फतेहपुर में NHM कर्मचारियों का सीएमओ कार्यालय पर सामूहिक ज्ञापन, बोले- मानदेय से ट्रांसफर तक कई समस्याएं, GRC बैठक न होने पर भी उठाए सवाल
फतेहपुर में NHM संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने CMO को सामूहिक ज्ञापन सौंपा। मानदेय में देरी, कर्मचारियों के ट्रांसफर, GRC बैठक, बीमा राशि, अवकाश और कार्रवाई के मामलों को लेकर उठाए सवाल। जानिए कर्मचारियों ने क्या-क्या मांग की।
फतेहपुर। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने वाले एनएचएम संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारी अब अपनी समस्याओं को लेकर एकजुट हो गए हैं। मानदेय मिलने में देरी से लेकर स्थानांतरण, अवकाश, बीमा राशि और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तक कई मुद्दों को लेकर कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सामूहिक ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार लंबित समस्याओं के कारण उन पर मानसिक दबाव बन रहा है। संगठन ने विभिन्न शासनादेशों का हवाला देते हुए मांग की है कि कर्मचारियों से जुड़े मामलों का समाधान नियमों के अनुसार और जल्द किया जाए।
महीने के पहले सप्ताह में मिले मानदेय
ज्ञापन में सबसे पहले जिले में कार्यरत सभी एनएचएम संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय का मुद्दा उठाया गया। कर्मचारियों ने मांग की कि शासन की मंशा के अनुरूप हर महीने के पहले सप्ताह में मानदेय का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि मानदेय में देरी होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में समय पर भुगतान की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।
तीन कर्मचारियों के ट्रांसफर पर उठे सवाल
ज्ञापन में एनएचएम कर्मचारियों के जनपद स्तर पर किए गए स्थानांतरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने शासनादेश का हवाला देते हुए कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण को निरस्त करने की मांग की है। कर्मचारियों के अनुसार PHC बहुआ की महिला चिकित्सक डॉ. अम्मा श्रीवास्तव, PHC दमापुर के एलटी विशाल मिश्रा और PHC असोथर के आयुष फार्मासिस्ट बुद्धि लाल गुप्ता का स्थानांतरण किया गया है। संगठन ने इन स्थानांतरणों को शासनादेशों के अनुरूप न बताते हुए इन्हें निरस्त करने की मांग की है।
हर महीने होनी थी GRC बैठक, अब तक नहीं हुई
ज्ञापन का एक प्रमुख मुद्दा एनएचएम कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए होने वाली GRC की मासिक बैठक भी रही। कर्मचारियों का आरोप है कि जनपद में कार्यभार ग्रहण करने के बाद से अब तक नियमित रूप से GRC की बैठक नहीं कराई गई है। जबकि शासन स्तर से कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक माह बैठक आयोजित करने के निर्देश हैं। कर्मचारियों ने मांग की है कि GRC की बैठक नियमित रूप से कराई जाए, ताकि छोटी समस्याएं बड़े विवाद का रूप लेने से पहले ही हल हो सकें।
अवकाश और वेतन मामलों में कार्रवाई से कर्मचारियों में भय का माहौल
CHC और PHC में कार्यरत कर्मचारियों के अवकाश और वेतन से जुड़े मामलों को लेकर भी संगठन ने आपत्ति जताई है। ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ मामलों में की जा रही कार्रवाई से कर्मचारियों के बीच भय और मानसिक दबाव का माहौल बन रहा है। संगठन ने मांग की है कि कर्मचारियों के मामलों में उचित और नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मृतक कर्मचारी के आश्रित को नहीं मिली बीमा राशि
ज्ञापन में एनएचएम के एक मृतक कर्मचारी के आश्रित को मिलने वाली बीमा राशि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि बीमा राशि के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बावजूद भुगतान अभी तक लंबित है। संगठन ने मांग की है कि मामले का जल्द निस्तारण करते हुए आश्रित को बीमा राशि उपलब्ध कराई जाए। कर्मचारियों ने CHC और PHC के निरीक्षण के दौरान कार्यालय कर्मचारियों की उपस्थिति और ड्यूटी समय को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाए जाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कार्यालय स्टाफ का ड्यूटी समय लिखित रूप से निर्धारित किया जाए, ताकि कर्मचारियों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे और निरीक्षण के दौरान विवाद की स्थिति पैदा न हो।
मेडिकल लीव और नो-वर्क-नो-पे मामले में मानवीय दृष्टिकोण की मांग
ज्ञापन में एक कर्मचारी के चिकित्सकीय अवकाश और नो-वर्क-नो-पे से जुड़े मामले को भी उठाया गया है। संगठन ने मांग की है कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी है कि किसी कार्यक्रम की प्रगति कम या शून्य पाए जाने पर संविदा कर्मचारियों के खिलाफ सीधे कार्रवाई न की जाए। संगठन का कहना है कि पहले संबंधित कर्मचारी को स्थिति सुधारने के लिए निर्धारित समय दिया जाए। इसके बाद भी सुधार न होने पर शासनादेश और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
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