'लापता व्यक्ति बच्चा हो या बड़ा, तुरंत हो FIR' सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी- आदेश नहीं माना तो CS-DGP को खुद आना होगा कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही उम्र और लिंग की परवाह किए बिना FIR दर्ज करनी होगी। आदेश नहीं मानने वाले राज्यों के मुख्य सचिव और DGP के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
नई दिल्ली। लापता व्यक्ति की शिकायत पर FIR दर्ज करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि लापता व्यक्ति की उम्र या लिंग FIR दर्ज करने में बाधा नहीं बन सकता। कोई बच्चा लापता हो या वयस्क, पुरुष हो या महिला, सूचना मिलते ही पुलिस को तत्काल FIR दर्ज करनी होगी। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि उसके पहले के आदेश में इस्तेमाल किया गया व्यक्ति शब्द किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है। इसमें बच्चे और वयस्क दोनों शामिल हैं।
कुछ राज्यों की व्याख्या पर कोर्ट ने जताई हैरानी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे यह जानकर हैरानी हुई कि कुछ राज्यों ने उसके पहले के आदेश को केवल बच्चों के मामलों तक सीमित समझ लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश की भाषा बिल्कुल साफ थी और उसमें किसी तरह की अस्पष्टता नहीं थी। पीठ ने राज्यों की ओर से दी गई इस व्याख्या को गंभीरता से लिया और कहा कि उसके निर्देशों को उनकी वास्तविक भावना और शब्दों के अनुसार लागू किया जाना चाहिए।
FIR नहीं हुई तो CS और DGP पर हो सकती है कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी दी है कि अगर लापता व्यक्ति की सूचना मिलने के बाद तत्काल FIR दर्ज करने के निर्देश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक यानी DGP को अवमानना नोटिस जारी किया जा सकता है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
22 मई को दिया था देशभर की पुलिस को आदेश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 22 मई को देशभर की पुलिस को महत्वपूर्ण निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही बिना प्रारंभिक जांच के FIR दर्ज की जाए। कोर्ट का यह निर्देश देश में बड़ी संख्या में बच्चों के लापता होने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया था। उस समय करीब 47 हजार बच्चों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी।
हलफनामा दाखिल नहीं करने वाले राज्यों पर भी नजर
पीठ ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के रुख पर भी नाराजगी जताई, जिन्होंने 22 मई के निर्देश के बाद की गई कार्रवाई और मौजूदा स्थिति से संबंधित हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं। अदालत ने ऐसे मामलों में प्रथम दृष्टया अवमानना की स्थिति मानी है। संबंधित अधिकारियों को यह बताना होगा कि कोर्ट के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि लापता व्यक्ति की शिकायत को लेकर पुलिस की कार्रवाई उम्र या लिंग के आधार पर अलग नहीं हो सकती। कोर्ट के निर्देश का दायरा हर व्यक्ति तक है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट और कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर आगे विचार किया जाएगा।
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