मस्जिद गिराने पर योगी सरकार पर टिप्पणी करने वाली हुदा जरीवाला गिरफ्तार, सहारनपुर में कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद गिराए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासन के खिलाफ टिप्पणी करने वाली यूट्यूबर हुदा जरीवाला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हुदा ने मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि हम चुप नहीं बैठेंगे। उनके खिलाफ अधिवक्ता दुष्यंत सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। 5 सितंबर को प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद को ध्वस्त किया था।
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराए जाने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासन पर टिप्पणी करने वाली यूट्यूबर हुदा जरीवाला को सहारनपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सोमवार शाम वह मस्जिद गिराए जाने के विरोध में सर्किट हाउस पहुंची थीं। अंदर जाने की जिद करने पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। हुदा के वहां पहुंचने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया। हुदा जरीवाला ने दो दिन पहले एक वीडियो में मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मुसलमानों की मस्जिद शहीद की गई है। यह क्रिमिनल एक्टिविटी है। आखिर मस्जिद गिराने का हक किसने दिया? पूरा मुस्लिम समाज ऐसे लोगों के खिलाफ खड़ा है। हम चुप नहीं बैठेंगे। वीडियो सामने आने के बाद सोमवार सुबह अधिवक्ता दुष्यंत सिंह ने थाना सदर बाजार में हुदा जरीवाला के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में उनके बयान को लेकर कार्रवाई की मांग की गई थी।
वकील बोले- बयान से लोगों में आक्रोश
हुदा जरीवाला के खिलाफ शिकायत करने वाले अधिवक्ता दुष्यंत सिंह ने कहा कि हुदा ने कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन के खिलाफ टिप्पणी की और मुख्यमंत्री के खिलाफ भी आपत्तिजनक बातें कहीं। इसका वीडियो सामने आया है। दुष्यंत सिंह ने कहा कि उनके बयान से लोगों में आक्रोश है। इसी के चलते उन्होंने शिकायत दर्ज कराई और पुलिस से हुदा जरीवाला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की।
कौन हैं हुदा जरीवाला ?
हुदा जरीवाला आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता रह चुकी हैं। वह BBC लंदन में भी काम कर चुकी हैं। फिलहाल वह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर बताती हैं। एक इंटरव्यू में हुदा ने बताया था कि उनके पिता रियाद में रहते थे और वहीं उनका जन्म और शुरुआती पढ़ाई हुई। बाद में उनका परिवार भारत आ गया, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई की। उन्होंने यह भी बताया था कि वह सऊदी अरब के संस्कृति एवं सूचना मंत्रालय की रिसर्च टीम में काम कर चुकी हैं। भारत आने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के शहरों और गांवों में काम किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में प्रचार किया था। हुदा के मुताबिक, उन्हें एजुकेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड और सेव अर्थ मिशन से जुड़े पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
5 सितंबर को कलेक्ट्रेट की मस्जिद गिराई गई थी
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने 5 सितंबर को अवैध बताते हुए ध्वस्त कर दिया था। कार्रवाई करीब 16 घंटे चली और इस दौरान छह बुलडोजर लगाए गए। ध्वस्तीकरण के बाद रविवार सुबह जब मलबा हटाया गया तो उसके नीचे एक कुआं मिला। इसके बाद सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की टीम जांच के लिए पहुंची। टीम के तीन अधिकारी कुएं के अंदर उतरे और उसकी जांच की। फीता डालकर कुएं की गहराई भी मापी गई। अधिकारियों ने शुरुआती तौर पर कुएं के करीब 200 से 250 साल पुराना होने की संभावना जताई।
प्रशासन बोला- कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
मस्जिद को गिराए जाने को लेकर प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग-अलग हैं। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। वहीं, मस्जिद पक्ष का आरोप है कि उसे हाईकोर्ट में अपील करने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता बाबर वसीम ने कहा है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा। वहीं, मस्जिद की शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया है कि इस स्थान पर पहले मंदिर रहा होगा और उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई।
3300 वर्ग फीट में बनी थी दो मंजिला मस्जिद
प्रशासन के रिकॉर्ड के मुताबिक, कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद करीब 3300 वर्ग फीट क्षेत्र में थी। दो मंजिला भवन में दो बड़े हॉल समेत कुल पांच कमरे थे। ग्राउंड फ्लोर पर एक बड़ा हॉल और दो कमरे थे, जबकि पहली मंजिल पर हॉल के साथ एक बड़ा कमरा था। इनमें से एक कमरे में डाकघर भी संचालित होता था। मस्जिद को लेकर विवाद तब सामने आया जब 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने इसे अवैध बताते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की। शिकायत में मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का आरोप भी लगाया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेट को जांच के आदेश दिए। जांच में मस्जिद को अवैध पाया गया।
6.41 करोड़ रुपए हर्जाने का भी आदेश
24 मार्च 2025 को प्रशासन ने नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके बाद 16 जुलाई 2026 को कोर्ट ने मस्जिद को अवैध मानते हुए उसे हटाने और 6.41 करोड़ रुपए का हर्जाना वसूलने का आदेश दिया। कब्जेदारों को 30 दिन का समय दिया गया था। इसके खिलाफ 20 जुलाई को मस्जिद पक्ष ने जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की। 24 जुलाई को जिला कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले पर स्टे देते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई। इसके बाद 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के ध्वस्तीकरण आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मामला अब राजनीतिक और सामाजिक विवाद में भी बदल गया है। एक तरफ प्रशासन कोर्ट के आदेश के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात कह रहा है, वहीं मस्जिद पक्ष न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है। इसी बीच मस्जिद गिराए जाने के विरोध में हुदा जरीवाला के बयान और सोमवार को उनकी गिरफ्तारी ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। पुलिस अब उनके खिलाफ दर्ज शिकायत और सामने आए वीडियो के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
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