2 साल पहले हो चुकी थी मौत, फिर भी पुलिस ने बना दिया आरोपी… कोर्ट में खुली ऐसी पोल कि दरोगा हो गया सस्पेंड
Uttar Pradesh News: मुरादाबाद में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शांतिभंग की कार्रवाई में दो साल पहले मर चुके व्यक्ति का नाम रिपोर्ट में शामिल कर दिया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान मामला उजागर हुआ। एसएसपी ने संबंधित दरोगा को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पाकबड़ा थाना पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई में एक ऐसे व्यक्ति को भी शामिल कर लिया, जिसकी दो वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी। मामला उस समय सामने आया जब अदालत में सुनवाई के दौरान मृत व्यक्ति को पेश होने के लिए पुकारा गया। इसके बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आई और अदालत समेत वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित दरोगा को निलंबित कर दिया है।
अदालत में खुली पुलिस की बड़ी चूक
यह मामला पाकबड़ा थाना क्षेत्र की नई बस्ती, कैलसा रोड का है। यहां दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। विवाद को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई शुरू की। मामले की जांच कर रहे उपनिरीक्षक विनीत कुमार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उन्होंने 28 मार्च 2026 को मौके पर पहुंचकर जांच की, दोनों पक्षों से बातचीत की और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए। रिपोर्ट में पहले पक्ष से दिनेश, उसकी पत्नी पूनम, भाई नरेश और नरेश की पत्नी रज्जो के नाम शामिल किए गए थे। वहीं दूसरे पक्ष से सदन, मंजू, जाह्नवी और साक्षी को नामजद किया गया था। पुलिस ने आशंका जताई थी कि दोनों पक्षों से क्षेत्र की शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सुनवाई के दौरान सामने आया चौंकाने वाला सच
जब मामला एसडीएम कोर्ट पहुंचा तो दिनेश और उसका परिवार अदालत में उपस्थित हुआ। सुनवाई के दौरान अदालत के अर्दली ने जब “नरेश हाजिर हों” की आवाज लगाई, तब नरेश की पत्नी रज्जो और उसके भाई ने बताया कि नरेश की बीमारी के कारण दो वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है। यह सुनकर अदालत में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि जब व्यक्ति की मौत दो साल पहले हो चुकी थी तो उसका नाम पुलिस रिपोर्ट में कैसे शामिल हो गया। इतना ही नहीं, जांच अधिकारी ने उसके बयान दर्ज करने का दावा भी किया था।
विभागीय जांच शुरू
मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा। वहीं मुरादाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने एएसपी अभिनव द्विवेदी की जांच रिपोर्ट के आधार पर उपनिरीक्षक विनीत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि यह केवल लापरवाही थी या फिर जांच के दौरान जानबूझकर तथ्यों की अनदेखी की गई। यह मामला पुलिस की जांच प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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