मुलायम की कन्या विद्याधन योजना फिर लाएंगे अखिलेश, 12वीं पास छात्राओं को 50 हजार और लैपटॉप देने का किया वादा
अखिलेश यादव ने 2027 में सपा सरकार बनने पर कन्या विद्याधन योजना फिर शुरू करने का दावा किया है। 12वीं पास छात्राओं को 50 हजार रुपए, लैपटॉप, महिलाओं को सालाना 40 हजार और कई अन्य योजनाओं का प्रस्ताव है।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपने पुराने वादों और योजनाओं को नए रूप में सामने ला रही है। अब पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कन्या विद्याधन योजना को दोबारा शुरू करने की बात कही है। सपा के मुताबिक, सरकार बनने पर 12वीं पास छात्राओं को 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके साथ इंटर पास छात्राओं को लैपटॉप देने की योजना भी फिर शुरू करने का प्रस्ताव है। कन्या विद्याधन के 50 हजार रुपए वाले नए प्रस्ताव की जानकारी 21 सितंबर को सामने आई है। अखिलेश की इस घोषणा को केवल एक पुरानी योजना की वापसी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में सपा महिलाओं, छात्राओं और युवाओं को ध्यान में रखकर कई योजनाओं की घोषणा कर चुकी है। इनमें महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपए देने की प्रस्तावित स्त्री सम्मान समृद्धि योजना, छात्राओं को लैपटॉप और साइकिल, मुफ्त सार्वजनिक परिवहन और महिला कर्मचारियों के लिए हर महीने दो दिन के विशेष अवकाश जैसे वादे शामिल हैं।
मुलायम ने शुरू की थी योजना, अखिलेश ने बढ़ाई थी रकम
कन्या विद्याधन योजना की शुरुआत मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुई थी। इसका उद्देश्य 12वीं पास छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देना था। योजना के शुरुआती दौर में पात्र छात्राओं को 20 हजार रुपए की मदद दी जाती थी। मार्च 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद योजना को जारी रखा गया और इसकी सहायता राशि बढ़ाकर 30 हजार रुपए की गई। योजना का लाभ पात्र छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता के तौर पर दिया जाता था। अखिलेश अब इसे दोबारा शुरू करने की बात कर रहे हैं और प्रस्तावित सहायता राशि 50 हजार रुपए करने का दावा है। यानी जिस योजना की शुरुआत बेटियों की पढ़ाई में आर्थिक मदद के उद्देश्य से हुई थी, उसे सपा अब 2027 के चुनावी एजेंडे में नए पैकेज के साथ वापस लाने की तैयारी में है।
कन्या विद्याधन के साथ लैपटॉप की भी वापसी
सपा के प्रस्तावित एजेंडे में केवल नकद सहायता ही नहीं है। इंटर पास छात्राओं को लैपटॉप देने की घोषणा भी की गई है। मार्च 2026 में अखिलेश यादव ने भी कहा था कि सपा सरकार बनने पर बेटियों की पढ़ाई और महिलाओं के कल्याण के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी तथा प्रतिभावान छात्राओं को लैपटॉप देने की व्यवस्था की जाएगी। अगस्त 2026 में पार्टी ने फिर स्पष्ट किया कि इंटर पास छात्राओं को लैपटॉप और छात्राओं को परिवहन सुविधाएं देने का प्रस्ताव उसके चुनावी एजेंडे का हिस्सा होगा।
महिलाओं के लिए 40 हजार सालाना का भी ऐलान
अखिलेश यादव की महिला केंद्रित घोषणाओं में सबसे बड़ी घोषणा स्त्री सम्मान समृद्धि योजना की है। सपा ने कहा है कि सरकार बनने पर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पार्टी ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रस्तावित एजेंडे का हिस्सा बताया है। इस योजना की घोषणा के साथ अखिलेश और डिंपल यादव ने महिलाओं से जुड़े कई दूसरे वादे भी सामने रखे। इनमें छात्राओं को लैपटॉप, साइकिल और मुफ्त बस, मेट्रो तथा रोडवेज यात्रा जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
महीने में दो दिन विशेष अवकाश का वादा
सपा ने महिलाओं और छात्राओं के लिए महीने में दो दिन के विशेष अवकाश का भी प्रस्ताव रखा है। पार्टी के अनुसार यह सुविधा सरकारी और निजी कार्यालयों तथा शिक्षण संस्थानों में महिलाओं के लिए होगी। इसके लिए मेडिकल सर्टिफिकेट या अनावश्यक व्यक्तिगत जानकारी मांगने की जरूरत नहीं होने की बात कही गई है। यह घोषणा महिलाओं से जुड़ी आर्थिक सहायता से अलग एक सामाजिक और कार्यस्थल नीति के रूप में सामने आई है।
विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए आवास का दावा
सपा के प्रस्तावित महिला एजेंडे में आवास को भी जगह दी गई है। पार्टी के मुताबिक विधवा और तलाकशुदा बेसहारा महिलाओं को लोहिया आवास में प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार घर के लिए 100 प्रतिशत सब्सिडी देने और मकान का पट्टा महिला के नाम करने की बात कही गई है। हालांकि इन सभी योजनाओं का अंतिम स्वरूप, पात्रता और वित्तीय प्रावधान सपा के औपचारिक चुनावी घोषणा पत्र में स्पष्ट होना बाकी है।
बंद स्कूलों को फिर खोलने का दावा
महिला और छात्राओं से जुड़े एजेंडे में सरकारी स्कूल भी शामिल हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में 26 हजार से अधिक प्राथमिक और जूनियर स्कूल बंद या विलय किए गए हैं। सपा का कहना है कि सरकार बनने पर इन स्कूलों को फिर से खोला जाएगा। पार्टी ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बच्चियों की ट्यूशन और एडमिशन फीस माफ करने की बात भी कही है। सपा इस मुद्दे को गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक परिवारों के बच्चों की शिक्षा से जोड़कर उठा रही है। अगस्त 2026 में पार्टी ने 26 हजार स्कूलों को फिर खोलने का वादा दोहराया था।
पुराने मॉडल को नए पैकेज में पेश करने की कोशिश
अखिलेश यादव की मौजूदा घोषणाओं में एक पैटर्न दिखाई देता है। एक तरफ 2012 से 2017 के बीच उनकी सरकार से जुड़ी योजनाओं को फिर चर्चा में लाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं मुद्दों को बड़ी रकम और नई सुविधाओं के साथ पेश किया जा रहा है। कन्या विद्याधन में पहले 30 हजार रुपए की सहायता थी, अब 50 हजार रुपए का दावा है। समाजवादी पेंशन के पुराने मॉडल की जगह महिलाओं के लिए सालाना 40 हजार रुपए की नई योजना का प्रस्ताव है। इसी तरह लैपटॉप और साइकिल जैसी पुरानी योजनाओं को भी नए चुनावी एजेंडे के साथ जोड़ा जा रहा है।
सवाल योजनाओं से ज्यादा उनके बजट का है
इन घोषणाओं के साथ सबसे बड़ा सवाल इनके वित्तीय बोझ का भी है। उत्तर प्रदेश का बजट पिछले एक दशक में काफी बढ़ा है। 2026-27 के लिए राज्य का कुल व्यय, कर्ज अदायगी को छोड़कर, 8.51 लाख करोड़ रुपए अनुमानित है और गैर-कर्ज प्राप्तियां 7.32 लाख करोड़ रुपए हैं। इसलिए सपा के प्रस्तावों का वास्तविक वित्तीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने लोग इनके दायरे में आएंगे, पात्रता क्या होगी और योजना के लिए सालाना कितना बजट निर्धारित किया जाएगा। फिलहाल पार्टी की ओर से सामने आए ये प्रस्ताव चुनावी घोषणाओं के स्तर पर हैं।
2027 में महिला और युवा वोटरों पर बढ़ा फोकस
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला और युवा मतदाताओं को लेकर सभी प्रमुख दलों की गतिविधियां तेज हैं। सपा ने अपने नए प्रस्तावों में दोनों समूहों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है। कन्या विद्याधन और लैपटॉप सीधे छात्राओं से जुड़े हैं। साइकिल और मुफ्त परिवहन स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाली छात्राओं के लिए प्रस्तावित हैं। वहीं सालाना 40 हजार रुपए की सहायता व्यापक महिला आबादी को ध्यान में रखकर घोषित की गई है। इससे सपा के 2027 के प्रस्तावित एजेंडे में शिक्षा, आर्थिक सहायता, तकनीक, परिवहन और महिला सुविधाएं एक साथ दिखाई देती हैं। अब इन घोषणाओं को पार्टी अपने अंतिम घोषणा पत्र में किस रूप में शामिल करती है और इनके लिए कितना बजट प्रस्तावित करती है, यह अगला बड़ा चरण होगा।
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