'सबको पढ़ाओ कुरान' लखनऊ में मौलाना अरशद मदनी का बड़ा बयान, सुप्रीम कोर्ट की वकील इंद्रा जय सिंह बोलीं- फिर से सीखना है अजान
लखनऊ में हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस के दौरान मौलाना अरशद मदनी ने कुरान, इस्लाम और भाईचारे को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कुरान कहीं भी कत्ल और नफरत की बात नहीं करता। सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट की वकील इंद्रा जय सिंह ने फिर से अजान सीखने की बात कही।
राजधानी लखनऊ शनिवार को हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द के संदेश का केंद्र बनी, जहां जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से आयोजित हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कुरान और इस्लाम को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि लोगों को कुरान पढ़ने और समझने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को बुलाइए और उन्हें कुरान पढ़ाइए। उन्हें बताइए कि कुरान क्या कहता है। कुरान कहीं भी कत्ल करने और नफरत की बात नहीं करता है। इस्लाम मोहब्बत वाला मजहब है, इसीलिए यह आज पूरी दुनिया में सबसे तेजी से फैल रहा है। मौलाना मदनी ने आगे कहा कि पूरे विश्व के पढ़े-लिखे लोगों ने भी इस्लाम के फैलने के तथ्य को स्वीकार किया है। उनका कहना था कि किसी भी धर्म को समझने का सबसे अच्छा तरीका उसकी मूल शिक्षाओं को पढ़ना और जानना है।
अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में हुआ सम्मेलन
यह सम्मेलन शनिवार सुबह करीब 11 बजे चौक स्थित अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और अलग-अलग समुदायों के लोग शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य समाज में संवाद बढ़ाना और आपसी विश्वास को मजबूत करना बताया गया।
'फिर से सीखना चाहूंगी अजान'
सम्मेलन को संबोधित करने के लिए सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रा जय सिंह को आमंत्रित किया गया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि मैंने बचपन में अजान सीखी थी, लेकिन कोर्ट और पेशेवर जीवन की व्यस्तताओं के बीच उसे भूल गई। अब मैं उसे फिर से सीखना चाहूंगी। उनकी इस टिप्पणी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
जमीयत ने बताया सम्मेलन का उद्देश्य
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेस सचिव फजलुर्रहमान कासमी ने बताया कि सम्मेलन का मकसद देश में आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और एकता को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों में ऐसे संवाद बेहद जरूरी हैं। कासमी ने कहा कि मोहब्बत और भाईचारे से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बढ़ाना समय की जरूरत है।
सम्मेलन से क्या संदेश देने की कोशिश?
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अपने-अपने संबोधन में धार्मिक संवाद, सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान पर जोर दिया। सम्मेलन के केंद्र में यह संदेश रहा कि समाज में मतभेदों के बजाय संवाद और समझ बढ़ाने की आवश्यकता है। इसी क्रम में मौलाना अरशद मदनी ने कुरान की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए लोगों से इसे पढ़ने और समझने की अपील की।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
