इंटरनेट पर AI कंटेंट की बाढ़, पहचानना हुआ मुश्किल, दो दोस्तों के टूल ने मचाया तहलका, एक साल में 44 गुना बढ़े यूजर
इंटरनेट पर एआई से तैयार कंटेंट की बाढ़ के बीच एक ऐसा टूल सामने आया है, जिसने दावा किया है कि वह एआई और इंसानों द्वारा लिखे कंटेंट में 99.99% तक अंतर पहचान सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इस टूल को बनाने वाले दो दोस्त पहले गूगल और टेस्ला जैसी दिग्गज कंपनियों में काम करते थे। आखिर कैसे एक आइडिया ने उन्हें करोड़ों की फंडिंग और लाखों यूजर्स तक पहुंचा दिया?
इंटरनेट पर अब जो कुछ भी पढ़ रहे हैं, क्या वह किसी इंसान ने लिखा है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने? यह सवाल अब सिर्फ टेक एक्सपर्ट्स का नहीं, बल्कि हर इंटरनेट यूजर की चिंता बनता जा रहा है। रिसर्च एजेंसी ग्रेफाइट के मुताबिक, इंटरनेट पर मौजूद करीब आधे ब्लॉग और न्यूज कंटेंट अब AI की मदद से तैयार हो रहे हैं। ऐसे में असली और AI से बने कंटेंट के बीच फर्क करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। इसी चुनौती ने स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के दो दोस्तों को एक ऐसा स्टार्टअप खड़ा करने की प्रेरणा दी, जो आज दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। पैंग्राम नाम का यह AI डिटेक्शन टूल दावा करता है कि वह AI और इंसानों द्वारा लिखे गए कंटेंट के बीच 99.99% तक सटीक पहचान कर सकता है। पिछले एक साल में इसके एक्टिव यूजर्स 44 गुना बढ़े हैं, जबकि कंपनी की कमाई में 35 गुना का उछाल आया है।
OpenAI जहां रुका, वहीं से शुरू हुई नई कहानी
पैंग्राम की शुरुआत स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र मैक्स स्पैरो और ब्रैडली एमी ने की। दोनों की दोस्ती यूनिवर्सिटी की AI लैब में रिसर्च के दौरान हुई थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैक्स ने Google और ब्रैडली ने Tesla में काम किया। दोनों को AI शोधकर्ता आंद्रेज करपथी के साथ भी काम करने का अनुभव मिला। इसी दौरान ChatGPT जैसे जनरेटिव AI टूल्स तेजी से लोकप्रिय हुए और इंटरनेट पर AI से तैयार कंटेंट की बाढ़ आ गई। उस समय टेक इंडस्ट्री में यह माना जाने लगा था कि AI से लिखे कंटेंट की सटीक पहचान करना लगभग नामुमकिन है। OpenAI का टेक्स्ट डिटेक्टर भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाया और उसे बंद करना पड़ा। लेकिन मैक्स और ब्रैडली ने इसे हार नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखा।
डेटा और मॉडल पर किया दांव
दोनों ने बड़े पैमाने पर AI टेक्स्ट का अध्ययन किया और अपने मॉडल को लगातार प्रशिक्षित किया। उनका दावा है कि इसी वजह से पैंग्राम AI और इंसानों के लिखे कंटेंट के बीच बेहद सटीक अंतर कर पाता है। मैक्स खुद को मजाक में "इंटरनेट का स्लॉप जेनिटर" यानी इंटरनेट का कचरा साफ करने वाला कहते हैं। उनका मानना है कि AI के दौर में भरोसेमंद जानकारी की पहचान सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
एक साल में 2,700 से 1.2 लाख यूजर
कंपनी के मुताबिक, पिछले एक साल में पैंग्राम के एक्टिव यूजर्स 2,700 से बढ़कर 1.2 लाख तक पहुंच गए। यानी लगभग 44 गुना की बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान कंपनी की आय में भी 35 गुना का इजाफा हुआ। Quora और Substack जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस तकनीक को अपनाने लगे हैं। स्टार्टअप को सिलिकॉन वैली की वेंचर कैपिटल फर्म मेल्नो वेंचर्स से करीब 75 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है। अब कंपनी ऐसे टूल्स पर काम कर रही है, जो AI से तैयार तस्वीरों और वीडियो की भी पहचान कर सकेंगे।
अभी भी पूरी तरह आसान नहीं है चुनौती
कंपनी मानती है कि जब किसी कंटेंट को इंसान और AI मिलकर तैयार करते हैं, तब पहचान करना अब भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद संस्थापकों का कहना है कि उनकी कोशिश डिजिटल दुनिया में भरोसा बनाए रखने की है, ताकि लोग यह समझ सकें कि जो कंटेंट वे पढ़ रहे हैं, उसके पीछे इंसानी सोच है या फिर केवल एल्गोरिद्म।
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