के राजकीय चिह्न को राजा गुह्यराज निषाद से जोड़ा
संजय निषाद ने उत्तर प्रदेश के राजकीय चिह्न में मछली और तीर-धनुष की मौजूदगी को निषाद समाज के इतिहास और राजा गुह्यराज निषाद से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को इस बात पर गर्व करना चाहिए कि प्रदेश सरकार के चिह्न में मछली, तीर-धनुष और जल है। उन्होंने इसे राजा गुह्यराज निषाद का चिह्न बताया और कहा कि निषाद समाज को इस पर गर्व है। इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निषाद समाज के साथ खड़े होने की बात कही। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद विधायकों से कहा कि कम से कम उन्हें मिला-जुला कर मछली-वछली खिलाते रहें। इसके बाद संजय निषाद ने मछली को लेकर कहा कि बिना लहसुन-प्याज का जो बनता है, वह शाकाहारी है।
3. लंदन की घटना का जिक्र, ऋषि सुनक बनने को बताया सौभाग्य
संजय निषाद ने अपने लंदन दौरे का किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान वह लंदन गए थे। उनके मुताबिक, कुछ अधिकारी उन्हें वहां जाने से रोकना चाहते थे, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और इसके बाद वह लंदन पहुंचे। उन्होंने बताया कि उस दौरान सांसद रवि किशन भी वहां मौजूद थे। संजय निषाद ने कहा कि रवि किशन ने गाना गाकर लोगों का मनोरंजन किया, लेकिन जब उन्हें माइक मिला तो उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कभी भारत में लंदन दिखता था और करीब 350 साल तक भारत में लंदन दिखाई देता रहा, लेकिन अब लंदन में भारत दिखता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि असली भारतीयता तब होगी, जब ब्रिटेन में भी भारतीय प्रधानमंत्री बने। उन्होंने बताया कि इसके छह महीने बाद ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने और इसे उन्होंने सौभाग्य की बात बताया।
4. वोट चोरी के आरोपों पर बोले- नोट और नौकरी चोरी हुई
संजय निषाद ने विपक्ष की वोट चोरी की राजनीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की नोट और नौकरी चोरी की गई है। उन्होंने कहा कि साइकिल और हाथी वाले क्रमशः 6.5 अरब और 7.5 अरब रुपये ले जा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में हर महीने करीब 28 अरब रुपये वेतन में जाने का भी जिक्र किया। संजय निषाद ने सवाल उठाया कि क्या समाज सिर्फ तनख्वाह देगा और अपने बच्चों का भविष्य नहीं बनाएगा। उन्होंने कहा कि इसी दर्द की वजह से विपक्ष वोट चोरी की बात करता है, जबकि उनके मुताबिक युवाओं की नोट और नौकरी चोरी की गई है। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। इसके बाद उन्होंने निषाद समाज की संख्या और हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया।
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