भारत-पाक रिश्ते सुधारने के लिए 117 हस्तियों ने लिखी चिट्ठी, मोदी और शहबाज से की दुश्मनी खत्म करने की अपील, पत्र में रखी 11 बड़ी मांगें
मोदी-शहबाज को लिखी एक चिट्ठी ने भारत-पाकिस्तान की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। 117 नामचीन हस्तियों ने बातचीत से लेकर क्रिकेट, व्यापार, वीजा और करतारपुर कॉरिडोर तक 11 बड़ी मांगें रखी हैं। लेकिन बीजेपी ने इस पहल पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर इस पत्र में क्या है, किसने साइन किए हैं और सरकार का रुख क्या हो सकता है?
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जमी कूटनीतिक बर्फ को पिघलाने की एक नई कोशिश सामने आई है। दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त पत्र लिखकर रिश्तों को सामान्य करने और बातचीत का सिलसिला दोबारा शुरू करने की अपील की है। इस चिट्ठी ने सिर्फ कूटनीतिक गलियारों में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी नई बहस छेड़ दी है। यह पहल ऐसे वक्त में सामने आई है जब हाल के वर्षों में आतंकवादी घटनाओं, सीमा पर बढ़े तनाव और कूटनीतिक फैसलों ने दोनों देशों के रिश्तों को लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंचा दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह चिट्ठी रिश्तों में नई शुरुआत की दस्तक है या फिर यह भी पिछली कई शांति पहलों की तरह इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगी।
भारत से 61 और पाकिस्तान से 56 हस्तियां ने लिखी चिट्ठी
संयुक्त पत्र पर भारत की ओर से 61 और पाकिस्तान की ओर से 56 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, आरजेडी सांसद मनोज झा समेत कई पूर्व अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने इस पहल का समर्थन किया है। वहीं पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी सहित कई चर्चित हस्तियां इसमें शामिल हैं। पत्र में कहा गया है कि लगातार बढ़ती दुश्मनी का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और विकास के लिए दोनों देशों को टकराव छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
पत्र में रखी गईं 11 बड़ी मांगें
चिट्ठी में दोनों सरकारों के सामने 11 अहम सुझाव रखे गए हैं। इनमें सबसे पहले भारत-पाकिस्तान के बीच आधिकारिक वार्ता फिर शुरू करने की मांग की गई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर समेत सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत, सीमा पर तनाव कम करने, लोगों के बीच आवाजाही बढ़ाने, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान बहाल करने, क्रिकेट सहित द्विपक्षीय खेल प्रतियोगिताएं शुरू करने और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही आसान वीजा प्रक्रिया, दोनों देशों में हाई कमिश्नरों की दोबारा नियुक्ति, अटारी-वाघा बॉर्डर, दिल्ली-लाहौर बस सेवा, करतारपुर कॉरिडोर और बंद पड़े व्यापार को दोबारा शुरू करने की भी अपील की गई है।
हर मांग के सामने खड़ा है एक बड़ा सवाल
पत्र में जिन रिश्तों को सामान्य बनाने की बात कही गई है, उनकी राह आसान नहीं दिखती। भारत-पाकिस्तान के बीच आखिरी बड़ी शांति पहल 2015 में तब हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक लाहौर पहुंचकर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिले थे। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पठानकोट आतंकी हमला हुआ और बातचीत का सिलसिला फिर थम गया। इसके बाद उरी हमला, पुलवामा, अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला और हाल में पहलगाम आतंकी हमले जैसी घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। आज स्थिति यह है कि व्यापार बंद है, सीधी उड़ानें बंद हैं, अधिकांश वीजा सेवाएं निलंबित हैं और दोनों देशों में पूर्णकालिक हाई कमिश्नर भी तैनात नहीं हैं।
बीजेपी ने कहा- आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते
इस पहल पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जम्मू-कश्मीर भाजपा नेता रविंदर रैना ने कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा के बाद कारगिल युद्ध हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा के बाद भी आतंकी घटनाएं नहीं रुकीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग बातचीत की वकालत कर रहे हैं, क्या वे इस बात की गारंटी देंगे कि भविष्य में पाकिस्तान की धरती से भारत के खिलाफ कोई आतंकी हमला नहीं होगा?
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
