यूपी बोर्ड की कॉपियों में मिले 500-500 के नोट, 12 स्कूलों के प्रिंसिपल को किया गया तलब, सामूहिक नकल की आशंका से मचा हड़कंप
यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट व इंप्रूवमेंट परीक्षा 2026 की कॉपियों की जांच के दौरान 100 से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं में 500-500 रुपये के नोट बंधे मिले। ये कॉपियां 12 छात्रों से संबंधित बताई जा रही हैं। मामले में सामूहिक नकल की आशंका के बीच परीक्षा केंद्र प्रभारी और 12 स्कूलों के प्रधानाचार्यों को तलब किया गया।
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट व इंप्रूवमेंट परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दौरान ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मूल्यांकन के लिए दूसरे जिले में भेजी गई कॉपियों में 500-500 रुपये के नोट बंधे हुए मिले। बताया जा रहा है कि 100 से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं में इस तरह रकम मिली है। मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जांच शुरू कर दी है। अब परीक्षा केंद्र प्रभारी के साथ उन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी तलब किया गया है, जिनके छात्रों की कॉपियों में रुपये मिले हैं। मामले में सामूहिक नकल की आशंका भी जताई जा रही है।
जुलाई में हुई थी कंपार्टमेंट और इंप्रूवमेंट परीक्षा
मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज में जुलाई 2026 में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट व इंप्रूवमेंट परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में करीब 700 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए दूसरे जिले में भेजा गया। जब कॉपियों की जांच शुरू हुई तो कई उत्तर पुस्तिकाओं में 500-500 रुपये के नोट बंधे मिले। जानकारी के मुताबिक, 100 से ज्यादा कॉपियों में रुपये मिलने की बात सामने आई है। ये उत्तर पुस्तिकाएं 12 छात्रों से संबंधित बताई गई हैं। एक ही परीक्षा से जुड़ी बड़ी संख्या में कॉपियों में रकम मिलने के बाद मामला सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ा। इसे परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जोड़कर देखा गया और इसकी जानकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
एक-दो नहीं, 100 से ज्यादा कॉपियों में मिले नोट
मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि उत्तर पुस्तिकाओं में रुपये मिलने का सिलसिला एक-दो कॉपियों तक सीमित नहीं था। 100 से ज्यादा बोर्ड कॉपियों में 500 रुपये के नोट बंधे मिलने की जानकारी सामने आई है। सबसे अहम बात यह है कि ये कॉपियां 12 छात्रों से संबंधित बताई जा रही हैं। ऐसे में जांच का दायरा सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परीक्षा केंद्र की पूरी व्यवस्था और संबंधित विद्यालयों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई। मामले में यह भी आशंका जताई गई कि कहीं परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल तो नहीं कराई गई थी।
परीक्षा केंद्र प्रभारी और 12 प्रधानाचार्यों को बुलाया गया
मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद मुजफ्फरनगर के परीक्षा केंद्र प्रभारी और संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को मेरठ स्थित क्षेत्रीय सचिव कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाया गया। मंगलवार को हुई सुनवाई में सभी 12 प्रधानाचार्यों के साथ जीआईसी मुजफ्फरनगर के प्रधानाचार्य और परीक्षा केंद्र प्रभारी सुभाष चंद्र का भी पक्ष सुना गया। सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय सचिव ज्योति प्रसाद ने प्रधानाचार्यों को फटकार भी लगाई। मामले में परीक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर अधिकारियों ने जानकारी ली। सुनवाई पूरी होने के बाद क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से पूरी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अब मामले में अंतिम निर्णय उच्च स्तर से लिया जाएगा।
इन स्कूलों के प्रधानाचार्य भी जांच के दायरे में
मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय में जिन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सुनवाई के लिए बुलाया गया, उनमें कई प्रमुख विद्यालय शामिल हैं। इनमें श्री कुंदकुंद जैन इंटर कॉलेज खतौली, जीआईसी बडसू, आदेश इंटर कॉलेज, श्री प्राणनाथ इंटर कॉलेज रतनपुरी, सर सैयद इंटर कॉलेज बुढ़ाना और एसडीएस इंटर कॉलेज तितावी शामिल हैं। इसके अलावा किसान मजदूर इंटर कॉलेज जसोई, जीआईसी कन्या इंटर कॉलेज सिसौली, एसडी इंटर कॉलेज, नेशनल इंटर कॉलेज दधेडू और भारत इंटर कॉलेज नंगला मंदौड़ के प्रधानाचार्यों को भी तलब किया गया।
जांच में सामने आएगा कि कॉपियों में रुपये कैसे पहुंचे ?
उत्तर पुस्तिकाओं में रुपये मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर परीक्षा के दौरान या उसके बाद इतनी बड़ी संख्या में कॉपियों में रकम कैसे पहुंची। 100 से ज्यादा कॉपियों में 500-500 रुपये के नोट मिलने और इन कॉपियों के केवल 12 छात्रों से संबंधित होने के कारण परीक्षा केंद्र की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी वजह से मामले में सामूहिक नकल की आशंका को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। फिलहाल क्षेत्रीय कार्यालय अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज चुका है। अब अंतिम फैसला उच्च स्तर पर होना है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि उत्तर पुस्तिकाओं में रकम मिलने के पीछे क्या वजह थी और परीक्षा केंद्र की व्यवस्था में कहीं कोई लापरवाही या अनियमितता हुई थी या नहीं।
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