रामायण से लेकर महाभारत तक... UP के कपड़ों की कहानी 1000 साल पुरानी, सीएम योगी ने बताया काशी के रेशम से अयोध्या के पीतांबर तक का कनेक्शन
रामायण में श्रीराम के विवाह के रेशमी वस्त्रों से लेकर महाभारत में काशी के राजा द्वारा दिए गए कपड़ों तक, यूपी की टेक्सटाइल विरासत का इतिहास कितना पुराना है? यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव 2026 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के रेशम, पीतांबर और प्रदेश की करीब 1000 साल पुरानी हैंडलूम परंपरा का जिक्र किया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बनने वाले कपड़ों और हथकरघा उत्पादों की पहचान आज सिर्फ बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी या भदोही के कालीन तक सीमित नहीं है। इस विरासत की जड़ें कितनी पुरानी हैं, इसका जिक्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव 2026 में किया। उन्होंने प्रदेश की हैंडलूम परंपरा को करीब 1000 वर्षों पुरानी विरासत बताते हुए इसका संबंध रामायण और महाभारत के प्रसंगों से जोड़ा। लखनऊ में 8 और 9 सितंबर को आयोजित हो रहे दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वस्त्रों की परंपरा केवल कारोबार नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक और कारीगरी की विरासत है। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी के रेशम का जिक्र किया और बताया कि भारतीय धार्मिक और साहित्यिक परंपराओं में भी रेशमी और पीतांबर वस्त्रों का उल्लेख मिलता है।
रामायण में श्रीराम के विवाह से माता सीता के वनवास तक कपड़ों का जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के रेशम की चर्चा करते हुए कहा, वाराणसी के रेशम की चर्चा करें, तो वैदिक साहित्य में हिरण्यवस्त्र यानी सोने के तारों से बुने हुए वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। रामायण में भी श्रीराम के विवाह के समय और अन्य राजसी प्रसंगों में भी रेशमी और पीतांबर वस्त्रों की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा, जब भगवान राम 14 साल के वनवास पर गए थे और चित्रकूट में लगभग 12 साल बिताने के बाद दंडकारण्य के लिए निकले, तो माता जानकी को एक ऋषि के आश्रम से दिव्य वस्त्र प्राप्त हुए थे, जैसे कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है। यानी मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा टेक्सटाइल परंपरा को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के पुराने संदर्भों से जोड़ते हुए इसकी ऐतिहासिक गहराई पर जोर दिया।
महाभारत में भी काशी के वस्त्रों का उल्लेख
सीएम योगी ने महाभारत का जिक्र करते हुए बताया कि राजसूय यज्ञ के दौरान युधिष्ठिर को काशी के राजा की ओर से उपहार में दिए गए वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। इनमें रेशमी और सूती वस्त्र शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारत में बनने वाले कपड़ों, खासकर उत्तर प्रदेश में तैयार होने वाले वस्त्रों की मांग केवल देश तक सीमित नहीं थी। दूसरे देशों में भी इनकी मांग थी। उन्होंने रोमन और ग्रीक संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी भारत और उत्तर प्रदेश में बने कपड़ों की मांग थी। सीएम के मुताबिक, इससे यह संकेत मिलता है कि उस दौर में भी यहां तैयार होने वाले वस्त्रों को दूसरे क्षेत्रों और देशों तक पहुंचाने की परंपरा मौजूद थी।
रेशम सिर्फ कपड़ा नहीं, राजघरानों की पहचान भी रहा
प्राचीन भारत में रेशम को उसकी चमक, मजबूती और महीन बुनाई के कारण खास महत्व प्राप्त था। राजघरानों से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष अवसरों तक इसका इस्तेमाल किया जाता था। इसी तरह पीतांबर का भी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है। धार्मिक साहित्य और भारतीय कला में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु को अक्सर पीतांबर धारण किए हुए दिखाया जाता है। पीले रंग को पवित्रता, ज्ञान और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। आज भी धार्मिक आयोजनों में पीतांबर का इस्तेमाल जारी है। वर्ष 2024 में रामलला के लिए बनारस में भारतीय सिल्क से पीतांबर दुपट्टा तैयार किया गया था।
करघे पर कैसे तैयार होता है पीतांबर?
पारंपरिक पीतांबर तैयार करने की प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं। सबसे पहले सिल्क के धागे को साफ करके बुनाई के लिए तैयार किया जाता है। इसके बाद धागों को पीले रंग में रंगा जाता है। रंगे हुए धागों को करघे पर ताना और बाना के रूप में लगाया जाता है। इसके बाद पारंपरिक हथकरघे पर कपड़े की बुनाई की जाती है। पीतांबर के किनारे पर आमतौर पर बहुत चौड़ा डिजाइन नहीं होता। कुछ पारंपरिक पीतांबर में सुनहरे रंग की जरी या हल्की सजावट भी की जाती है। यही बारीकियां इसे सामान्य कपड़े से अलग बनाती हैं और इसमें बुनकर के हुनर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
बनारस की सिल्क से भदोही के कालीन तक
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों ने अपनी खास टेक्सटाइल और क्राफ्ट परंपरा विकसित की है।
- वाराणसी बनारसी सिल्क, ब्रोकेड और जरी के लिए जाना जाता है।
- लखनऊ की पहचान चिकनकारी, जरी और दरदोजी से है।
- भदोही हाथ से बुने कालीनों के लिए प्रसिद्ध है।
- मिर्जापुर में कालीन और दरी की पारंपरिक बुनाई होती है।
- बाराबंकी सूती कपड़ों की बुनाई और हैंडलूम के लिए जाना जाता है।
- सीतापुर में टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग का काम होता है।
- कानपुर में टेक्सटाइल के साथ औद्योगिक उत्पादन की बड़ी भूमिका है।
- मेरठ स्पोर्ट्स गुड्स के साथ टेक्निकल टेक्सटाइल से भी जुड़ा है।
इसके अलावा राज्य के कई दूसरे जिलों में भी स्थानीय कारीगरी और क्राफ्ट क्लस्टर विकसित हुए हैं।
मशीन नहीं, कारीगर के हाथ से बनता है हैंडलूम
हथकरघे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कपड़ा मशीन से नहीं, बल्कि पारंपरिक करघे पर बुनकर तैयार करता है। इसकी बुनाई तकनीक और डिजाइन कई जगहों पर पीढ़ियों से बुनकर समुदायों के बीच आगे बढ़ते आए हैं। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनाई की तकनीक, डिजाइन और मोटिफ अलग-अलग हैं। बनारसी टेक्सटाइल में बारीक मोटिफ, ब्रोकेड और जरी वर्क इसकी खास पहचान हैं। इसलिए हैंडलूम को सिर्फ कपड़ा तैयार करने का माध्यम नहीं माना जाता। इसके पीछे कारीगरों का हुनर, पारंपरिक तकनीक और पीढ़ियों से चली आ रही क्राफ्ट विरासत भी जुड़ी हुई है।
यूपी में करीब 1.99 लाख हथकरघा बुनकर
उत्तर प्रदेश सरकार के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय की जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में करीब 1.99 लाख हथकरघा बुनकर हैं। इसके अलावा लगभग 5 लाख पावरलूम बुनकर भी राज्य में काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश को देश का तीसरा सबसे बड़ा कपड़ा उत्पादक राज्य बताया जाता है। देश के कुल कपड़ा उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है। टेक्सटाइल और परिधान उद्योग राज्य में लगभग 15 लाख लोगों को रोजगार देता है। ऐसे में यूपी की हथकरघा और वस्त्र परंपरा केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि बड़ी आर्थिक और रोजगार व्यवस्था का हिस्सा भी है।
पुरानी विरासत को आधुनिक टेक्सटाइल उद्योग से जोड़ने की कोशिश
यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव 2026 में सरकार का फोकस प्रदेश को वैश्विक वस्त्रोद्योग केंद्र के रूप में विकसित करने पर है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रामायण और महाभारत के संदर्भों के जरिए यूपी के वस्त्र उद्योग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताना इसकी सांस्कृतिक विरासत को सामने रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बनारसी रेशम से लेकर लखनऊ की चिकनकारी और भदोही के कालीन तक, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों की कारीगरी आज भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। अब चुनौती इस विरासत को आधुनिक बाजार, नई तकनीक और वैश्विक मांग से जोड़ने की है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
