भतीजे की दबंगई पड़ी भारी… चाचा का मिला ऐसा अंजाम, गोरखपुर हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा
गोरखपुर में भाजपा नेता राजकुमार चौहान की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। रंजिश के चलते दो आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया।
Uttar Pradesh News: गोरखपुर के बरगदवा इलाके में पूर्व पार्षद और भाजपा नेता राजकुमार चौहान की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। मंगलवार की देर रात पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस हत्याकांड को दो डंपर चालकों ने अंजाम दिया था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। हत्या के पीछे पुरानी रंजिश और मारपीट की घटना को वजह बताया गया है। इस खुलासे के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और लोग घटना को लेकर हैरान हैं।
भतीजे से रंजिश बनी हत्या की वजह
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मृतक के भतीजे नितेश और आरोपी राज चौहान उर्फ निरहुआ के बीच पिछले चार महीने से विवाद चल रहा था। दो महीने पहले नितेश ने आरोपी के साथ मारपीट की थी। उस समय राजकुमार चौहान ने अपने भतीजे का समर्थन किया था। इसी बात से आरोपी नाराज था और उसने बदला लेने की ठान ली। आरोपियों ने बताया कि भतीजा अपने चाचा के सहारे दबंगई दिखाता था, जिससे वे काफी परेशान थे।
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
मंगलवार सुबह दोनों आरोपी घटनास्थल के पास एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गए। जैसे ही राजकुमार चौहान टहलते हुए वहां पहुंचे, एक आरोपी ने उन पर फायर कर दिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर चाकुओं से उन पर कई वार किए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सीसीटीवी और जांच से खुला राज
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे करीब 8 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसमें दो संदिग्ध दिखाई दिए, जिनकी पहचान बाद में राज चौहान उर्फ निरहुआ और विपिन यादव के रूप में हुई। सर्विलांस और अन्य सबूतों के आधार पर दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने हत्या की बात कबूल कर ली। हालांकि पुलिस अभी तक हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद नहीं कर पाई है।
अंतिम संस्कार और राजनीतिक जुड़ाव
मृतक का शव पोस्टमार्टम के बाद शाम को घर लाया गया, जहां परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर विरोध जताया। बाद में राज्यसभा सांसद डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल और कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान के समझाने पर परिवार शांत हुआ। देर रात मोहरीपुर घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। राजकुमार चौहान ओबीसी समुदाय से आते थे और 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। वे भाजपा से टिकट की मांग भी कर रहे थे और सांसद के करीबी माने जाते थे।
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