सिंधु नदी पर भारत ने बनाया पहला रॉक चेक डैम, लद्दाख के किसानों को मिलेगा फायदा, पाकिस्तान के लिए बढ़ी मुश्किलें
सिंधु जल संधि को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच लद्दाख के उपशी में सिंधु नदी पर भारत ने पहला रॉक चेक डैम तैयार किया है। बिना सीमेंट के प्राकृतिक पत्थरों से बने इस डैम से नदी का जलस्तर करीब 10 फीट बढ़ा है और इसकी क्षमता करीब 40 मिलियन लीटर बताई जा रही है। इससे लद्दाख के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने में मदद मिल सकती है। आखिर यह रॉक चेक डैम क्यों खास है और लद्दाख में ऐसे 36 चेक डैम बनाने की योजना क्या है ?
नई दिल्ली। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच लद्दाख से पानी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत ने लद्दाख के उपशी में सिंधु नदी पर पहला रॉक चेक डैम तैयार किया है। बिना सीमेंट के बनाए गए इस पत्थर के बांध से नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक बढ़ गया है। इससे आसपास के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। यह परियोजना ऐसे समय में सामने आई है, जब सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख पहले से ज्यादा सख्त है। लद्दाख जैसे सीमावर्ती इलाके में सिंधु नदी के पानी का स्थानीय जरूरतों के लिए बेहतर इस्तेमाल इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है।
बिना सीमेंट के पत्थरों से तैयार किया गया बांध
लद्दाख के उपशी में सिंधु नदी के बहाव को रोकने के लिए बनाए गए इस रॉक चेक डैम की खासियत इसका निर्माण तरीका है। इसे तैयार करने में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। नदी के आर-पार प्राकृतिक पत्थरों को व्यवस्थित तरीके से रखकर यह संरचना बनाई गई है। इसका उद्देश्य नदी के पानी को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उसके बहाव को नियंत्रित करते हुए आसपास के क्षेत्र में पानी का स्तर बढ़ाना है। निर्माण के बाद यहां नदी का जलस्तर करीब 10 फीट बढ़ा है। अब इस पानी को संबंधित सिंचाई नहर के जरिए खेतों तक पहुंचाने की योजना है।
कम पानी के समय किसानों को मिलेगी राहत
लद्दाख में खेती के लिए पानी की उपलब्धता लंबे समय से चुनौती रही है। खासकर बुवाई के समय सिंधु नदी का जलस्तर कई जगहों पर कम हो जाता है। ऐसे में नदी से पंप के जरिए पानी निकालना भी आसान नहीं होता। कई स्थानों पर सिंधु नदी गहरी घाटियों से होकर गुजरती है। इससे नदी का पानी खेतों तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। रॉक चेक डैम बनने से पानी का स्तर ऊपर उठने की उम्मीद है, जिससे सिंचाई के लिए पानी लेना आसान हो सकता है। इससे आसपास के किसानों को बुवाई के दौरान कम नदी बहाव की स्थिति में भी राहत मिल सकती है।
करीब 4 करोड़ लीटर पानी रोकने की क्षमता
उपशी में बनाए गए इस स्ट्रक्चर की स्टोरेज क्षमता करीब 40 मिलियन लीटर यानी लगभग 4 करोड़ लीटर बताई गई है। इतनी मात्रा में पानी उपलब्ध होने से गांवों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इसका सीधा फायदा उन किसानों को होगा, जो खेती के लिए सिंधु नदी के पानी पर निर्भर हैं। यह प्रोजेक्ट स्थानीय स्तर पर सिंचाई की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
सिंधु जल संधि के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि लंबे समय से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रही है। हालांकि, हालिया तनाव के बाद भारत ने इस संधि को रोकने का फैसला किया है। ऐसे समय में लद्दाख में सिंधु नदी पर पानी को नियंत्रित करने और स्थानीय उपयोग के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के लिए चुनौती सिर्फ नदी के पानी का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि बेहद ऊंचाई वाले और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पानी पहुंचाना भी है। रॉक चेक डैम जैसी छोटी और स्थानीय संरचनाएं इसी जरूरत को पूरा करने में मदद कर सकती हैं।
सिर्फ एक डैम नहीं, 36 चेक डैम का प्रस्ताव
लद्दाख प्रशासन की योजना केवल उपशी में बने इस एक रॉक चेक डैम तक सीमित नहीं है। सिंधु नदी के किनारे ऐसे और चेक डैम बनाने की तैयारी चल रही है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में पूरे लद्दाख में 36 चेक डैम बनाने की मंजूरी मांगी गई है। इनमें से 7 हिमालयन रॉक चेक डैम लेह में प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं पर 56 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि अन्य जगहों के लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
लद्दाख में पानी की जरूरत और सीमा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा
लद्दाख में पानी सिर्फ खेती की जरूरत नहीं है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए स्थानीय जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। सिंधु नदी यहां जीवन और आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में नदी के पानी को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक इस्तेमाल करने के लिए छोटे जल ढांचे तैयार करना किसानों के साथ-साथ दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। उपशी का यह रॉक चेक डैम इसी दिशा में एक शुरुआती कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि प्रस्तावित 36 चेक डैम की योजना आगे बढ़ती है, तो लद्दाख में सिंचाई और स्थानीय जल प्रबंधन के ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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