आयुषी यादव हत्याकांड में मां-बाप को उम्रकैद, बेटी ने की लव मैरिज, पिता ने गुस्से में आकर मारी थी गोली, 4 साल में कोर्ट ने सुनाया फैसला
22 साल की आयुषी यादव ने अपनी पसंद के युवक से चुपचाप लव मैरिज की थी, लेकिन परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। शादी की जानकारी मिलने के बाद घर में विवाद बढ़ता गया और एक दिन गुस्से में पिता ने लाइसेंसी रिवॉल्वर से बेटी को गोली मार दी। हत्या के बाद शव को पॉलिथीन में पैक कर लाल सूटकेस में रखा गया और दिल्ली से करीब 150 किलोमीटर दूर मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पर फेंक दिया गया। इस मामले में मां पर भी शव को ठिकाने लगाने में साथ देने का आरोप लगा। 4 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद मथुरा कोर्ट ने अब दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। आखिर उस दिन घर में क्या हुआ था, पुलिस सूटकेस तक कैसे पहुंची और जांच में कैसे खुला बेटी की हत्या का पूरा राज...
मथुरा। चार साल पहले दिल्ली के एक घर में शुरू हुई एक पारिवारिक कहानी का अंत बुधवार को मथुरा कोर्ट के फैसले के साथ हुआ। 22 साल की इकलौती बेटी आयुषी यादव ने अपनी पसंद से शादी की थी। परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। कुछ दिन बाद घर में विवाद हुआ, पिता ने लाइसेंसी रिवॉल्वर से बेटी को गोली मार दी और मां ने शव को ठिकाने लगाने में साथ दिया। अब मथुरा की अदालत ने आयुषी यादव हत्याकांड में उसके पिता नितेश यादव और मां ब्रजवाला को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस हत्या को अत्यन्त क्रूर और वीभत्स अपराध की श्रेणी में माना और कहा कि दोषियों के प्रति नरम रुख अपनाने का कोई आधार नहीं है। फैसले के दौरान कोर्ट में पिता नितेश यादव ने अपनी सफाई में सिर्फ इतना कहा कि बेटी की हत्या मैंने की थी, पत्नी का दोष नहीं है। इसके बाद वह चुप हो गए। वहीं मां ब्रजवाला सिर झुकाए खड़ी रहीं।
बेटी ने चुपचाप की थी लव मैरिज
आयुषी यादव दिल्ली के बदरपुर इलाके की रहने वाली थी। वह वर्ष 2022 में ग्लोबल कॉलेज से BCA की पढ़ाई कर रही थी। उसने NEET परीक्षा भी पास की थी, लेकिन काउंसिलिंग में शामिल नहीं हुई थी। इसी दौरान आयुषी ने राजस्थान के भरतपुर निवासी छत्रपाल राजपूत से आर्य समाज मंदिर में चुपचाप शादी कर ली। दोनों अलग-अलग जाति से थे और परिवार इस शादी के पक्ष में नहीं था। कुछ दिन बाद आयुषी की शादी की जानकारी परिवार को हो गई। इसके बाद घर में तनाव बढ़ने लगा। 17 नवंबर 2022 को आयुषी और उसकी मां के बीच विवाद हुआ। पिता नितेश यादव को इसकी जानकारी मिली तो वह घर पहुंचे और बेटी को समझाने की कोशिश की। लेकिन बात बढ़ती चली गई। पुलिस पूछताछ में पिता नितेश यादव ने उस रात की पूरी कहानी बताई थी। उनके मुताबिक, वह आयुषी को समझाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन विवाद बढ़ गया। उन्होंने बताया था कि तैश में आकर लाइसेंसी रिवॉल्वर से आयुषी की छाती में दो गोलियां चला दीं। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर गई और उसकी मौत हो गई। पिता ने बाद में पुलिस को बताया था कि बेटी को गोली मारने के बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। वह शव के पास बैठकर रोते रहे। लेकिन इसके बाद परिवार ने हत्या की जानकारी छिपाने और शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। यहीं से इस मामले ने एक और खौफनाक मोड़ ले लिया।
दुकान से पॉलिथीन खरीदी, शव को सूटकेस में पैक किया
बेटी की हत्या के बाद नितेश यादव और उनकी पत्नी ब्रजवाला शव को ठिकाने लगाने में जुट गए। पिता घर के पास की दुकान से पॉलिथीन लेकर आए। इसके बाद आयुषी के शव को पैक कर लाल रंग के एक बड़े सूटकेस में रखा गया। देर रात करीब 3 बजे सूटकेस को कार में रखा गया। इसके बाद दोनों दिल्ली के बदरपुर से मथुरा की ओर निकल पड़े। करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद 18 नवंबर की सुबह करीब 5 बजे वे मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पहुंचे। सुनसान जगह देखकर सूटकेस सड़क किनारे फेंक दिया गया। इसके बाद दोनों वापस दिल्ली लौट गए। कार पिता चला रहे थे और मां आगे की सीट पर बैठी थीं।
सूटकेस मिला तो खुलने लगा हत्या का राज
उसी दिन दोपहर करीब 2 बजे एक राहगीर की नजर सूटकेस पर पड़ी। उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सूटकेस खोला तो उसमें एक युवती का शव मिला। उस वक्त पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव की पहचान करना था। मथुरा पुलिस ने युवती की पहचान के लिए बड़े स्तर पर जांच शुरू की। करीब 100 पुलिसकर्मियों की 14 टीमें लगाई गईं। घटनास्थल से लेकर टोल प्लाजा तक लगभग 300 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसके बावजूद युवती की पहचान नहीं हो सकी। इसके बाद पुलिस ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। इसी दौरान सूचना मिली कि दिल्ली के बदरपुर इलाके की रहने वाली आयुषी यादव पिछले दो दिनों से लापता है। यहीं से जांच की दिशा बदल गई।
मां और भाई ने शव की पहचान
पुलिस की टीम आयुषी के घर पहुंची और उसकी मां ब्रजवाला तथा भाई आयुष को मथुरा पोस्टमॉर्टम हाउस लेकर आई। दोनों ने शव की पहचान आयुषी के रूप में की। शव की पहचान के बाद मां और भाई एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे। उस समय तक मामला एक लापता युवती की मौत का लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो हत्या और शव को ठिकाने लगाने की पूरी कहानी सामने आ गई। आयुषी के प्रेमी ने पुलिस को सूचना दी थी या नहीं, इसे लेकर अलग-अलग चर्चाएं रहीं, लेकिन पुलिस ने कभी आधिकारिक तौर पर इसका खुलासा नहीं किया।
बेटी की हत्या के बाद पिता ने खुद दी थी मुखाग्नि
पुलिस ने जांच के बाद नितेश यादव और ब्रजवाला को गिरफ्तार कर लिया था। परिवार में एक छोटा बेटा होने के कारण पुलिस ने दोनों को बेटी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी। 21 नवंबर 2022 को मथुरा में यमुना किनारे आयुषी का अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस की मौजूदगी में पिता नितेश यादव ने ही अपनी बेटी को मुखाग्नि दी। बताया जाता है कि अंतिम संस्कार के दौरान पिता भावुक हो गए थे। मुखाग्नि देने के बाद उन्होंने बेटी की चिता को प्रणाम करते हुए माफी भी मांगी थी। जिस बेटी को उन्होंने गोली मारकर मौत के घाट उतारा था, उसी बेटी को कुछ दिन बाद उन्होंने खुद अंतिम विदाई दी।
कोर्ट ने कहा- अपराध की क्रूरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
मथुरा कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने गवाहों के बयान और केस से जुड़े सबूत पेश किए। पुलिस ने जांच के बाद नितेश यादव और ब्रजवाला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सरकारी वकील मुकेश गोस्वामी के मुताबिक, कोर्ट ने दोनों के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उन्हें दोषी माना। कोर्ट ने पिता नितेश यादव पर 7 हजार रुपए और मां ब्रजवाला पर 6 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। फैसला सुनाते हुए अदालत ने माना कि बेटी की हत्या का अपराध अत्यन्त क्रूर और वीभत्स की श्रेणी में आता है। ऐसे मामले में दोषियों के प्रति नरम रुख अपनाने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ऐसे अपराध में उचित दंड नहीं दिया गया तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
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