स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका, कहा- यूनिफॉर्म से बनती है समानता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली 11वीं की छात्रा की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि स्कूल का ड्रेस कोड सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और व्यक्तिगत आधार पर अलग छूट नहीं दी जा सकती।

Aug 25, 2026 - 11:26
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स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका, कहा- यूनिफॉर्म से बनती है समानता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल में तय ड्रेस कोड का पालन सभी छात्रों के लिए जरूरी है और किसी एक छात्र या छात्रा को व्यक्तिगत आधार पर अलग छूट नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म केवल कपड़ों का नियम नहीं है, बल्कि यह छात्रों के बीच समानता की भावना बनाए रखने और धार्मिक भेदभाव से मुक्त माहौल तैयार करने में भी भूमिका निभाती है। कोर्ट के अनुसार, जब किसी स्कूल का ड्रेस कोड सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होता है और उसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है, तो ड्रेस तय करने का अधिकार स्कूल प्रशासन के पास है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने सोमवार को यह फैसला सुनाया।

छात्रा ने कहा- पहले 5 साल तक हिजाब पहनकर पढ़ाई की
मामला प्रयागराज के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली 11वीं की नाबालिग छात्रा से जुड़ा है। छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। छात्रा का कहना था कि वह कक्षा 6 से लेकर कक्षा 10 तक हिजाब पहनकर स्कूल जाती रही है और इस दौरान स्कूल प्रशासन ने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई। उसने अपने पक्ष में पुराने पहचान पत्र और स्कूल की ग्रुप फोटो भी कोर्ट में पेश कीं। छात्रा का कहना था कि जब वह पहले हिजाब पहनकर पढ़ाई कर सकती थी तो 11वीं कक्षा में उसे ऐसा करने से क्यों रोका जा रहा है। छात्रा ने इसे अपनी धार्मिक मान्यता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी से भी जोड़ा था।

स्कूल ने कहा- सभी छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड
मामला पहले प्रशासनिक स्तर पर भी पहुंचा था। छात्रा के परिवार ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी, जिसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई। स्कूल के प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया कि संस्थान में सभी छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू है। किसी एक छात्रा को अलग से छूट देने से स्कूल की व्यवस्था और अनुशासन प्रभावित हो सकता है। स्कूल प्रशासन का कहना था कि शिक्षा संस्थान में ड्रेस कोड सभी बच्चों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

हाईकोर्ट बोला- व्यक्तिगत अनुमति यूनिफॉर्म की अवधारणा के खिलाफ
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी एक छात्रा को व्यक्तिगत आधार पर हिजाब पहनने की अनुमति देना स्कूल यूनिफॉर्म की मूल अवधारणा के विपरीत होगा। कोर्ट के अनुसार, अगर अलग-अलग छात्रों को व्यक्तिगत आधार पर ड्रेस कोड में बदलाव की अनुमति दी जाने लगे तो स्कूल में अनुशासन और ड्रेस तय करने का अधिकार संस्थान के बजाय अलग-अलग छात्रों के हाथ में चला जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यूनिफॉर्म छात्रों में बराबरी की भावना पैदा करती है और स्कूल की एक अलग पहचान भी बनाती है। साथ ही, इससे ऐसा माहौल तैयार होता है जहां धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव की स्थिति नहीं बनती।

पहले मिली छूट हमेशा का अधिकार नहीं
छात्रा ने दलील दी थी कि वह पहले कई वर्षों तक हिजाब पहनकर स्कूल जाती रही है और उस समय स्कूल प्रशासन ने कोई रोक नहीं लगाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अगर स्कूल ने पहले कभी हेडस्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति दी भी थी तो इसे छात्रा का स्थायी और हमेशा के लिए लागू रहने वाला अधिकार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि स्कूल प्रशासन अपने नियमों और ड्रेस कोड में बदलाव करने के लिए स्वतंत्र है। किसी पुरानी छूट को भविष्य में भी जारी रखने के लिए संस्थान को बाध्य नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा- स्कूल प्रशासन को ड्रेस तय करने का अधिकार  
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब तक स्कूल का ड्रेस कोड सभी छात्रों के लिए समान है, सही उद्देश्य से बनाया गया है और किसी के साथ भेदभाव नहीं करता, तब तक यह तय करने का अधिकार स्कूल प्रशासन के पास है कि छात्र किस तरह की ड्रेस पहनेंगे। कोर्ट ने साफ किया कि व्यक्तिगत पसंद और संस्थागत अनुशासन के बीच विवाद की स्थिति में स्कूल के अनुशासन और संस्था के व्यापक हित को महत्व दिया जा सकता है। फैसले में केरल, बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट के पहले के फैसलों का भी उल्लेख किया गया।

कोर्ट ने कहा- हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं हुआ 
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अलग-अलग अदालतों में जब भी इस तरह का मुद्दा उठा है, वहां हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए पर्याप्त आधार पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई तथ्य या सबूत उसके सामने नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो कि हिजाब न पहनने से किसी महिला का धर्म प्रभावित हो जाएगा या वह धर्म से बाहर हो जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल छात्रा की धार्मिक आस्था पर रोक नहीं लगा रहा है। स्कूल केवल अपने परिसर में तय यूनिफॉर्म और संस्थागत अनुशासन के पालन की अपेक्षा कर रहा है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content