सर तन से जुदा के नारे की तुलना जय श्री राम से नहीं हो सकती, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा की जमानत की खारिज, 13 अक्टूबर से जेल में है मौलाना
बरेली हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सर तन से जुदा नारे की तुलना जय श्री राम, अल्लाहु अकबर और अन्य धार्मिक नारों से किए जाने को गलत बताया। अदालत ने कानून-व्यवस्था, भीड़ जुटाने और मौलाना के आचरण पर भी टिप्पणी की।
प्रयागराज। सितंबर 2025 में बरेली में हुई हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के संस्थापक मौलाना तौकीर रजा खान को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके आचरण पर भी नाराजगी जताई और धार्मिक नारों तथा सर तन से जुदा जैसे नारे के बीच अंतर स्पष्ट किया। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की अदालत ने कहा कि सर तन से जुदा नारे की तुलना नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर, जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल, जय श्री राम या हर-हर महादेव जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती। अदालत के मुताबिक ये नारे ईश्वर या गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। कोर्ट ने यूपी सरकार के इस तर्क से भी सहमति जताई कि सर तन से जुदा का नारा कानून के शासन और भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के लिए चुनौती है।
बरेली हिंसा के बाद जेल में हैं मौलाना तौकीर रजा
मौलाना तौकीर रजा खान 13 अक्टूबर 2025 से जेल में हैं। मामला बरेली में आई लव मोहम्मद अभियान से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। पुलिस शिकायत के मुताबिक, रैली के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बावजूद मौलाना तौकीर रजा ने 26 सितंबर 2025 को जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज में जुटने का आह्वान किया था। बाद में प्रशासन की ओर से निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी।
पुलिस ने रोका तो भीड़ हुई हिंसक
पुलिस का आरोप है कि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए श्यामगंज चौराहे की ओर बढ़ने लगे। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद झड़प हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने का आरोप है। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की और मौलाना तौकीर रजा को गिरफ्तार किया गया।
अनुमति नहीं मिली तो आह्वान वापस लेने की दलील दी
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान मौलाना तौकीर रजा की ओर से दलील दी गई कि जब प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी और निषेधाज्ञा लागू कर दी गई, तब सभा का आह्वान वापस ले लिया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़े थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन से अनुमति लिए बिना लोगों को एकत्र होने के लिए लामबंद किया गया था।
हिंसा के बाद के आचरण पर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा के हिंसा के बाद के आचरण को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए बड़ी संख्या में लोगों के उनके आह्वान पर आने के लिए धन्यवाद दिया था। कोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए मौलाना का आचरण जमानत दिए जाने के पक्ष में नहीं जाता। मामले में पुलिस ने 21 दिसंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल कर दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और मौलाना के आचरण को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका खारिज कर दी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
