महिला पहलवान यौन शोषण केस में बृजभूषण शरण सिंह हुए बरी, FIR के 3 साल बाद आया फैसला, बृजभूषण बोले- होइहि सोइ जो राम रचि राखा
महिला पहलवान यौन शोषण मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। करीब तीन साल तक चले इस केस में 127 सुनवाई, 32 गवाह और 1133 दिनों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद फैसला आया। अब महिला पहलवानों ने हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर ली है।
देश के सबसे चर्चित खेल और राजनीतिक मामलों में शामिल महिला पहलवान यौन शोषण केस में सोमवार को बड़ा फैसला आया। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह तथा WFI के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका, जिसके बाद दोनों को सम्मानपूर्वक बरी किया गया। फैसले के समय बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर अदालत में मौजूद थे। अदालत से बाहर निकलने के बाद बृजभूषण ने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि यदि कोई आरोप साबित हो जाएगा तो वह किसी भी सजा के लिए तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि जज ने कहा कि बृजभूषण और विनोद तोमर आप लोगों को बाइज्जत बरी किया जाता है। मैंने पहले कहा था कि अगर कोई आरोप साबित हो जाएगा तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। मेरे लिए खुशी का दिन है। होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
जनवरी 2023 के आंदोलन से शुरू हुई थी पूरी कहानी
यह मामला जनवरी 2023 में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था, जब ओलंपियन विनेश फोगाट, साक्षी मलिक समेत कई महिला पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठीं। पहलवानों ने तत्कालीन WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। आरोप था कि नाबालिग सहित छह महिला पहलवानों ने शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अप्रैल 2023 में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। हालांकि बाद में नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी।
1133 दिनों तक चला मुकदमा, 127 सुनवाई और 32 गवाह
करीब तीन वर्षों तक चले इस मुकदमे में अदालत ने लंबी सुनवाई की। 2 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
मामले के दौरान-
- कुल 1133 दिनों तक न्यायिक प्रक्रिया चली।
- 127 बार सुनवाई हुई।
- 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
- बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे।
- 10 मई 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ।
अदालत से बरी होने के बाद क्या बोले बृजभूषण?
फैसले के बाद जब बृजभूषण अपने आवास पहुंचे तो समर्थकों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी खुद को दोषी नहीं माना। उन्होंने कहा कि वह जूनियर खिलाड़ियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे और संघर्ष से व्यक्ति मजबूत बनता है। बृजभूषण ने दावा किया कि इस मामले से यह साबित हुआ कि ओलंपियन और ओलंपिक पदक विजेता भी अपने स्वार्थ के लिए झूठ बोल सकते हैं।
बेटे करण भूषण ने क्या कहा?
बृजभूषण के सांसद बेटे करण भूषण सिंह ने फेसबुक पर लिखा कि साजिश हुई नाकाम, सत्य की हुई जीत। बाद में संसद परिसर में उन्होंने कहा कि एक समय उनके पिता को फांसी देने तक की मांग की जा रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब वही लोग सामने आकर स्वीकार करेंगे कि उनके पिता के साथ गलत हुआ। वहीं भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि बृजभूषण पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद और राजनीतिक थे। उनके मुताबिक इस विवाद का सबसे बड़ा नुकसान भारतीय कुश्ती को हुआ और यदि यह विवाद नहीं होता तो भारत ओलंपिक में चार और पदक जीत सकता था।
महिला पहलवानों ने कहा- लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई
फैसले के बाद ओलंपियन विनेश फोगाट ने कहा कि एक प्रभावशाली नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए महिला पहलवानों को काफी संघर्ष करना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और प्रभाव के दम पर कई लड़कियों पर दबाव बनाया गया, लेकिन कई महिला पहलवान अदालत में डटी रहीं। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उन्हें निराशा हुई है और उन्होंने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का निर्देश दे दिया है। विनेश ने कहा कि हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है। पहलवान अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं ओलंपियन बजरंग पूनिया ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज के निर्णय से यह साफ हो गया कि पूरी ताकत दूसरी तरफ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गवाह प्रभावित किए गए और कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अदालत ने किस आधार पर बरी किया।
महावीर फोगाट बोले- कोर्ट का फैसला सर्वोपरि
द्रोणाचार्य अवॉर्डी और विनेश फोगाट के ताऊ महावीर फोगाट ने कहा कि अदालत का फैसला सभी के लिए मान्य होता है। उनके मुताबिक सभी पक्षों ने अपनी-अपनी लड़ाई लड़ी, लेकिन अंतिम फैसला अदालत को ही करना था और देश में अदालत से बड़ा कोई नहीं है।
फैसले पर क्या रही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं ?
- अरविंद केजरीवाल- दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बृजभूषण को बरी किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक मामले में सबूत और गवाह मौजूद थे, इसके बावजूद ऐसा फैसला आने से लोगों के मन में कई सवाल खड़े होंगे।
- प्रियंका गांधी- कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार महिला सशक्तीकरण और युवाओं के साथ होने की बात करती है, लेकिन उसके काम उन दावों से मेल नहीं खाते। उनके अनुसार इस मामले ने सरकार की कथनी और करनी के अंतर को सामने ला दिया है।
- शशि थरूर- कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। संभव है कि फैसले के खिलाफ अपील की जाए। उन्होंने कहा कि कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए और पूरी न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने से पहले जल्दबाजी में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
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