बृजभूषण की बेटी शालिनी का सियासी डेब्यू का संकेत, बोलीं- टिकट मिला तो जरूर लड़ूंगी, परिवारवाद मेरी कमजोरी नहीं ताकत
बृजभूषण सिंह की बेटी शालिनी सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा संकेत दिया है। बुलंदशहर में उन्होंने कहा कि अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चुनाव लड़ने के लिए कहेगा तो वह जरूर चुनाव मैदान में उतरेंगी। शालिनी ने परिवारवाद को कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बताया और कहा कि वह करीब 15 साल से नोएडा में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। राष्ट्र सेविका समिति के तृतीय वर्ष प्रशिक्षण, बिहार और पूर्वांचल से रिश्ते, Gen-Z आंदोलन और राजनीतिक भविष्य को लेकर शालिनी ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर।
बुलंदशहर। भाजपा के पूर्व सांसद और यूपी के चर्चित नेता बृजभूषण सिंह की बेटी शालिनी सिंह ने पहली बार अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर खुलकर संकेत दिए हैं। बुलंदशहर में रविवार को उन्होंने कहा कि अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चुनाव लड़ने के लिए कहता है तो वह चुनाव मैदान में जरूर उतरेंगी। शालिनी सिंह ने बताया कि वह पिछले करीब 15 साल से नोएडा में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनका कहना है कि वह किसी पक्ष या विपक्ष को देखकर नहीं, बल्कि सही मुद्दों पर आवाज उठाने में विश्वास रखती हैं। उनके मुताबिक, किसी नेता की पहचान केवल पद या पार्टी के टिकट से नहीं, बल्कि उसके नेतृत्व से होती है। शालिनी के इस बयान के बाद उनके सक्रिय राजनीति में आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि उन्होंने अभी किसी सीट या चुनाव का नाम नहीं लिया है, लेकिन चुनाव लड़ने को लेकर उनकी स्पष्ट इच्छा ने राजनीतिक हलकों में संभावनाओं को जरूर बढ़ा दिया है।
टिकट मिला तो चुनाव मैदान में उतरने को तैयार
शालिनी सिंह ने कहा कि यदि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहता है तो वह निश्चित रूप से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव का आधार पिछले 15 वर्षों से नोएडा में किया जा रहा सामाजिक काम बताया। उन्होंने कहा कि काम करने के लिए किसी पद का होना जरूरी नहीं है। उनके अनुसार, नेता की पहचान उसके नेतृत्व और लोगों के बीच किए गए काम से होती है। शालिनी ने यह भी बताया कि वह राष्ट्र सेविका समिति से तृतीय वर्ष प्रशिक्षित हैं और हाल ही में नागपुर में अपना तृतीय वर्ष प्रशिक्षण पूरा किया है। उन्होंने कहा कि वह इस विचारधारा से अलग नहीं होना चाहतीं।
परिवारवाद पर बोलीं- राजनीतिक परिवार में होना कमजोरी नहीं
राजनीतिक परिवार से आने वाले नेताओं पर परिवारवाद के आरोप लगते रहे हैं। शालिनी सिंह ने इस सवाल पर कहा कि राजनीतिक परिवार से जुड़े बच्चों पर खुद को साबित करने का दबाव और ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार ने अच्छा काम किया है तो उस परिवार का हिस्सा होना कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है। हालांकि राजनीतिक परिवार से मिलने वाली सुविधाओं के साथ लोगों की अपेक्षाएं भी ज्यादा होती हैं और ऐसे लोगों को अपनी क्षमता साबित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। शालिनी के मुताबिक, उन्होंने बचपन से ही लोगों के बीच बैठकर उनकी जरूरतों को समझना और उनकी समस्याओं पर काम करना सीखा है।
नोएडा में 15 साल से सक्रिय, बोलीं- जगह नहीं काम मायने रखता है
शालिनी सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर किसी एक क्षेत्र तक खुद को सीमित करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि काम करने के लिए जगह मायने नहीं रखती। अगर किसी व्यक्ति में काम करने का जज्बा और क्षमता है तो वह कहीं भी काम कर सकता है। उन्होंने बिहार से अपने रिश्ते का भी जिक्र किया। शालिनी ने कहा कि उनका ताल्लुक बिहार से भी है और वह बिहार की बहू हैं। पूर्वांचल से भी उन्हें काफी प्यार मिलता है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि किसी इलाके में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशना उनका मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि वह काम करने आई हैं और पार्टी को जिस युवा नेतृत्व की जरूरत है, उन्हें लगता है कि वह उस भूमिका में हैं। शालिनी ने कहा कि पार्टी जिस पीढ़ी के अंतर यानी जनरेशनल गैप को महसूस कर रही है, वह उस पीढ़ी के बीच हैं जो युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों को भी समझती है।
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी पर बोलीं- कानून अपना काम करे
जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता पर हमले और आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के सवाल पर भी शालिनी सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और जो लोग आवाज उठा रहे हैं, कानून उनकी बात भी सुन रहा है। उनके मुताबिक, किसी भी मामले में दोनों पक्षों को सुना जाना चाहिए और इसके बाद होने वाली उचित कार्रवाई का सम्मान किया जाना चाहिए।
Gen-Z आंदोलन को लेकर भी रखा अपना पक्ष
Gen-Z आंदोलन पर शालिनी सिंह ने कहा कि इस आंदोलन से युवाओं और राजनीतिक दलों के बीच का अंतर काफी हद तक कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि Gen-Z ने अपनी आवाज प्रभावी तरीके से रखी है। शालिनी के मुताबिक, अगर कोई राजनीतिक पार्टी अपनी नीतियों में बदलाव करती है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर तानाशाही होती तो पार्टी अपने फैसले पर अड़ी रहती, लेकिन पार्टी ने अपना निर्णय बदला और लोगों को समझने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर नैरेटिव बदला है और अब लोग युवाओं की बात सुन रहे हैं।
बृजभूषण परिवार से लेकर बिहार के राजनीतिक परिवार तक रिश्ता
शालिनी सिंह की शादी बिहार के आरा से पूर्व सांसद रहे स्वर्गीय अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के इकलौते बेटे विशाल सिंह से हुई है। विशाल सिंह मूल रूप से आरा के रहने वाले हैं, लेकिन वर्तमान में नोएडा में रहते हैं। वह भी भाजपा से जुड़े हुए हैं। विशाल सिंह राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ यानी NCCF के चेयरमैन हैं। इसके अलावा वह बिहार स्टेट कोआपरेटिव मार्केटिंग यूनियन यानी बिस्कोमान के अध्यक्ष भी हैं। शालिनी और विशाल सिंह का 13 साल का बेटा अथर्व है। शालिनी सिंह की लिखी किताब का नाम बेबाक हूं बेअदब नहीं है।
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