हरिद्वार में फंदे पर लटका मिला निठारी कांड का आरोपी, 13 मामलों में मिली थी मौत की सजा, 19 साल बाद आया था जेल से बाहर, चाय की दुकान में मिला शव

निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का हरिद्वार में शव मिला। करीब 19 साल जेल में रहने के बाद 2025 में सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी हुआ था। हरिद्वार में नाम बदलकर रह रहा था और चार दिन पहले ही चाय की दुकान शुरू की थी।

Sep 18, 2026 - 14:40
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हरिद्वार में फंदे पर लटका मिला निठारी कांड का आरोपी, 13 मामलों में मिली थी मौत की सजा, 19 साल बाद आया था जेल से बाहर, चाय की दुकान में मिला शव

निठारी कांड का नाम एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शुक्रवार को हरिद्वार में शव मिला। वह पिछले कुछ महीनों से यहां अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और कुछ दिन पहले ही सड़क किनारे चाय की दुकान शुरू की थी। सुबह उसका शव दुकान के अंदर फंदे पर लटका मिला। पुलिस मामले की जांच कर रही है। कोली करीब 19 साल जेल में रहा था। निठारी कांड से जुड़े 13 मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में अदालतों में उसकी दोषसिद्धि पर सवाल उठे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में 12 मामलों में उसे बरी कर दिया। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी। जेल से बाहर आने के बाद उसने हरिद्वार में एक नई पहचान के साथ जिंदगी शुरू की थी।

चार दिन पहले शुरू की चाय की दुकान में मिला शव 
सुरेंद्र कोली कुछ महीनों पहले हरिद्वार पहुंचा था। यहां वह अकेले रह रहा था। अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने अपना नाम सदाराम बताया था। करीब 15 दिन पहले उसने सिडकुल की एक कंपनी में काम भी शुरू किया था। वहां भी लोग उसे इसी नाम से जानते थे। इसके बाद करीब चार दिन पहले उसने सप्तऋषि चौकी क्षेत्र में लाल मंदिर के पास सड़क किनारे एक छोटी दुकान किराए पर ली। यहां वह चाय बेचने लगा था। दुकान के लिए उसने मालिक को कुछ महीनों का एडवांस भी दिया था। स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में कुंभ की तैयारियों को लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है। ऐसे में कोली को दुकान हटने और एडवांस रकम फंसने की चिंता थी। हालांकि उसकी मौत की वास्तविक वजह क्या रही, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

निठारी कांड में कैसे सामने आया था सुरेंद्र कोली का नाम?
साल 2005 और 2006 में नोएडा के निठारी इलाके से कई बच्चे और महिलाएं अचानक गायब होने लगे थे। लगातार गुमशुदगी के मामलों के बीच पुलिस की जांच सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी D-5 तक पहुंची। 29 दिसंबर 2006 को कोठी के पीछे नाले और आसपास के इलाके से मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई। मौके से मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और अन्य सामान बरामद किए गए थे। इसके बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच जनवरी 2007 में CBI को सौंप दी गई।

19 मामलों की जांच, 16 में CBI ने चार्जशीट की थी दाखिल 
निठारी से जुड़े मामलों में पुलिस ने 19 अलग-अलग गुमशुदगी और अपराध से जुड़े FIR दर्ज किए थे। इनमें से 16 मामलों में CBI ने चार्जशीट दाखिल की। इन मामलों में सुरेंद्र कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। सुनवाई के दौरान उसे कई मामलों में दोषी ठहराया गया और निठारी से जुड़े 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई। लेकिन कुछ साल बाद इस मामले की कानूनी तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

19 साल बाद जेल से छूटा था सुरेन्द्र कोली 
सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराने में उसके कथित कबूलनामे और उसकी निशानदेही पर हुई बरामदगी अहम आधार रहे थे। बाद की न्यायिक प्रक्रिया में इन्हीं साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। अदालत ने उसके पुलिस हिरासत में दिए गए कबूलनामे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। कोर्ट के सामने यह भी तथ्य आया कि करीब 60 दिन की पुलिस हिरासत के बाद यह कबूलनामा दर्ज किया गया था। 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इन 12 मामलों में उसके बरी होने के फैसले को बरकरार रखा। 12 मामलों में बरी होने के बाद भी सुरेंद्र कोली के खिलाफ एक मामला लंबित था। इस मामले में भी 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी कर दिया। इस फैसले के बाद करीब 19 साल जेल में बिताने के बाद कोली जेल से बाहर आया। इसके बाद उसने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी और हरिद्वार में अपनी पहचान बदलकर रहने लगा।

हरिद्वार में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश
हरिद्वार में कोली ने पहले एक कंपनी में काम शुरू किया और फिर सड़क किनारे चाय की छोटी दुकान खोल ली। वह सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहा था और आसपास के लोगों को भी उसके अतीत की जानकारी नहीं थी। लेकिन दुकान शुरू करने के कुछ ही दिन बाद उसकी मौत हो गई। शुक्रवार सुबह उसका शव दुकान के अंदर पंखे से लटका मिला। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। उसकी मौत के पीछे क्या वजह रही, दुकान हटने को लेकर कोई दबाव था या कोई दूसरी परिस्थिति, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा। निठारी कांड में करीब दो दशक तक चली कानूनी लड़ाई के बाद जिस व्यक्ति की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा जेल में बीता, उसकी आखिरी कहानी हरिद्वार की एक छोटी सी चाय की दुकान पर खत्म हुई। हालांकि उसकी मौत से जुड़े सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content